ज्ञान दोहराने से सुरक्षित रहेगा -महासति शशिकान्ता

Wed 14 Aug 19  3:47 pm


 
चित्तौड़गढ़,  हलचल।षान्त-क्रान्ति संघ की विदुशी महासति शशिकान्ता म.सा. ने बुधवार को अरिहन्त भवन में आयोजित धर्मसभा में कहा कि ज्ञान का पलेवण अर्थात् आवर्त्तन करने से ज्ञान ताजा एवं निर्मल रहता है। निरन्तर अभ्यास नहीं करने और नहीं दोहराने से ज्ञान भूल जाते हैं, इसलिये उत्तराध्ययन सूत्र के 29वें अध्याय में भगवान महावीर स्वामी ने ज्ञान का रिवीजन करने और दोहराने पर बल दिया है। हमने जो भी ज्ञान अर्जित किया है उसको सुरक्षित रखना भी आवश्यक है। ज्ञान सुरक्षित तभी रह पायेगा जब उसका निरन्तर अभ्यास करेंगे और दोहराते रहेंगे। ज्ञान सुरक्षित रहेगा तभी हम सम्यक् मार्ग पर अग्रसर हो पाएगें।
आपने कहा कि ज्ञान अर्थात् विद्या से विनय एवं विनय से पात्रता अर्थात् योग्यता आती है। योग्यता से ही सुख एवं समृद्धि होती है। इसलिये ज्ञान होना आवश्यक है। समयक् ज्ञान के अभाव में व्यक्ति मिथ्यात्व में भटक जाता है और जीवन बर्बाद कर देता है। हम कामना भी यही करते हैं कि अभयकुमार जैसी बुद्धि अर्थात् ज्ञान प्राप्त हो। 
महासति रचनाश्री  म.सा. ने कहा कि जिस व्यक्ति की इन्द्रिय वश में है, उसको देवता भी नमस्कार करते हैं। परिग्रह मत करो और पदार्थों के प्रति आसक्ति को तजोगे तभी सुखी रह पाओगे। महासतिवर्या ने जन्माष्टमी पर 22 से 24 अगस्त तक सामूहिक तेले तप की प्रेरणा दी। उपवास, आयम्बिल एकासन एवं तेले की लड़ी बराबर चल रही है। कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र कुमार खेरोदिया ने किया।

 

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