एमएसएमई उद्योगों के लिए विद्युत दरों में कमी नही करने का विरोध

एमएसएमई उद्योगों के लिए विद्युत दरों में कमी नही करने का विरोध

  2020-02-07 05:41 pm

भीलवाडा Halchal मेवाड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने राज्य के मुख्यमंत्री एवं उद्योगमंत्री को प्रतिवेदन भेजकर राजस्थान राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से राज्य में वर्ष 2019-20 के लिए घोषित विद्युत दरों में एमएसएमई उद्योगों के लिए दरों में कमी नही करने का विरोध किया है। मेवाड चेम्बर के मानद महासचिव आर के जैन ने बताया कि केवल एक एमवीए से उपर कनेक्टेड लोड वाले बडे उद्योगों के लिए विद्युत दरों को 7.30 प्रति यूनिट से घटाकर 6.30 रु प्रति युनिट किया गया है। एमएसएमई उद्योगांे के लिए दरें पूर्वतः 7 रु प्रति युनिट ही रखी गई है, वही दूसरी ओर इन उद्योगों के लिए फिक्स चार्जेज 165 रु से बढाकर 230रु प्रति केवीए कर दिया गया है। इससे टेक्सटाइल एवं अन्य सभी क्षेत्रों के वृहत उद्योगों के मुकाबले एमएसएमई उद्योग प्रतिस्पद्र्धा में पिछड कर संकट में आ जाएगे एवं पहले ही उच्च दरों की मार झेलते हुए बन्द होने के कगार पर पहुँच जाएगे।

जैन ने बताया कि अगस्त-सितम्बर 2019 में राज्य के उद्योग मंत्री एवं मुख्य सचिव के साथ राज्य में औद्योगिक विकास के लिए हुए बैठकों में सरकार ने इस बात पर सहमति जताई थी कि 125 केवीए से उपर एमएसएमई एवं वृहत उद्योग के लिए विद्युत दरों में कमी की जाएगी एवं डिस्कॉम ने इस तरह के प्रस्ताव आरईआरसी को दिया भी था, लेकिन आश्वासन के बावजूद भी एमएसएमई उद्योगों के लिए दरों में कमी नही की गई है।

उन्होंने कहाकि गुजरात एवं महाराष्ट्र में उद्योगों को 2 रु प्रति यूनिट की छूट दी जा रही है। मध्यप्रदेश में उद्योग में मासिक औसत खपत से ज्यादा विद्युत खपत करने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। साथ ही अगर इकाईयां अपने स्वयं के विद्युत सयन्त्रों से विद्युत उपयोग को कम करके निगम से ज्यादा विद्युत लेती है तो 2 रु प्रति यूनिट की छूट दी जा रही है। विभिन्न राज्यों में स्थाई शुल्क काफी कम है एवं ऑफ पीक आवर्स में विद्युत उपयोग पर कई राज्यों में 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।

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