पंच तारा होटलो में नही इस बार वेस्टर्न कोर्ट में ठहरेंगे माननीय

पंच तारा होटलो में नही इस बार वेस्टर्न कोर्ट में ठहरेंगे माननीय

Mon 20 May 19  8:23 am


नई दिल्ली। लोकसभा में चुनकर आने वाले नए सांसदों को इस बार पांच सितारा होटलों में नहीं ठहराया जाएगा। उनके लिए सरकारी अस्थायी आवास, वेस्टर्न कोर्ट (सांसद हॉस्टल) व दिल्ली स्थित राज्यों के अतिथि गृहों में व्यवस्था की जा रही है। इससे होटलों पर होने वाले भारी भरकम खर्च और सांसदों को होने वाली असुविधा से बचा जा सकेगा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने नए सांसदों के आवास व अन्य सुविधाओं के लिए लोकसभा सचिवालय को इस महीने की शुरुआत में निर्देश दे दिए थे। सूत्रों के अनुसार, सचिवालय के निर्देश पर वेस्टर्न कोर्ट में सौ कमरे तैयार किए जा रहे हैं। यह एक तरह से सांसदों का हॉस्टल है, जिसमें एक शयनकक्ष है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के अतिथि गृहों में 280 कक्ष आरक्षित करने के लिए कहा गया है। यहां 200 सांसदों के रुकने की व्यवस्था होगी। जिन राज्यों से ज्यादा सांसद चुन कर आएंगे, उन्हें दूसरे राज्यों के अतिथि गृहों में ठहराया जाएगा। स्वागत काउंटर बनेंगे : नए सांसदों के दिल्ली पहुंचने पर उनके स्वागत के लिए रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डे पर स्वागत काउंटर लगाए जा रहे हैं, जो चौबीसों घंटे काम करेंगे। यहां से सांसद को उनके अतिथि गृह तक पहुंचाया जाएगा और उनको एक सहायक भी दिया जाएगा। संसद भवन में भी नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। 250 नए सांसद आने की उम्मीद: लोकसभा सचिवालय को अनुमान है कि इस बार दो सौ से ढाई सौ नए सांसद चुनकर आ सकते हैं। जो पुराने सांसद दोबारा चुनकर आएंगे या जो राज्यसभा सदस्य हैं, उनके आवास पहले से हैं। सिर्फ नए सांसदों के लिए व्यवस्था करनी होगी। जो मौजूदा सांसद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, उनको जल्द आवास खाली करने को कहा जा रहा है। जो सांसद चुनकर नहीं आएंगे, उन्हें महीने भर में आवास खाली करना होगा। इसे ठीक करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। आवास देते समय वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगी ताकि सांसद किसी कमी की शिकायत न कर सकें। पिछली बार करोड़ों खर्च हुए पिछली बार पांच सितारा होटलों में ठहरे सांसदों के कमरे का एक दिन का किराया सात से आठ हजार रुपये था। कुछ सांसदों को तो छह माह तक होटलों में रुकना पड़ा था। सूत्रों के अनुसार तब पहले सत्र में 180 कमरे बुक किए गए और शुरुआती चार दिनों में सवा करोड़ रुपये किराया दिया गया था। खाना बाहर से मंगवाते थे अधिकांश सांसदों को पांच सितारा होटलों में रुकना महंगा सौदा पड़ता है। लोकसभा उनको केवल कमरे का किराया देती है। भोजन की व्यवस्था सांसद को खुद करनी पड़ती है। ऐसे में सांसदों को बाहर जाकर खाना खाना पड़ता था या बाहर से मंगाना पड़ता था।
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