जीवन में संतुलन बनाए रखें: महासती शशिकांता

Tue 05 Nov 19  3:51 pm


चित्तौडग़ढ़ (हलचल)। शांत क्रांति संघ की महासती शशिकांता मसा ने मंगलवार को अरिहंत भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते कहा कि जिसको अनुकूल एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में संतुलन बनाने की कला आ गई वह जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति कर लेगा। संतुलन बनाने में क्या सहायक है और संतुलन कैसे बिगड़ता है, इस पर उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति में कार्य करने की क्षमता और कार्यप्रणाली को व्यवस्थित रखना आ जाता है वह संतुलन बनाए रख सकता है। इसी प्रकार कौनसे समय पर कौनसा काम करना उचित रहेगा, इसका ज्ञान हो जाता है तो भी संतुलन बनाए रख सकता है। सोने के समय जागना और जागने के समय सोना संतुलन कायम नहीं रख सकता। समन्वय और सही सोच भी संतुलन बनाये रखने में सहायक होती है। कष्ट आने पर समभाव रखने पर ही संतुलन बना रह पाता है। 
जीवन में मोह और ममत्व आ जाने, एक दूसरे के प्रति आसक्ति एवं द्वेष रखने और बात-बात पर गुस्सा करने तथा मनमुटाव के कारण भी संतुलन डगमगा जाता है। उन्होंने कहा कि मन, वचन एवं काया तीनों में संतुलन आवश्यक है। जीवन में संतुलन बनाए रखने की कला से कार्यक्षमता में वृद्धि हो जाती है और व्यक्ति कार्य करते समय थकता नहीं है। संतुलन बनाए रखने में विफल व्यक्ति हर क्षेत्र में पिछड़ जाता है और उसका आत्मविश्वास भी कम हो जाता है। इसलिए जीवन पथ पर किसी भी क्षेत्र में काम करो, संतुलन बनाए रखो, कष्ट एवं समस्याएं स्वत: हल होती चली जाएंगी।

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