ज्ञान व ज्ञानी का अनादर मत करो: शशिकांता

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चित्तौडग़ढ़ (हलचल)। शांत-क्रांति संघ की महासती शशिकांता मसा ने ज्ञान पंचमी के अवसर पर अरिहंत भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान एवं ज्ञानी का कभी अनादर मत करो। सम्यक ज्ञान प्राप्त कर उसे क्रिया में परिणित करने से ही सम्यक मार्ग पर बढ़ा जा सकता है। सम्यक् ज्ञान के अभाव में व्यक्ति मिथ्यात्व में भटक कर कुमार्ग में ठोकरें खाकर जीवन बर्बाद कर देता है। सम्यक ज्ञान के अभाव में क्रिया भी दूषित हो जाती है।
पांच प्रकार के ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञानावर्णीय कर्म का किस प्रकार बन्ध होता है और किस प्रकार निर्जरा, इसका ज्ञान होना भी जरूरी है। ज्ञान एवं ज्ञानी का अनादर करने एवं द्वेष भाव रखने से अगले भव में गूंगा एवं बहरा होना पड़ता है। महासती रचनाश्री ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। प्रदीप म_ा ने भाव प्रकट किए। संचालन मंत्री विमलकुमार कोठारी ने किया।

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