खराब रखरखाव से दवाएं बनती जा रही हैं जानलेवा

खराब रखरखाव से दवाएं बनती जा रही हैं जानलेवा

Fri 10 May 19  7:30 am


लापरवाही से दवाएं बन रहीं जहर दिल्ली । देश में बिक रही दवाएं खराब रखरखाव से जानलेवा बनती जा रही हैं। निर्माताओं से लेकर, होलसेलर्स और रिटेलर्स की दुकानों में भी दवाओं का रखरखाव संतोषजनक स्थिति से कोसों दूर है। मेडिकल स्टोर्स में खराब रखरखाव से दवाओं का असर कम होने, यहां तक नुकसानदायक होने तक का खतरा रहता है। देश के दवा नियामक सीडीएससीओ ने संसद की कमेटी ऑन सबॉर्डिनेट लेजिसलेशन को सौंपे अपने जवाब में यह सच्चाई स्वीकार की है। सीडीएससीओ ने अपने जवाब में कहा है कि निर्माता, होलसेलर और रिटेलर किसी भी स्तर पर दवाओं का रखरखाव ठीक ढग से नहीं कर रहे हैं। मसलन दवाओं को जितने तापमान पर रखना चाहिए, उससे अधिक तापमान पर दवाएं रखी जाती हैं। दवा के भंडारण में आद्रता के स्तर का भी ध्यान नहीं रखा जाता। जबकि दवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उनका भंडारण दवा के मानक के अनुरूप हो। ड्रग इंस्पेक्टर्स की कमी सीडीएससीओ ने ड्रग इंस्पेक्टर्स की कमी को भी स्वीकार करते हुए कहा है कि माशलेकर कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक, 200 केमिस्ट शॉप और 50 निर्माण संयंत्र पर एक इंस्पेक्टर होना जरूरी है। देश में मौजूद 8 लाख केमिस्ट शॉप और 10 हजार निर्माण संयंत्र के हिसाब से देश में 4200 ड्रग इंस्पेक्टर होने चाहिए, जबकि फिलहाल देश में ड्रग इंस्पेक्टरों के 1600 पद स्वीकृत हैं, इसमें भी 1200 पदों पर ही ड्रग इंस्पेक्टर मौजूद हैं। इसमें भी सीडीएससीओ के पास मात्र 224 ड्रग इंस्पेक्टर हैं। यह है खराब रखरखाव का असर दवा विशेषज्ञ एवं मंथली इंडेक्स ऑफ मेडिकल स्पेशियलिटी के संपादक डॉक्टर सीएम गुलाटी के मुताबिक, किसी भी दवा की एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष के बीच शेल्फ आयु होती है। यह आयु उस दवा के लिए तय रखरखाव मानक के हिसाब से होता है। यदि रखरखाव ठीक नहीं है तो दवा की आयु कम हो जाती है। इससे दवा का असर कम हो जाता है और कई मामलों में दवा समय से पहले ही एक्सपायर भी हो जाती है। भारत के नियमों में भी कमी डॉक्टर गुलाटी ने कहा कि किसी भी दवा की आयु फार्मोकोपिया में निर्धारित होती है। भारत में खुद का कोई शोध नहीं हो रहा है, इसलिए हमने अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप की फार्मोकोपिया को ही स्वीकार कर रखा है। जबकि इन देशों में अमेरिका को छोड़ दें तो कहीं भारत जैसी गर्मी नहीं पड़ती। ऐसे में हमारे यहां स्वीकृत दवाओं की शेल्फ आयु वैसे ही उतनी कारगर नहीं रहती। इसके अलावा, इसका लीगल पक्ष देखें तो दवाओं को कूल और ड्राई प्लेस पर रखने का नियम है। यह अस्पष्ट है, क्योंकि जो तापमान जैसलमेर के लिए कूल कहा जाएगा, शिमला में वह गर्म होगा। दवाओं के लिए तय तापमान का साफ जिक्र होना चाहिए। 18 से 30 डिग्री तापमान होना चाहिए दवा के रखरखाव के लिए 18 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए इससे अधिक तापमान होने पर दवा खराब हो सकती हैं। गुणवत्ता में कमी होगी इंजेक्शन को 2 से 12 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाना चाहिए 4 से 5 दिन तक इंजेक्शन अधिक तापमान में रहने पर 50 फीसदी तक असर खो देती है एंटिबायॉटिक्स सीरप में हो तो खुलने के बाद दस दिन के अंदर तक ही सही हालत में रहता है गर्मी में तो तेजी से इसका असर कम होता है। सिरप को हमेशा फ्रीज में ही रखें इंसुलिन वैक्सीन या जीवन रक्षक दवा फ्रिज में नहीं रखी जाए तो कोल्ड चेन टूटने के बाद इस दवा का प्रयोग करने पर यह बेअसर साबित होती है। उस फ्रिज का तापमान दो डिग्री से 8 डिग्री सेल्सियस रखा जाता है, जिसमें टीकों का भंडारण किया जाता है। दवाओं को नियमानुसार कोल्ड चेन में रखा जाना चाहिए।
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