गांवो में गरमाहट

  2019-12-30 10:29 am


इन दिनों सर्दी हाड़ कंपा रही है लेकिन सरपंची चुनावों की घोषणा ने गांवो में गरमाहट पैदा कर रखी है। 

सरपंच बनने का ख्वाब उसी तरह का है जैसे किसी भुक्खड के लिए भोजन का निमन्त्रण.. वो ना ना प्रकार की मिठाइयों की कल्पना करता है , इधर सरपंची ख्वाब देखने वाला.. ना ना प्रकार के बजट की... सो खिलाड़ी लोग गये है, जीत के लिए अपने शरीर पर तेल चुपड़ने... जीत गये तो बचा हुआ तेल सरकार और जनता को लगायेंगे .. 

सरपंच गांव के विकास की सोचता है और शुरूआत अपने घर के विकास से ही करता है  और अंत तक इसी घर का विकास करता रहता है... इस चक्कर हजारों गांव विकास नामक चमत्कार से वंचित रह जाते है.. 

वैसे सरकारें भी यही चाहती है.. गांव हमेशा गांव रहे, अविकसित और उजड़े , ताकि उस हेतु बजट बनाया जा सके। भाषण दिये जा सके।

बहरहाल लट्ठ वाले, बलिष्ठ लोग, अपने अपने आकाऔ के पांव छूकर मैदान में कूदने वाले है.. सरपंच ही मिलकर प्रधान और जिला प्रमुख बनायेंगे, सो ये संरपची पद आकाऔ के लिए भी मोस्टवेल्यूबल है.. 

सुत्र बताते है कि सरपंची कुर्सी पाने के लिए 20-25 लाख तो सामान्य बात है, ज्यादा भी हो सकते है.. लेकिन दुल्हा घोड़े पर बैठा बैठा, सौ सौ के नोट इसलिए उपर करता है... कि उसे करोड़ो की दुल्हन मिलने वाली है... वरना मजाल कि ये दुल्हा दूसरे दिन, पांच रूपया भी किसी को दे दे। ... 

बहरहाल ये सब बातें सब लोग जानते है.. लेकिन चुनावों में अच्छे बुरे का तराजू ताक में रख दिया जाता है... 

सरपंच वो बेहतर, जो विनम्र हो, गांव से और गांववालो से  जुड़ा हो, गांव के लिए कोई योजना रखता हो, शिक्षित हो तो और बेहतर, सबके साथ चर्चा करे..सबके विचार सुने ..और अपनी बात रखे... 

धनबल, लट्ठबल, और राजनीति के उस्ताद उम्मीदवारों से बचकर रहे , ये मौकापरस्त लोग होते है जो बरसाती मेंढको की तरह चुनावों मे ही टर्राते है.. फिर कौन आप और कौन गांव .. इनको कोई मतलब नहीं ।

चलिये ..गांव में चाय की गुमटियों पर गुलाबी गर्माहट छाने वाली है... जहां की बहस का लाईव प्रसारण किया जाये तो.. न्यूजचैनल वाले एंकर भी हाथ जौड लेंगे ।। सरपंच का चुनाव गांव में लिए सबसे रोमांचक चुनाव माना जाता है।

(KgKadam)

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