नौनिहाल पायल को मिली नई जिन्दगी

नौनिहाल पायल को मिली नई जिन्दगी

Mon 10 Jun 19  9:22 pm


राजसमंद(राव दिलीप सिहं )सामाजिक सरोकारों के निर्वहन में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की बदौलत लोक कल्याण के लक्ष्य निरन्तर आकार लेते जा रहे हैं। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के बेहतर और सफल क्रियान्वयन का ही परिणाम है कि लोक सेवाओं से जुड़े सभी क्षेत्रों में आम जन को अभावों और समस्याओं से मुक्ति का अहसास हो रहा है तथा राहत का सुकून पसरने लगा है।

सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सरोकारों के जुड़ी गतिविधियों ने समाज-जीवन में अच्छी साख कायम की है और इसकी वजह से गरीब परिवारों के लोगों को खासा लाभ प्राप्त हो रहा है। इन योजनाओं की वजह से अभावों और गरीबी से दो-चार हो रहे परिवारों के जीवन में खुशियों का संचार हो रहा है।

सरकार की सामाजिक सुरक्षा एवं सेवा से जुड़ा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के.) लोक कल्याण का ऎसा ही एक अनुष्ठान है जो बीमारियों से प्रभावित बच्चों की जिन्दगी में उजियारा भर रहा है। इससे आज बच्चे घातक बीमारियों से मुक्ति पाकर नई जिन्दगी का सुकून पा रहे हैं।

इस कार्यक्रम की वजह से राजसमन्द ब्लॉक अन्तर्गत सांगठ ग्राम पंचायत में बीड़ो की भागल गांव निवासी शंकर का परिवार खुशियों के मारे फूला नहीं समा रहा है जिसकी नन्हीं बिटिया को नया जीवन प्राप्त हुआ है। जन्म से ही उसकी बेटी पायल बीमार रहने लगी। पैदा होने के बाद से ही वह बहुत रोती रहने लगी, दूध पिलाना भी मुश्किल हो गया था।

स्थानीय डॉक्टर को दिखाया तब जाँच कराने पर पता चला कि उसके दिल मेंं जन्म से ही छेद की बीमारी है। पायल के परिवार की चिन्ताएं यह सुन कर और अधिक बढ़ गई कि इसका ईलाज ऑपरेशन से ही संभव है।  पैसों के अभाव मेंं पायल का ईलाज कराना शंकर के परिवार के बस में नहीं था। उसे बिटिया की सेहत की चिन्ता सताये जा रही थी।

शंकर ने इसके लिए गुजरात के अस्पतालों से भी सम्पर्क किया लेकिन सब जगह उसे यही बताया गया कि इसके लिए लाख से भी अधिक रुपये लगेंगे। निराश-हताश शंकर की चिन्ताएं और अधिक बढ़ गई क्योंकि इतने रुपयों का इंतजाम करना उस गरीब के लिए संभव ही नहीं था।

बिटिया की इस बीमारी ने पूरे परिवार के लिए संकट की स्थिति ला दी। पायल के पिता शंकर के अनुसार वह राजकोट (गुजरात) की होटल में मेहनत-मजदूरी करता है जहां से उसे 6-7 हजार रुपए मासिक पगार मिलती है। इससे घर चलाना भी बमुश्किल ही हो पाता है। ऎसे में ऑपरेशन का इतना बड़ा खर्च उठाना उसके लिए असंभव ही था। मासूम पायल के बार-बार बीमार पड़ जाने के कारण उसे कई दिनों और महीनों तक छुट्टियों पर रहना पड़ता था, इससे मासिक पगार में भी कटौती की समस्या उसके सामने थी। उसके पास पैसों का जुगाड़ करने के नाम पर बेचने के लिए न कोई खेत हैं, न जमीन-जायदाद। इन हालातों में उसके सामने सबसे बड़ा संकट यही था कि आखिर अपनी लाड़ली का ईलाज कैसे कराए, कैसे उसे बीमारी से छुटकारा दिलवाए।

इस बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के) के अन्तर्गत राजसमन्द जिले में संचालित मोबाइल हैल्थ टीम बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के अपने रूटीन कार्यक्रम के तहत बीड़ो का भागल गाँव पहुँची। वहां आंगनवाड़ी केन्द्र में बच्चों के स्वास्थ्य की जाँच के दौरान मात्र चार वर्ष से अधिक आयु की पायल स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान कमजोर तथा बीमार महसूस हुई। उसकी दिल की धड़कन भी सामान्य बच्चों की तरह नहीं होकर असामान्य पायी गई।

इस स्थिति को देख चिकित्सा जाँच दल ने उसके घरवालों को केन्द्र पर बुलवाया तथा सारी औपचारिकताएँ पूर्ण कर उदयपुर स्थित गीतांजलि प्राईवेट अस्पताल में रेफर किया गया जहाँ हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. डैनी के. मंगलानी द्वारा उसकी सफलतापूर्वक हार्ट सर्जरी की गई। ईलाज के लिए शंकर को एक पैसा भी कहीं देना नहीं पड़ा। ईलाज पर आया करीब डेढ़ लाख का खर्च सरकार द्वारा ही वहन किया गया।  पायल को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और वह पूरी तरह स्वस्थ है।

आरबीएसके के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुरेश मीणा बताते हैं कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की बदौलत पायल को मिली नई जिन्दगी से पूरा परिवार खुश है। पायल के पिता शंकर परमार अपनी लाडली की जिन्दगी बचाने के लिए सरकार को लाख-लाख धन्यवाद देते हुए कहते हैं कि गरीबी की वजह से वह लाचार था और काफी हताश हो गया था लेकिन भला हो सरकार के इस कार्यक्रम का, जिसने उसकी बेटी को जीवनदान देकर पूरे परिवार को निहाल कर दिया है।

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