एक माँ को ही अपने से ज्यादा संतान को खिलाने में आनन्द आता है - मुनि पुंगव सुधासागर

Tue 28 May 19  5:21 pm


  • पंचकल्याणक महोत्सव में निकली शोभायात्रा हुआ जन्माभिषेक कलश 

भीलवाड़ा (हलचल) । चन्द्रशेखर आजाद नगर स्थित  श्री आदिनाथ दिगम्बर जिन मन्दिर में पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन हजारों श्रावक श्राविकाओं की मौजूदगी में भगवान का जन्मकल्याणक हुआ। सौधर्म इन्द्र ने तीर्थंकर बालक के जन्म पर रत्नो की वर्षा की । इसके बाद बालक की भव्य शोभायात्रा काॅलोनी के मुख्य मार्गो से निकाली गई। यात्रा में सौधर्म इन्द्र ने तीर्थंकर बाल्क को ऐरावत हाथी पर विराजमान किया। यात्रा में हाथी, घोड़ों, बग्गियों एवं बैण्ड बाजो के साथ समाजजन भक्ति नृत्य करते हुए चल रहे थे। पाण्डुकशिला पर पहुंच कर भगवान का सौर्धम इन्द्र एवं श्रावको ने जन्माभिषेक किया। प्रथम जन्माभिषेक कलश करने का सौभाग्य रतनलाल, महेंद्र कुमार कासलीवाल को मिला। जिज्ञासा समाधान के पश्चात तीर्थंकर बालक को पालना झुलाना एवं बाल क्रीड़ा का मनोहारी दृश्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ।  इससे पूर्व धर्मसभा में मुनि पुंगव 108 सुधासागर महाराज ने कहा कि हर गुरू साधु नहीं हो सकता। गुरू उपकारी को माना जाता है जो आपका कल्याण एवं जीवन का सही मार्गदर्शन करे। स्वार्थ में व्यक्ति कोई भी कष्ट उठा लेता है चाहे स्वार्थ का भाव सही हो या गलत। जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उपज सकता है। संसार में रहकर प्राणी संसार को तज सकता है। सिर्फ एक माँ ही है जिसे स्वयं को खाने से ज्यादा अपनी संतान को खिलाने में आनन्द आता है।  संयोजक प्रवीण चौधरी ने बताया कि मुनि श्री के आशीर्वाद से शास्त्रीनगर मैन सेक्टर जिन मन्दिर का भव्य पंचकल्याणक महोत्सव 20 से 25 जून को होगा। जिसके सभी पात्रो का चयन बोलियों द्वारा कार्यक्रम स्थल पर हुआ। पार्श्वनाथ भगवान की मूर्ति एवं वैदी के पूण्यार्जक शांतिदेवी, प्रदीप, दिलीप, प्रवीण, नवीन, चौधरी परिवार, मुनि सुव्रतनाथ भगवान की मूर्ति एवं वैदी के पूण्यार्जक महावीर प्रसाद, नन्दलाल, सुरेश कोठारी परिवार, सौधर्म इन्द्र सुरेशचन्द्र पाटनी, कुबेर इन्द्र विजय झांझरी, यज्ञनायक प्रेम सेठी,  माता पिता चन्द्रकला देवी व पदम चौधरी परिवार, राजा श्रैयांस जय कुमार पाटनी परिवार एवं सनत कुमार इन्द्र बनने का सौभाग्य राजेन्द्र बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

बुधवार को दोपहर में आदिकुमार का विवाह एवं राज्याभिषेक, युवराज आदिकुमार का वैराग्य, भरत बाहुबली को राज्य सौंपना, पालकी में आरूढ होकर दिक्षावन की और प्रस्थान, दिक्षा विधि एवं संस्कार रोपण आदि कार्यक्रम होंगे।

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