डिजिटल लेन-देन के लिए NEFT- RTGS चार्ज खत्म

Thu 06 Jun 19  2:40 pm


मुंबई : आर्थिक वृद्धि दर में नरमी के बीच रिजर्व बैंक ने आज अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती की और साथ ही आगे के लिए नीतिगत रुख को ‘तटस्थ' से ‘नरम' कर दिया. इस साल यह लगातार तीसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए सस्ता धन सुलभ कराने के लिए अपनी नीतिगत दर में कटौती की गयी है. इसके साथ ही बैंक ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए आरटीजीएस और एनईएफटी पर शुल्क समाप्त करने की घोषणा कर दी. एटीएम शुल्क, बैंकों द्वारा लिये जाने वाले शुल्क की समीक्षा के लिए समिति का गठन भी किया गया है. इन तीनों मौकों को मिला कर रेपो रेट में कुल 0.75 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है.

रेपो रेट वह रेट है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनकी तत्काल की जरूरत के लिए एक दिन के लिए धन उधार देता है. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के पूर्व के 7.2 प्रतिशत के अनुमान को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. वृद्धि दर के अनुमान में कमी का कारण कमजोर वैश्विक परिदृश्य तथा निजी खपत में कमी है. रेपो रेट में इस कटौती के साथ यह 5.7 प्रतिशत पर आ गयी है. रेपो रेट वह रेट है जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को कर्ज देता है.

प्रमुख बातें 

-रेपो दर में लगातार तीसरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती

 -रेपो दर अब 5.75 प्रतिशत

- रिवर्स रेपो 5.50 प्रतिशत

- वर्ष 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि का पूर्वानुमान 7.20 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत किया गया

-खुदरा मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान बढ़ाकर अप्रैल-सितंबर के लिए 3.0-3.1 प्रतिशत और अक्टूबर-मार्च के लिए 3.40-3.70 प्रतिशत 

- निकट भविष्य में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने का अनुमान। : मानसून की अनिश्चितता, सब्जियों की कीमतों में बेमौसम तेजी, कच्चा तेल की बढ़ती कीमतें, वित्तीय बाजार का उथल-पुथल और राजकोषीय परिदृश्य के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम

- डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए आरटीजीएस और एनईएफटी पर शुल्क समाप्त-

 - एटीएम शुल्क, बैंकों द्वारा लिये जाने वाले शुल्क की समीक्षा के लिए समिति का गठन

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