नई दिल्ली। नोटबंदी के तीन साल बाद इसके प्रभाव पर एक सर्वे किया गया, जिसमें 32 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके कारण असंगठित क्षेत्र के तमाम श्रमिकों की आमदनी खत्म हुई है, दो प्रतिशत ने कहा कि इसके कारण बड़ी मात्रा में मजदूर गांव चले गए और इससे ग्रामीण आमदनी में 33 प्रतिशत कमी हुई, जबकि 33 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव आर्थिक सुस्ती है। आज ही के दिन यानी 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी की थी। लोकलसर्कल नामक एक सोशल मीडिया कंपनी द्वारा किए गए सर्वे की रपट शुक्रवार को जारी की गई।

देशभर में यह सर्वेक्षण यह जानने के लिए किया गया कि उपभोक्ता कितना लेन-देन कर रहे हैं और क्या उन्हें लगता है कि नोटबंदी ने देश में कोई सकारात्मक बदलाया लाया। सर्वे में कहा गया है कि जब नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव के बारे में पूछा गया तो 32 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि इसके कारण असंगठित क्षेत्र में तमाम लोगों की आमदनी खत्म हुई और दो प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके कारण मजदूर गांवों को लौट गए और ग्रामीण आमदनी घट गई। जबकि 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव आर्थिक सुस्ती है। लेकिन 28 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि इसका कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ है।

" /> नई दिल्ली। नोटबंदी के तीन साल बाद इसके प्रभाव पर एक सर्वे किया गया, जिसमें 32 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके कारण असंगठित क्षेत्र के तमाम श्रमिकों की आमदनी खत्म हुई है, दो प्रतिशत ने कहा कि इसके कारण बड़ी मात्रा में मजदूर गांव चले गए और इससे ग्रामीण आमदनी में 33 प्रतिशत कमी हुई, जबकि 33 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव आर्थिक सुस्ती है। आज ही के दिन यानी 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी की थी। लोकलसर्कल नामक एक सोशल मीडिया कंपनी द्वारा किए गए सर्वे की रपट शुक्रवार को जारी की गई।

देशभर में यह सर्वेक्षण यह जानने के लिए किया गया कि उपभोक्ता कितना लेन-देन कर रहे हैं और क्या उन्हें लगता है कि नोटबंदी ने देश में कोई सकारात्मक बदलाया लाया। सर्वे में कहा गया है कि जब नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव के बारे में पूछा गया तो 32 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि इसके कारण असंगठित क्षेत्र में तमाम लोगों की आमदनी खत्म हुई और दो प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके कारण मजदूर गांवों को लौट गए और ग्रामीण आमदनी घट गई। जबकि 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव आर्थिक सुस्ती है। लेकिन 28 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि इसका कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ है।

">

नोटबंदी के तीन साल पूरे : सर्वे में आई नेगेटिव रिपोर्ट, माना आर्थिक सुस्ती की बड़ी वजह

  -0001-11-30 12:00 am


नई दिल्ली। नोटबंदी के तीन साल बाद इसके प्रभाव पर एक सर्वे किया गया, जिसमें 32 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके कारण असंगठित क्षेत्र के तमाम श्रमिकों की आमदनी खत्म हुई है, दो प्रतिशत ने कहा कि इसके कारण बड़ी मात्रा में मजदूर गांव चले गए और इससे ग्रामीण आमदनी में 33 प्रतिशत कमी हुई, जबकि 33 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव आर्थिक सुस्ती है। आज ही के दिन यानी 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी की थी। लोकलसर्कल नामक एक सोशल मीडिया कंपनी द्वारा किए गए सर्वे की रपट शुक्रवार को जारी की गई।

देशभर में यह सर्वेक्षण यह जानने के लिए किया गया कि उपभोक्ता कितना लेन-देन कर रहे हैं और क्या उन्हें लगता है कि नोटबंदी ने देश में कोई सकारात्मक बदलाया लाया। सर्वे में कहा गया है कि जब नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव के बारे में पूछा गया तो 32 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि इसके कारण असंगठित क्षेत्र में तमाम लोगों की आमदनी खत्म हुई और दो प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके कारण मजदूर गांवों को लौट गए और ग्रामीण आमदनी घट गई। जबकि 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव आर्थिक सुस्ती है। लेकिन 28 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि इसका कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ है।

news news news news news news news news