चुनाव आचार संहिता कि पालना में मुस्तेद रहेगा प्रत्येक सरकारी कर्मचारी

Thu 14 Mar 19  5:13 pm

राजसमंद (राव दिलीप सिंह)चुनाव आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता/आचार संहिता) का मतलब है चुनाव आयोग के वे निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है, उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, उम्मीदवार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है। 

राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं। वे आयोग के मातहत रहकर उसके दिशा-निर्देश पर काम करेंते हैं। 

इसलिए आदर्श आचार संहिता के लागू होते ही देश के अन्य प्रदेशों के साथ ही  राजस्थान में सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग गए हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन गए हैं। वे आयोग के मातहत रहकर उसके दिशा-निर्देश पर काम करेंगे। चुनाव आयोग के दिशा निर्देश के अनुसार राजसमंद जिला निर्वाचन अधिकारी अरविंद कुमार पोसवाल द्वारा भी सभी तैयारियां पुर्ण कि जा रही है व सभी नियम लागू किये है ।

प्रदेश में जहां मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकेंगे, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है। आचार संहिता के लागू होने पर क्या हो सकता है और क्या नहीं, इसके ‍विभिन्न पहलुओं की सामान्य जानकारी संक्षिप्त में उपलब्ध कराई जा रही है। 

आचार संहिता के महत्वपूर्ण नियम:--

* कोई भी दल ऐसा काम न करे, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले। 

* राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित हो, न ही व्यक्तिगत। 

* धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। 

* मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें। जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि। 

* किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें। 

* किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें। 

* राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएं आहत होती हों। 

राजनीतिक सभाओं से जुड़े नियम : 

* सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए। 

* दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉं निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है। 

* सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें। 

* सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें। 

जुलूस संबंधी नियम :--

* जुलूस का समय, शुरू होने का स्थान, मार्ग और समाप्ति का समय तय कर सूचना पुलिस को दें। 

* जुलूस का इंतजाम ऐसा हो, जिससे यातायात प्रभावित न हो। 

* राजनीतिक दलों का एक ही दिन, एक ही रास्ते से जुलूस निकालने का प्रस्ताव हो तो समय को लेकर पहले बात कर लें। 

* जुलूस सड़क के दायीं ओर से निकाला जाए। 

* जुलूस में ऐसी चीजों का प्रयोग न करें, जिनका दुरुपयोग उत्तेजना के क्षणों में हो सके। 

मतदान के दिन संबंधी नियम :--

* अधिकृत कार्यकर्ताओं को बिल्ले या पहचान पत्र दें। 

* मतदाताओं को दी जाने वाली पर्ची सादे कागज पर हो और उसमें प्रतीक चिह्न, अभ्यर्थी या दल का नाम न हो। 

* मतदान के दिन और इसके 24 घंटे पहले किसी को शराब वितरित न की जाए। 

* मतदान केन्द्र के पास लगाए जाने वाले कैम्पों में भीड़ न लगाएं। 

* कैम्प साधारण होने चाहिए। 

* मतदान के दिन वाहन चलाने पर उसका परमिट प्राप्त करें।