इन्फोसिस संकट : मुकदमे की हो रही तैयारी, शेयरों में आयी गिरावट, जानें पूरा मामला

इन्फोसिस संकट : मुकदमे की हो रही तैयारी, शेयरों में आयी गिरावट, जानें पूरा मामला

Thu 24 Oct 19  4:42 pm


देश की प्रमुख आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में 22 अक्तूबर को 17 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई . इससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है. शेयरों में आयी इस गिरावट से निवेशकों के तकरीबन 53 हजार करोड़ रुपये डूब गये. बीएसई पर कंपनी के शेयर 15.94 प्रतिशत गिरकर 645.35 रुपये पर आ गये. वहीं एनएसई पर यह 15.99 प्रतिशत घटकर 645 रुपये प्रति शेयर रह गया. इन्फोसिस के शेयर में एक दिन में छह साल की यह सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. 
 
इससे कंपनी का मार्केट कैप 3.28 लाख करोड़ से गिरकर 2.83 लाख करोड़ पर आ गया. इन्फोसिस के शेयराें में यह गिरावट कंपनी के मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगने के एक दिन बाद आयी. वहीं 23 अक्तूबर को शेयर बाजार खुलने के साथ कंपनी के शेयर में चार प्रतिशत की गिरावट आयी, लेकिन बाजार के बंद होते-होते एक प्रतिशत से अधिक का सुधार दर्ज हुआ.
 
व्हिसल ब्लोअर समूह ने लगाया आरोप
 
इन्फोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सलिल पारेख और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) नीलांजन रॉय कंपनी की आय और इसके मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और बही खातों में हेराफेरी करने के आरोपों से घिर गये हैं. एथिकल एंप्लॉइज नाम से कंपनी के व्हिसिल ब्लोअर के एक समूह ने इन्फोसिस बोर्ड के साथ ही अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया है. 
 
उसने कहा है कि कंपनी के मुनाफे को ज्यादा दिखाने के लिए निवेश नीति व अकाउंटिंग में छेड़छाड़ की गयी है और ऑडिटर को अंधेरे में रखा गया है. व्हिसिल ब्लोअर ने पत्र में कहा है कि हम इन्फोसिस के कर्मचारी हैं और आरोपों के प्रमाणपत्र के तौर पर उनके पास ई-मेल और वाॅयस रिकॉर्ड हैं.
 
ऑडिट समिति करेगी स्वतंत्र जांच
 
व्हिसिल ब्लोअर की शिकायत मिलने के बाद कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने मामले की जांच कराने की बात कही है. इन्फोसिस ने कहा है कि व्हिसिल ब्लोअर की शिकायत कंपनी की ऑडिट समिति को सौंप दी गयी है और वही इस मामले की स्वतंत्र जांच करेगी. 
 
वहीं शेयर बाजार को दी सूचना में नीलेकणि ने कहा कि समिति ने स्वतंत्र आंतरिक ऑडिटर इकाई और कानूनी फर्म शारदुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी से स्वतंत्र जांच के लिए परामर्श शुरू कर दी है. उन्होंने बताया कि कंपनी के निदेशक मंडल के एक सदस्य को 30 सितंबर, 2019 को दो अज्ञात शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिस पर 20 सितंबर की तारीख लिखी थी. इस शिकायत का टाइटल था- ‘डिस्टर्बिंग अनएथिकल प्रैक्टिसेस.’ इसके साथ ही एक बिना तारीख का नोट था, जिसका टाइटल था- ‘व्हिसिल ब्लोअर कंप्लेन.’ कंपनी ने 21 अक्तूबर को व्हिसिल ब्लोअर की शिकायत को ऑडिट समिति के समक्ष पेश करने की जानकारी दी थी.
 
इन्फोसिस पर मुकदमे की तैयारी
 
इन्फोसिस के निवेशकों की तरफ से अमेरिका की एक लॉ फर्म कंपनी पर मुकदमा दायर करने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लॉ फर्म कंपनी पर भ्रामक सूचना देने के आरोपों की पड़ताल करेगी, साथ ही शेयरों में निवेश करनेवाले दावों का बारीकी से पड़ताल करेगी. कंपनी में शीर्ष स्तर पर जारी उठा-पटक के बाद यह मामला और जटिल हो सकता है. अमेरिकी शेयर बाजार में इन्फोसिस लिस्टेड है, लिहाजा वहां पर निगरानी के साथ-साथ देश में जांच का सामना करना पड़ेगा, जिससे कंपनी का संकट बढ़ सकता है.
 
भारत सरकार भी कर रही है निगरानी!
 
इन्फोसिस मामले में भारत सरकार बारीकी से नजर बनाये हुए है. आधिकारिक बयान के अनुसार, कंपनी के मौजूदा विवाद में सरकार फिलहाल जल्दबाजी के मूड में नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी पर लगे आरोप गंभीर हैं, जिससे दिग्गज आईटी कंपनी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. इस वाकये से कर्मचारियों, निवेशकों और ग्राहकों की नजर में कंपनी की छवि धूमिल होगी.
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