एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक 390 से अधिक अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. एनएचए की शाखा नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट (एनएएफयू) ने पैनल में शामिल अस्पतालों में भ्रष्टाचार के कई मामले का उल्लेख किया.

एनएचए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सूचना मिलने के तुरंत बाद राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी को सूचित किया गया, जिसके बाद फर्जी ई-कार्डों को निरस्त किया गया, एफआईआर दर्ज की गई और अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. टीपीए पर जुर्माना भी लगाया गया.’

अधिकारी ने कहा, ‘अभी तक साझा सेवा केंद्रों के लगभग 3,785 ग्रामीण उद्यमियों और पीएमजेएवाई के तहत सूची में दर्ज अस्पतालों के प्रधानमंत्री आरोग्य मित्रों को निष्क्रिय कर दिया गया है.’

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल अस्पतालों पर 4.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. इस योजना का गलत तरीके से लाभ उठाने वाले लाभार्थियों पर भी नजर रखी जा रही है.

 रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब के अस्पतालों में हुए हैं. जिन अस्पतालों को योजना के दायरे से बाहर किया गया है, उनमें गुजरात का कोई अस्पताल नहीं है.

साथ ही जिन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है, उनमें सर्वाधिक 46 उत्तर प्रदेश के हैं और 21 झारखंड के.

रिपोर्ट के अनुसार अकेले गुजरात सरकार ने 15 हजार फर्जी कार्ड रद्द किए है, लेकिन अब भी पांच हजार कार्ड फर्जी होने की आशंका है. इस योजना के तहत गुजरात में 33 लाख परिवारों के 1.65 करोड़ लोगों के कार्ड बने हैं.

राज्य सरकार की ओर से भी एंटी फ्रॉड स्क्वॉड बनाने की बात कही गयी है. इससे पहले केंद्र ने कहा था कि देश भर में दो लाख फर्जी कार्ड बने हैं और उनसे मुफ्त इलाज भी कराया गया.

जबलपुर में बने एक ही परिवार के 170 कार्ड

मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी फर्जीवाड़े के कुछ मामले सामने आये हैं. जबलपुर में आर्थिक लाभ लेने के इरादे से एक निजी अस्पताल द्वारा एक ही परिवार के 170 आयुष्मान कार्ड बना दिए गए.

एनएचए और स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) द्वारा मॉनिटरिंग में यह बात सामने आने पर सभी कार्ड रद्द किए गए. साथ ही इन्हें बनाने वाले आयुष्मान मित्र को भी काम से हटा दिया गया.

इस अस्पताल के प्रबंधन को भी नोटिस दिया गया है. इसके अलावा जबलपुर के ही दो अन्य निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के बावजूद हितग्राहियों से लाखों रुपए वसूलने की शिकायत की भी जांच शुरू हो गई है.

छत्तीसगढ़ सरकार का फर्जीवाड़े से इनकार

 रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के एएसजी अस्पताल में एक ही परिवार के नाम 109 कार्ड बनाए गए थे, जिसमें से 57 ने आंख की सर्जरी भी करवाई थी.

इस बारे में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है. उनका कहना था कि यह मामला मूल रूप से लिपकीय त्रुटि का है न कि आर्थिक अनियमितता का.

ज्ञात हो कि  मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं.

इस योजना के तहत लाखों फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए गए. योजना के तहत दो लाख से ज्यादा फर्जी गोल्डन कार्ड बना दिए गए थे. इन दो लाख कार्डों को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के आईटी सिस्टम ने पकड़ा है.

हालांकि इन दो लाख कार्डों से कितने लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया इसकी जानकारी एनएचए को अभी नहीं मिला है. फिलहाल जांच शुरुआती दौर में है, इसलिए माना जा रहा है कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, फर्जीवाड़ा का एक मामला गुजरात से सामने आया, जहां एक अस्पताल में आरोग्य मित्र ने एक ही परिवार के नाम 1,700 लोगों के कार्ड बना दिए.

पंजाब में दो परिवार के नाम पर 200 कार्ड बने हैं. इसमें दूसरे राज्यों के लोग भी सदस्य बनाए गए हैं. वहीं, मध्य प्रदेश में एक परिवार के नाम 322 कार्ड बने हैं.

खबर के मुताबिक, फर्जी कार्ड बनाकर पैसे वसूलने के ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और झारखंड में सामने आए हैं.

इस योजना के तहत उन लोगों के भी कार्ड बने हैं, जो इसके दायरे में नहीं आते. मालूम हो कि आयुष्मान भारत योजना का लक्ष्य खासकर निम्न और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगे मेडिकल बिल से निजात दिलाना है. इस योजना के दायरे में गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहरी श्रमिकों की पेशेवर श्रेणियों को रखा गया है.

नवीनतम सामाजिक आर्थिक जातीय जनगणना (एसईसीसी) के हिसाब से गांवों के ऐसे 8.03 करोड़ और शहरों के 2.33 परिवारों को शामिल किया गया है.

सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक परिवार को सालाना पांच लाख रुपये की कवरेज दी जाती है और वे सरकारी या निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकते हैं.

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एनएचए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सूचना मिलने के तुरंत बाद राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी को सूचित किया गया, जिसके बाद फर्जी ई-कार्डों को निरस्त किया गया, एफआईआर दर्ज की गई और अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. टीपीए पर जुर्माना भी लगाया गया.’

अधिकारी ने कहा, ‘अभी तक साझा सेवा केंद्रों के लगभग 3,785 ग्रामीण उद्यमियों और पीएमजेएवाई के तहत सूची में दर्ज अस्पतालों के प्रधानमंत्री आरोग्य मित्रों को निष्क्रिय कर दिया गया है.’

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल अस्पतालों पर 4.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. इस योजना का गलत तरीके से लाभ उठाने वाले लाभार्थियों पर भी नजर रखी जा रही है.

 रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब के अस्पतालों में हुए हैं. जिन अस्पतालों को योजना के दायरे से बाहर किया गया है, उनमें गुजरात का कोई अस्पताल नहीं है.

साथ ही जिन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है, उनमें सर्वाधिक 46 उत्तर प्रदेश के हैं और 21 झारखंड के.

रिपोर्ट के अनुसार अकेले गुजरात सरकार ने 15 हजार फर्जी कार्ड रद्द किए है, लेकिन अब भी पांच हजार कार्ड फर्जी होने की आशंका है. इस योजना के तहत गुजरात में 33 लाख परिवारों के 1.65 करोड़ लोगों के कार्ड बने हैं.

राज्य सरकार की ओर से भी एंटी फ्रॉड स्क्वॉड बनाने की बात कही गयी है. इससे पहले केंद्र ने कहा था कि देश भर में दो लाख फर्जी कार्ड बने हैं और उनसे मुफ्त इलाज भी कराया गया.

जबलपुर में बने एक ही परिवार के 170 कार्ड

मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी फर्जीवाड़े के कुछ मामले सामने आये हैं. जबलपुर में आर्थिक लाभ लेने के इरादे से एक निजी अस्पताल द्वारा एक ही परिवार के 170 आयुष्मान कार्ड बना दिए गए.

एनएचए और स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) द्वारा मॉनिटरिंग में यह बात सामने आने पर सभी कार्ड रद्द किए गए. साथ ही इन्हें बनाने वाले आयुष्मान मित्र को भी काम से हटा दिया गया.

इस अस्पताल के प्रबंधन को भी नोटिस दिया गया है. इसके अलावा जबलपुर के ही दो अन्य निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के बावजूद हितग्राहियों से लाखों रुपए वसूलने की शिकायत की भी जांच शुरू हो गई है.

छत्तीसगढ़ सरकार का फर्जीवाड़े से इनकार

 रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के एएसजी अस्पताल में एक ही परिवार के नाम 109 कार्ड बनाए गए थे, जिसमें से 57 ने आंख की सर्जरी भी करवाई थी.

इस बारे में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है. उनका कहना था कि यह मामला मूल रूप से लिपकीय त्रुटि का है न कि आर्थिक अनियमितता का.

ज्ञात हो कि  मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं.

इस योजना के तहत लाखों फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए गए. योजना के तहत दो लाख से ज्यादा फर्जी गोल्डन कार्ड बना दिए गए थे. इन दो लाख कार्डों को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के आईटी सिस्टम ने पकड़ा है.

हालांकि इन दो लाख कार्डों से कितने लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया इसकी जानकारी एनएचए को अभी नहीं मिला है. फिलहाल जांच शुरुआती दौर में है, इसलिए माना जा रहा है कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, फर्जीवाड़ा का एक मामला गुजरात से सामने आया, जहां एक अस्पताल में आरोग्य मित्र ने एक ही परिवार के नाम 1,700 लोगों के कार्ड बना दिए.

पंजाब में दो परिवार के नाम पर 200 कार्ड बने हैं. इसमें दूसरे राज्यों के लोग भी सदस्य बनाए गए हैं. वहीं, मध्य प्रदेश में एक परिवार के नाम 322 कार्ड बने हैं.

खबर के मुताबिक, फर्जी कार्ड बनाकर पैसे वसूलने के ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और झारखंड में सामने आए हैं.

इस योजना के तहत उन लोगों के भी कार्ड बने हैं, जो इसके दायरे में नहीं आते. मालूम हो कि आयुष्मान भारत योजना का लक्ष्य खासकर निम्न और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगे मेडिकल बिल से निजात दिलाना है. इस योजना के दायरे में गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहरी श्रमिकों की पेशेवर श्रेणियों को रखा गया है.

नवीनतम सामाजिक आर्थिक जातीय जनगणना (एसईसीसी) के हिसाब से गांवों के ऐसे 8.03 करोड़ और शहरों के 2.33 परिवारों को शामिल किया गया है.

सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक परिवार को सालाना पांच लाख रुपये की कवरेज दी जाती है और वे सरकारी या निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकते हैं.

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आयुष्मान भारत फ़र्ज़ीवाड़ा: , 171 अस्पतालों को पैनल से बाहर कर लगाया गया जुर्माना

आयुष्मान भारत फ़र्ज़ीवाड़ा: , 171 अस्पतालों को पैनल से बाहर कर लगाया गया जुर्माना

  2020-01-04 07:17 pm


नई दिल्लीः आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत फर्जीवाड़ा करने के आरोप में 171 अस्पतालों को पैनल से बाहर कर दिया गया है और नौ राज्यों के कई अस्पतालों पर 4.5 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखंड और झारखंड के छह अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं.

बयान में कहा, ‘171 अस्पतालों को पहले ही पैनल से बाहर किया जा चुका है. कदाचार में शामिल अस्पतालों पर 4.5 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है.’

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक 390 से अधिक अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. एनएचए की शाखा नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट (एनएएफयू) ने पैनल में शामिल अस्पतालों में भ्रष्टाचार के कई मामले का उल्लेख किया.

एनएचए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सूचना मिलने के तुरंत बाद राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी को सूचित किया गया, जिसके बाद फर्जी ई-कार्डों को निरस्त किया गया, एफआईआर दर्ज की गई और अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. टीपीए पर जुर्माना भी लगाया गया.’

अधिकारी ने कहा, ‘अभी तक साझा सेवा केंद्रों के लगभग 3,785 ग्रामीण उद्यमियों और पीएमजेएवाई के तहत सूची में दर्ज अस्पतालों के प्रधानमंत्री आरोग्य मित्रों को निष्क्रिय कर दिया गया है.’

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल अस्पतालों पर 4.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. इस योजना का गलत तरीके से लाभ उठाने वाले लाभार्थियों पर भी नजर रखी जा रही है.

 रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब के अस्पतालों में हुए हैं. जिन अस्पतालों को योजना के दायरे से बाहर किया गया है, उनमें गुजरात का कोई अस्पताल नहीं है.

साथ ही जिन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है, उनमें सर्वाधिक 46 उत्तर प्रदेश के हैं और 21 झारखंड के.

रिपोर्ट के अनुसार अकेले गुजरात सरकार ने 15 हजार फर्जी कार्ड रद्द किए है, लेकिन अब भी पांच हजार कार्ड फर्जी होने की आशंका है. इस योजना के तहत गुजरात में 33 लाख परिवारों के 1.65 करोड़ लोगों के कार्ड बने हैं.

राज्य सरकार की ओर से भी एंटी फ्रॉड स्क्वॉड बनाने की बात कही गयी है. इससे पहले केंद्र ने कहा था कि देश भर में दो लाख फर्जी कार्ड बने हैं और उनसे मुफ्त इलाज भी कराया गया.

जबलपुर में बने एक ही परिवार के 170 कार्ड

मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी फर्जीवाड़े के कुछ मामले सामने आये हैं. जबलपुर में आर्थिक लाभ लेने के इरादे से एक निजी अस्पताल द्वारा एक ही परिवार के 170 आयुष्मान कार्ड बना दिए गए.

एनएचए और स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) द्वारा मॉनिटरिंग में यह बात सामने आने पर सभी कार्ड रद्द किए गए. साथ ही इन्हें बनाने वाले आयुष्मान मित्र को भी काम से हटा दिया गया.

इस अस्पताल के प्रबंधन को भी नोटिस दिया गया है. इसके अलावा जबलपुर के ही दो अन्य निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के बावजूद हितग्राहियों से लाखों रुपए वसूलने की शिकायत की भी जांच शुरू हो गई है.

छत्तीसगढ़ सरकार का फर्जीवाड़े से इनकार

 रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के एएसजी अस्पताल में एक ही परिवार के नाम 109 कार्ड बनाए गए थे, जिसमें से 57 ने आंख की सर्जरी भी करवाई थी.

इस बारे में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है. उनका कहना था कि यह मामला मूल रूप से लिपकीय त्रुटि का है न कि आर्थिक अनियमितता का.

ज्ञात हो कि  मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं.

इस योजना के तहत लाखों फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए गए. योजना के तहत दो लाख से ज्यादा फर्जी गोल्डन कार्ड बना दिए गए थे. इन दो लाख कार्डों को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के आईटी सिस्टम ने पकड़ा है.

हालांकि इन दो लाख कार्डों से कितने लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया इसकी जानकारी एनएचए को अभी नहीं मिला है. फिलहाल जांच शुरुआती दौर में है, इसलिए माना जा रहा है कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, फर्जीवाड़ा का एक मामला गुजरात से सामने आया, जहां एक अस्पताल में आरोग्य मित्र ने एक ही परिवार के नाम 1,700 लोगों के कार्ड बना दिए.

पंजाब में दो परिवार के नाम पर 200 कार्ड बने हैं. इसमें दूसरे राज्यों के लोग भी सदस्य बनाए गए हैं. वहीं, मध्य प्रदेश में एक परिवार के नाम 322 कार्ड बने हैं.

खबर के मुताबिक, फर्जी कार्ड बनाकर पैसे वसूलने के ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और झारखंड में सामने आए हैं.

इस योजना के तहत उन लोगों के भी कार्ड बने हैं, जो इसके दायरे में नहीं आते. मालूम हो कि आयुष्मान भारत योजना का लक्ष्य खासकर निम्न और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगे मेडिकल बिल से निजात दिलाना है. इस योजना के दायरे में गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहरी श्रमिकों की पेशेवर श्रेणियों को रखा गया है.

नवीनतम सामाजिक आर्थिक जातीय जनगणना (एसईसीसी) के हिसाब से गांवों के ऐसे 8.03 करोड़ और शहरों के 2.33 परिवारों को शामिल किया गया है.

सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक परिवार को सालाना पांच लाख रुपये की कवरेज दी जाती है और वे सरकारी या निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकते हैं.

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