जानकार सूत्रों के अनुसार भीलवाड़ा में विमल ब्रांड के नाम पर कई फैक्ट्रियों में कपड़ा बन रहा है, जिसकी क्वालिटी इतनी घटिया है कि कपड़े की सिलाई भी महंगी पड़ रही है। पैकिंग डिब्बों में खरीदा गया कपड़ा सिलाई के बाद एक-दो बार धुलाई के बाद ही खराब हो जाता है।
भीलवाड़ा हलचल को एक व्यक्ति ने मिक्स एंड मैच बॉक्स लाकर बताया जिस पर विमल शूटिंग-शर्टिंग के नाम पर कपड़े की पैकिंग की गई है और उस पर उत्पादक कंपनी का नाम भी विमल लिखा है। डिब्बे पर बिग बॉस नामक क्वालिटी दर्शाई गई है और कपड़े को अच्छा बताते हुए फील द डिफरेंस का इस्तेमाल भी किया गया है लेकिन डिब्बे की पैकिंग खोलने पर उस पर विमल प्रीमियम फैब्रिक क्वालिटी का रैपर लगा मिला जबकि सेल्वेज पर विमल विनकोम प्राइवेट लिमिटेड लिखा था। कपड़े को थोड़ा सा खींचने पर स्लीपेज आ जाते हैं। 
जानकारों का कहना है कि भीलवाड़ा में नकली सेल्वेज के चलते अच्छा कपड़ा बनाते हैं उनकी साख को भी बट्टा लग रहा है। इससे अपने मार्का का कपड़ा बनाने वाले व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
विमल के नाम पर धोखा खाने वाले व्यापारियों और ग्राहकों को प्रतिदिन लाखों रुपए की चपत लग रही है। सूत्रों की मानें तो इस तरह का कपड़ा ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों और फेरी वालों द्वारा विमल का बताकर बेच रहे हैं जबकि कुछ शहरों में तो इसे शोरूमों तक में बेचे जाने की चर्चा है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई...
विमल, दिग्जाम, सियाराम के साथ ही रेड एंड टेलर व अन्य मार्का के नकली या मिलते-जुलते सेल्वेज भीलवाड़ा में बनाए जाते रहे हैं और पहले भी नकली सेल्वेज के छापे पड़ चुके हैं और बड़ी मात्रा में ख्यातनाम कंपनियों का कपड़ा पुलिस ने जब्त किया हुआ है। इसके बावजूद यहां नकली कपड़ा बनाने की रोकथाम नहीं हो पाई है।     

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भीलवाड़ा हलचल को एक व्यक्ति ने मिक्स एंड मैच बॉक्स लाकर बताया जिस पर विमल शूटिंग-शर्टिंग के नाम पर कपड़े की पैकिंग की गई है और उस पर उत्पादक कंपनी का नाम भी विमल लिखा है। डिब्बे पर बिग बॉस नामक क्वालिटी दर्शाई गई है और कपड़े को अच्छा बताते हुए फील द डिफरेंस का इस्तेमाल भी किया गया है लेकिन डिब्बे की पैकिंग खोलने पर उस पर विमल प्रीमियम फैब्रिक क्वालिटी का रैपर लगा मिला जबकि सेल्वेज पर विमल विनकोम प्राइवेट लिमिटेड लिखा था। कपड़े को थोड़ा सा खींचने पर स्लीपेज आ जाते हैं। 
जानकारों का कहना है कि भीलवाड़ा में नकली सेल्वेज के चलते अच्छा कपड़ा बनाते हैं उनकी साख को भी बट्टा लग रहा है। इससे अपने मार्का का कपड़ा बनाने वाले व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
विमल के नाम पर धोखा खाने वाले व्यापारियों और ग्राहकों को प्रतिदिन लाखों रुपए की चपत लग रही है। सूत्रों की मानें तो इस तरह का कपड़ा ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों और फेरी वालों द्वारा विमल का बताकर बेच रहे हैं जबकि कुछ शहरों में तो इसे शोरूमों तक में बेचे जाने की चर्चा है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई...
विमल, दिग्जाम, सियाराम के साथ ही रेड एंड टेलर व अन्य मार्का के नकली या मिलते-जुलते सेल्वेज भीलवाड़ा में बनाए जाते रहे हैं और पहले भी नकली सेल्वेज के छापे पड़ चुके हैं और बड़ी मात्रा में ख्यातनाम कंपनियों का कपड़ा पुलिस ने जब्त किया हुआ है। इसके बावजूद यहां नकली कपड़ा बनाने की रोकथाम नहीं हो पाई है।     

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खूबसूरत पैकिंग में धड़ल्ले से बिक रहा विमल मार्का का नकली कपड़ा

खूबसूरत पैकिंग में धड़ल्ले से बिक रहा विमल मार्का का नकली कपड़ा

  2020-02-14 02:42 pm

भीलवाड़ा (हलचल)। ख्यातनाम कपड़ा कंपनी विमल के नाम पर भीलवाड़ा में जमकर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी हो रही है। विमल ब्रांड के मिक्स एंड मैच बॉक्स में घटिया कपड़ा बेचकर कंपनी की साख को भी चूना लगाया जा रहा है।
जानकार सूत्रों के अनुसार भीलवाड़ा में विमल ब्रांड के नाम पर कई फैक्ट्रियों में कपड़ा बन रहा है, जिसकी क्वालिटी इतनी घटिया है कि कपड़े की सिलाई भी महंगी पड़ रही है। पैकिंग डिब्बों में खरीदा गया कपड़ा सिलाई के बाद एक-दो बार धुलाई के बाद ही खराब हो जाता है।
भीलवाड़ा हलचल को एक व्यक्ति ने मिक्स एंड मैच बॉक्स लाकर बताया जिस पर विमल शूटिंग-शर्टिंग के नाम पर कपड़े की पैकिंग की गई है और उस पर उत्पादक कंपनी का नाम भी विमल लिखा है। डिब्बे पर बिग बॉस नामक क्वालिटी दर्शाई गई है और कपड़े को अच्छा बताते हुए फील द डिफरेंस का इस्तेमाल भी किया गया है लेकिन डिब्बे की पैकिंग खोलने पर उस पर विमल प्रीमियम फैब्रिक क्वालिटी का रैपर लगा मिला जबकि सेल्वेज पर विमल विनकोम प्राइवेट लिमिटेड लिखा था। कपड़े को थोड़ा सा खींचने पर स्लीपेज आ जाते हैं। 
जानकारों का कहना है कि भीलवाड़ा में नकली सेल्वेज के चलते अच्छा कपड़ा बनाते हैं उनकी साख को भी बट्टा लग रहा है। इससे अपने मार्का का कपड़ा बनाने वाले व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
विमल के नाम पर धोखा खाने वाले व्यापारियों और ग्राहकों को प्रतिदिन लाखों रुपए की चपत लग रही है। सूत्रों की मानें तो इस तरह का कपड़ा ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों और फेरी वालों द्वारा विमल का बताकर बेच रहे हैं जबकि कुछ शहरों में तो इसे शोरूमों तक में बेचे जाने की चर्चा है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई...
विमल, दिग्जाम, सियाराम के साथ ही रेड एंड टेलर व अन्य मार्का के नकली या मिलते-जुलते सेल्वेज भीलवाड़ा में बनाए जाते रहे हैं और पहले भी नकली सेल्वेज के छापे पड़ चुके हैं और बड़ी मात्रा में ख्यातनाम कंपनियों का कपड़ा पुलिस ने जब्त किया हुआ है। इसके बावजूद यहां नकली कपड़ा बनाने की रोकथाम नहीं हो पाई है।     

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