पानीपत। विश्व विख्यात टेक्सटाइल नगरी पानीपत मौसम के बदले मिजाज से डाई कारोबार लगभग बंद है। डाई उद्यमियों को मौसम के खुलने का इंतजार है। दिन में सही तरीके से धूप नहीं निकलने और तापमान कम होने के कारण डाई किया गया धागा और कपड़ा सूख नहीं रहा है, यदि सूख भी रहा है तो उसमें धूप से आने वाली चमक नहीं आ पा रही है। इसके चलते डाई किए गए धागे और कपड़े की रंगाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। डाई उद्यमियों का कहना है कि बसंत त्यौहार के बाद डाई उद्योग ढर्रे पर आ पाएगा। वहीं पानीपत डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भीम सिंह राणा ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पानीपत के डाई उद्योमियों को सब्सिडी पर बडे ड्रायर दिलवाने की अपील की है।

टेक्सटाइल उद्योग की मां है डाई उद्योग

टेक्सटाइल उद्योग में प्रयोग होने वाले धागे और कपड़े की सबसे पहले रंगाई की जाती है । इसके बाद ही टेक्सटाइल उद्योग कपड़े और धागे का प्रयोग करता है । इसके चलते डाई उद्योग को टेक्सटाइल उद्योग की मां कहा जाता है । वहीं पानीपत में 1000 से अधिक बड़े और छोटे डाई हाउस है। इनमें प्रतिदिन हजारों टन धागा व कपड़ा रंगाई किया जाता है। वही रंगाई के बाद धागे और कपड़े को धूप में सुखाया जाता है धूप में सूखने से ही धागे और कपड़े के अंदर चढ़ाए गए यानि डाई किए गए रंग में चमक आती है। वही गत वर्ष दिसंबर में और अभी तक जनवरी माह में मौसम में बदलाव यानि तापमान कम होने के कारण धूप पूरी तरह से नहीं खिलती है, इस कारण डाई किया गया धागा और कपड़ा ठीक से सूख नहीं पाता और ना ही इन में चमक आती है।

दिसंबर जनवरी-फरवरी में डाई हाउसों में बहुत कम काम चलता है

पानीपत डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भीम राणा ने बताया कि टेक्सटाइल उद्यमियों का अर्जेंट आर्डर को ड्रायर में सूखाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि डर के प्रयोग से कपड़े और धागे की डाई की लागत बढ़ जाती है। वहीं ढाई उद्योग में भीषण कंपटीशन के चलते सुखाई की मजदूरी टेक्सटाइल उद्यमी से नहीं वसूली जा सकती। यदि वसूल ली तो टेक्सटाइल उद्योमी फिर काम नहीं देगा। उन्होंने बताया कि दिसंबर जनवरी-फरवरी में डाई हाउसों में थोड़ा बहुत ही काम चलता है ।अप्रैल माह की शुरुआत में डाई हाउसों में काम ढर्रे पर आएगा। उन्होंने कहा कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में काम नहीं मिलने के कारण जो फटका डाई उद्यमियों को लगता है, उसकी भरपाई अप्रैल से लेकर नवंबर माह तक कर ली जाती है।

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पानीपत। विश्व विख्यात टेक्सटाइल नगरी पानीपत मौसम के बदले मिजाज से डाई कारोबार लगभग बंद है। डाई उद्यमियों को मौसम के खुलने का इंतजार है। दिन में सही तरीके से धूप नहीं निकलने और तापमान कम होने के कारण डाई किया गया धागा और कपड़ा सूख नहीं रहा है, यदि सूख भी रहा है तो उसमें धूप से आने वाली चमक नहीं आ पा रही है। इसके चलते डाई किए गए धागे और कपड़े की रंगाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। डाई उद्यमियों का कहना है कि बसंत त्यौहार के बाद डाई उद्योग ढर्रे पर आ पाएगा। वहीं पानीपत डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भीम सिंह राणा ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पानीपत के डाई उद्योमियों को सब्सिडी पर बडे ड्रायर दिलवाने की अपील की है।

टेक्सटाइल उद्योग की मां है डाई उद्योग

टेक्सटाइल उद्योग में प्रयोग होने वाले धागे और कपड़े की सबसे पहले रंगाई की जाती है । इसके बाद ही टेक्सटाइल उद्योग कपड़े और धागे का प्रयोग करता है । इसके चलते डाई उद्योग को टेक्सटाइल उद्योग की मां कहा जाता है । वहीं पानीपत में 1000 से अधिक बड़े और छोटे डाई हाउस है। इनमें प्रतिदिन हजारों टन धागा व कपड़ा रंगाई किया जाता है। वही रंगाई के बाद धागे और कपड़े को धूप में सुखाया जाता है धूप में सूखने से ही धागे और कपड़े के अंदर चढ़ाए गए यानि डाई किए गए रंग में चमक आती है। वही गत वर्ष दिसंबर में और अभी तक जनवरी माह में मौसम में बदलाव यानि तापमान कम होने के कारण धूप पूरी तरह से नहीं खिलती है, इस कारण डाई किया गया धागा और कपड़ा ठीक से सूख नहीं पाता और ना ही इन में चमक आती है।

दिसंबर जनवरी-फरवरी में डाई हाउसों में बहुत कम काम चलता है

पानीपत डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भीम राणा ने बताया कि टेक्सटाइल उद्यमियों का अर्जेंट आर्डर को ड्रायर में सूखाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि डर के प्रयोग से कपड़े और धागे की डाई की लागत बढ़ जाती है। वहीं ढाई उद्योग में भीषण कंपटीशन के चलते सुखाई की मजदूरी टेक्सटाइल उद्यमी से नहीं वसूली जा सकती। यदि वसूल ली तो टेक्सटाइल उद्योमी फिर काम नहीं देगा। उन्होंने बताया कि दिसंबर जनवरी-फरवरी में डाई हाउसों में थोड़ा बहुत ही काम चलता है ।अप्रैल माह की शुरुआत में डाई हाउसों में काम ढर्रे पर आएगा। उन्होंने कहा कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में काम नहीं मिलने के कारण जो फटका डाई उद्यमियों को लगता है, उसकी भरपाई अप्रैल से लेकर नवंबर माह तक कर ली जाती है।

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टेक्सटाइल उद्योग की मां, ठंड की चपेट में, आखिर क्या है सच्चाई, जानिए खबर में…

टेक्सटाइल उद्योग की मां, ठंड की चपेट में, आखिर क्या है सच्चाई, जानिए खबर में…

  2020-01-04 06:46 pm


 

पानीपत। विश्व विख्यात टेक्सटाइल नगरी पानीपत मौसम के बदले मिजाज से डाई कारोबार लगभग बंद है। डाई उद्यमियों को मौसम के खुलने का इंतजार है। दिन में सही तरीके से धूप नहीं निकलने और तापमान कम होने के कारण डाई किया गया धागा और कपड़ा सूख नहीं रहा है, यदि सूख भी रहा है तो उसमें धूप से आने वाली चमक नहीं आ पा रही है। इसके चलते डाई किए गए धागे और कपड़े की रंगाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। डाई उद्यमियों का कहना है कि बसंत त्यौहार के बाद डाई उद्योग ढर्रे पर आ पाएगा। वहीं पानीपत डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भीम सिंह राणा ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पानीपत के डाई उद्योमियों को सब्सिडी पर बडे ड्रायर दिलवाने की अपील की है।

टेक्सटाइल उद्योग की मां है डाई उद्योग

टेक्सटाइल उद्योग में प्रयोग होने वाले धागे और कपड़े की सबसे पहले रंगाई की जाती है । इसके बाद ही टेक्सटाइल उद्योग कपड़े और धागे का प्रयोग करता है । इसके चलते डाई उद्योग को टेक्सटाइल उद्योग की मां कहा जाता है । वहीं पानीपत में 1000 से अधिक बड़े और छोटे डाई हाउस है। इनमें प्रतिदिन हजारों टन धागा व कपड़ा रंगाई किया जाता है। वही रंगाई के बाद धागे और कपड़े को धूप में सुखाया जाता है धूप में सूखने से ही धागे और कपड़े के अंदर चढ़ाए गए यानि डाई किए गए रंग में चमक आती है। वही गत वर्ष दिसंबर में और अभी तक जनवरी माह में मौसम में बदलाव यानि तापमान कम होने के कारण धूप पूरी तरह से नहीं खिलती है, इस कारण डाई किया गया धागा और कपड़ा ठीक से सूख नहीं पाता और ना ही इन में चमक आती है।

दिसंबर जनवरी-फरवरी में डाई हाउसों में बहुत कम काम चलता है

पानीपत डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भीम राणा ने बताया कि टेक्सटाइल उद्यमियों का अर्जेंट आर्डर को ड्रायर में सूखाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि डर के प्रयोग से कपड़े और धागे की डाई की लागत बढ़ जाती है। वहीं ढाई उद्योग में भीषण कंपटीशन के चलते सुखाई की मजदूरी टेक्सटाइल उद्यमी से नहीं वसूली जा सकती। यदि वसूल ली तो टेक्सटाइल उद्योमी फिर काम नहीं देगा। उन्होंने बताया कि दिसंबर जनवरी-फरवरी में डाई हाउसों में थोड़ा बहुत ही काम चलता है ।अप्रैल माह की शुरुआत में डाई हाउसों में काम ढर्रे पर आएगा। उन्होंने कहा कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में काम नहीं मिलने के कारण जो फटका डाई उद्यमियों को लगता है, उसकी भरपाई अप्रैल से लेकर नवंबर माह तक कर ली जाती है।

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