नई दिल्ली, । United States (US) की दादागिरी ने एक और समृद्ध देश को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इस देश की अर्थ व्यवस्था इतनी खस्ताहाल हो चुकी है कि यहां लोगों को पेट भरने और पीने के पानी के लिए भी जूझना पड़ रहा है। यहां 25000 की एक रोटी बिक रही है। अर्थ व्यवस्था के मामले में इस देश की स्थिति भी वेनेजुएला जैसी होने को है। बस अंतर इतना है कि इस देश के लोग अमेरिका के खिलाफ एकजुट हैं और सरकार देशवासियों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव मदद कर रही है।

यहां हम बात कर रहे हैं अकूत तेल भंडार वाले देश ईरान की। इस देश की कुल राष्ट्रीय आय का आधा हिस्सा कच्चे तेल के निर्यात से हुआ करता था। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की तेल निर्यात से होने वाली आय लगभग बंद हो चुकी है। अपने परमाणु कार्यक्रमों की वजह से ईरान को लगभग 40 साल से लगातार विभिन्नत तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। 12 जून 2019 को अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने के बाद ईरान पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए गए हैं। दरअसल, अमेरिका नहीं चाहता है कि ईरान परमाणु शक्ति बने। अमेरिका के अनुसार ईरान का परमाणु शक्ति बनना पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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40 साल में सबसे खराब दौर में ईरानी अर्थ व्यवस्था

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की अर्थ व्यवस्था अपने 40 साल के इतिहास में सबसे खराब दौर से गुजर रही है। इसका असर ईरान के आम लोगों और उनकी दैनिक जरूरतों पर भी पड़ रहा है। खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण ईरान में इन दिनों महंगाई चरम पर है। एक रोटी जो साल भर पहले तक 1000 ईरानी रियाल (1.64 रुपये) में मिलती थी, आज उसकी कीमत 25000 ईरानी रियाल (40.91 रुपये) हो गई है। इसी तरह खाने पीने की अन्य चीजें भी कम से कम तीन से चार गुना तक महंगी हो चुकी हैं।

 

ईरान पर हमला करने वाला था अमेरिका
12 जून को अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन गिराए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश दे दिया था, लेकिन अंतिम क्षणों में वह इससे पीछे हट गए। उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर कहा था, 'मुझे कोई जल्दबाजी नहीं है। मैंने हमले को दस मिनट पहले रोक दिया।' ड्रोन को गिराने के बाद ईरान ने दावा किया था कि यह जासूसी ड्रोन उसके वायु क्षेत्र में उड़ रहा था। वहीं अमेरिका का कहना था कि ड्रोन अंतरराष्ट्रीय वायु क्षेत्र में था। इस ड्रोन की कीमत 13 करोड़ डॉलर (करीब 900 करोड़ रुपये) थी। ट्रंप ने पहले ईरान में कुछ लक्ष्यों जैसे रडार और मिसाइल ठिकानों पर हमले की मंजूरी दी थी। हालांकि, हमले से ठीक पहले उसी शाम फैसले को रद कर दिया गया था।

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 एक और देश बर्बादी की कगार पर, 25000 में बिक रही रोटी

एक और देश बर्बादी की कगार पर, 25000 में बिक रही रोटी

Wed 03 Jul 19  3:09 pm


नई दिल्ली, । United States (US) की दादागिरी ने एक और समृद्ध देश को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इस देश की अर्थ व्यवस्था इतनी खस्ताहाल हो चुकी है कि यहां लोगों को पेट भरने और पीने के पानी के लिए भी जूझना पड़ रहा है। यहां 25000 की एक रोटी बिक रही है। अर्थ व्यवस्था के मामले में इस देश की स्थिति भी वेनेजुएला जैसी होने को है। बस अंतर इतना है कि इस देश के लोग अमेरिका के खिलाफ एकजुट हैं और सरकार देशवासियों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव मदद कर रही है।

यहां हम बात कर रहे हैं अकूत तेल भंडार वाले देश ईरान की। इस देश की कुल राष्ट्रीय आय का आधा हिस्सा कच्चे तेल के निर्यात से हुआ करता था। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की तेल निर्यात से होने वाली आय लगभग बंद हो चुकी है। अपने परमाणु कार्यक्रमों की वजह से ईरान को लगभग 40 साल से लगातार विभिन्नत तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। 12 जून 2019 को अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने के बाद ईरान पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए गए हैं। दरअसल, अमेरिका नहीं चाहता है कि ईरान परमाणु शक्ति बने। अमेरिका के अनुसार ईरान का परमाणु शक्ति बनना पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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40 साल में सबसे खराब दौर में ईरानी अर्थ व्यवस्था

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की अर्थ व्यवस्था अपने 40 साल के इतिहास में सबसे खराब दौर से गुजर रही है। इसका असर ईरान के आम लोगों और उनकी दैनिक जरूरतों पर भी पड़ रहा है। खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण ईरान में इन दिनों महंगाई चरम पर है। एक रोटी जो साल भर पहले तक 1000 ईरानी रियाल (1.64 रुपये) में मिलती थी, आज उसकी कीमत 25000 ईरानी रियाल (40.91 रुपये) हो गई है। इसी तरह खाने पीने की अन्य चीजें भी कम से कम तीन से चार गुना तक महंगी हो चुकी हैं।

 

ईरान पर हमला करने वाला था अमेरिका
12 जून को अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन गिराए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश दे दिया था, लेकिन अंतिम क्षणों में वह इससे पीछे हट गए। उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर कहा था, 'मुझे कोई जल्दबाजी नहीं है। मैंने हमले को दस मिनट पहले रोक दिया।' ड्रोन को गिराने के बाद ईरान ने दावा किया था कि यह जासूसी ड्रोन उसके वायु क्षेत्र में उड़ रहा था। वहीं अमेरिका का कहना था कि ड्रोन अंतरराष्ट्रीय वायु क्षेत्र में था। इस ड्रोन की कीमत 13 करोड़ डॉलर (करीब 900 करोड़ रुपये) थी। ट्रंप ने पहले ईरान में कुछ लक्ष्यों जैसे रडार और मिसाइल ठिकानों पर हमले की मंजूरी दी थी। हालांकि, हमले से ठीक पहले उसी शाम फैसले को रद कर दिया गया था।

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