कोरोना के साथ जीना सीखे लोग, अब बरतने लगे हैं सावधानियां

कोरोना के साथ जीना सीखे लोग, अब बरतने लगे हैं सावधानियां

  2020-05-23 04:27 pm

भीलवाड़ा (हलचल)। दो महीने तक लॉकडाउन व कफ्र्यू में रहने के बाद अब लोग कोरोना के साथ जीना सीख गए हैं। भीलवाड़ा कोरोना के संक्रमण को रोकने में रोल मॉडल बना और यहां के प्रबंधन की देश-विदेश में भी तारीफ हुई। कोरोना संक्रमित स्वस्थ होकर घरों को लौटे। अब तक सिर्फ तीन मौतें हुई और उन तीनों की मौत का कारण अन्य रोग रहे, कोरोना नहीं।
अब भीलवाड़ा में कोरोना के जो मामले सामने आ रहे हैं, वे उन लोगों से आ रहे हैं जो अभी बाहर से लौटे हैं। ये लोग रोजगार के लिए बाहर गए थे। लॉकडाउन के चलते इनके सामने रोजगार व खाने का संकट पैदा हो गया। ऐसे में ये अपने घरों को लौटने लगे। भीलवाड़ा में रहने वाले बाहर के लोग यहां से गए हैं। सरकार व प्रशासन की ओर से उनके जाने के प्रबंध भी कराए गए। वहीं अन्य राज्यों में फंसे भीलवाड़ा के लोगों को भी यहां लाया गया। हजारों की संख्या में लौटे इन लोगों में से ही कोरोना संक्रमण के केस सामने आ रहे हैं। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से पुख्ता व्यवस्थाएं की गई है। उपखंड व पंचायत स्तर पर क्वारंटाइन सेंटर बनाकर कार्मिक नियुक्त किए गए हैं। बाहर से लौटने वालों में कोरोना के लक्षण पाए जाने वालों को इन क्वारंटाइन सेंटर व बिना लक्षण वालों को होम क्वारंटाइन किया जा रहा है। इन लोगों की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है जिससे कोरोना संक्रमण की आशंका को कम किया जा सके।
इससे पूर्व प्रशासन की ओर से लगाया गया कफ्र्यू भी अब केंद्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार हटा दिया गया है। अधिकतर दुकानों व बाजारों को निश्चित समयावधि में खोलने की अनुमति भी दे दी गई है। धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य होने लगा है। जिंदगी पटरी पर आने लगी है। आवागमन में छूट मिली है। घर से निकलते समय सुरक्षा के उपाय में भी शहरवासी पीछे नहीं हैं। वे अब हाथों को सैनेटाइज करना सीख गए हैं। मास्क भी लगाते हैं। वे जानते हैं कि कोरोना से बचने के लिए इन दोनों चीजों को दैनिक जीवन में शामिल करना जरूरी है और यह जरूरी भी है। फिजीकल डिस्टेंसिंग की परिभाषा भी लोगों के समझ में आने लगी है। हालांकि कोरोना पॉजीटिव पाए गए मरीजों में बिना लक्षण वाले मरीज भी काफी पाए गए थे। 
घट सकता है कंटेनमेंट जोन का दायरा
कंटेनमेंट जोन में अब लोगों को राहत देने की तैयारी की जा रही है। इसका दायरा कम करने की योजना बनाई गई है। इस सीमा को एक किलोमीटर से घटाकर पांच सौ या ढाई सौ मीटर तक सीमित किया जा सकता है। सुबह-शाम सैनेटाइजेशन के अलावा 12 घंटे दवा व जरूरी चीजों का वितरण भी कराया जाएगा। अभी तक कंटेनमेंट जोन का एक किलोमीटर का इलाका प्रतिबंधित किया गया था। इससे इन क्षेत्रों में रहने वाले अन्य लोगों को परेशानी हो रही थी। दायरा कम होने से आसपास के क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सकेगी।
अभी भी सतर्क रहने की जरूरत
भीलवाड़ा के लोगों को अभी भी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। ध्यान रखें कि कोरोना का संक्रमण कम हुआ है, खत्म नहीं। इसलिए घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाएं। हाथों को सैनेटाइज या साबुन से बार-बार धोएं। फिजीकल डिस्टेंस तो कोरोना से बचने के लिए पहला कदम है, इसका पालन तो अवश्य करें। मास्क को तो यूनिफॉर्म में ही शामिल कर लें।  

news news news news news news news news