अमर्यादित जीवन बर्बादी का कारण -महासति शशि‍कान्ता

Fri 06 Sep 19  2:50 pm


चित्तौड़गढ़ (हलचल) । शन्त क्रान्ति संघ की महासति षषिकान्ताजी म.सा. ने यहां षुक्रवार को अरिहन्तभवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहाकि चाहे साधु हो या श्रावक जीवन में यदि संयम नहीं है तो जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी के समान अमर्यादित होकर भटक जाता है। हमारे जीवन में धर्मरूपी लगाम होने पर कुमार्ग पर जाने से बच सकते है। आज जो सर्वत्र अनहोनी घटनाऐं देख रहे है, वह अमर्यादित जीवन के कारण ही है। नदी जब अमर्यादित होकर तट के उपर आ जाती है तो प्रलय मच जाता है। तट के भीतर रहने पर ही नदी अच्छी लगती है, उसी प्रकार हमारा जीवन जब अमर्यादित हो जाता है तो दर-दर की ठोकरें खाकर बर्बाद हो जाता है।

आपने कहाकि खान-पान में विवेक एवं वाणी पर नियंत्रण रखोगें तो षरीर भी स्वस्थ्य रहेगा एवं मन भी पवित्र रहेगा। यह रसना इन्द्रिय खाकर षरीर बिगाड़ देती है और बोलकर जीवन बिगाड़ देती है। यदि नियंत्रण नही हों। सुख एवं दुःख में समभाव से जीने की कला जिसे आ गई वह कभी परेषानी का अनुभव नही करेगा।

महासति रचनाश्रीजी म.सा. ने कहाकि हर क्रिया करने से पहले सोचों-चिन्तन करों कि कहीं हमारे कदम गलत रास्ते पर तो नही है। पाप भीरू बनोगे तो पाप से बचते रहोगें। जो व्यक्ति पाप से नहीं डरना उसकी सोच एवं मानसिकता ही वैसी ही बन जाती है और कुतर्क के द्वारा उसे पाप करने में ही आनन्द आता है। हमें पाप एवं पुण्य संवर एवं निर्झरा का प्रारम्भिक ज्ञान होना आवष्यक है। संचालन मंत्री विमलकुमार कोठारी ने किया।

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