पेट दर्द को हल्के में न लें महिलाएं, जानिए क्या संकेत देता है यह

पेट दर्द को हल्के में न लें महिलाएं, जानिए क्या संकेत देता है यह

Sun 20 Oct 19  4:40 pm


यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन साइंसेस के अनुसार, महिलाएं खुद के शरीर की हालत और अपने स्वास्थ्य को ज्यादा बेहतर ढंग से समझती हैं। कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जिसके लिए आपको यह समझना जरूरी है कि कब डॉक्टरी सलाह की जरूरत है। पेट में दर्द और असजहजता पेटदर्द के लक्षण में कई कारण छिपे होते हैं।

पेट दर्द का प्रकार और उसकी गंभीरता से ही उसके सही उपचार तक पहुंचने में मदद मिलती है।पेल्विस और पेट का अल्ट्रासाउंड भी गॉल स्टोन्स, किडनी स्टोन्स, लिवर डिस्ऑर्डर या पेट में गठानों का पता लगाने में सहायता करते हैं। अत्यधिक दर्द का संबंध एक्टोपिक गेस्टैशन (यूटेरस के बाहर प्रेग्नेंसी), रैप्चर ओवरियन सिस्ट, एक्यूट पेल्विक इंफ्लेमेशन, एक्यूट एपेन्डिसाइटिस,ओवरियन या गर्भाशय संबंधी ऐंठन और यूट्राइन फाइब्राइड्‌स के डिजनरेशन से संबंधित होता है। अगर पेल्विक में माहवारी या फिर सेक्स के दौरान दर्द होता है तो एंडोमेट्रियोसिस की आशंका होती है जिसे टेस्ट और क्लीनिकल जांचों से ठीक किया जा सकता है। पेल्विक की जांच सही निदान तक पहुंचने में सहायता करती ह

 

मिस्ड पीरियड इस बात की जांच करानी अत्यधिक आवश्यक है। रिप्रोडक्टिव उम्र में सबसे पहले गर्भावस्था आती है। इसके अलावा थॉयरॉइड के डिस्फंक्शन के कारण हार्मोन्स का असंतुलन, पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम, हाइपर प्रोलैक्टीनिमिया के कारण भी पीरियड्‌स मिस हो जाते हैं। यहां तक कि गंभीर क्षयरोग संक्रमण या गर्भाशय का अत्यधिक खुरचना भी इस समस्या का कारण बन सकता है।

पोस्ट मेनोपॉजल रक्त स्राव: मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को एक साल तकमासिक धर्म नहीं होता। अगर रक्त स्राव होता है तो गर्भाशय या सर्विकल कैंसर या पॉलिप की आशंका हो सकती है। यूरीनरी या बाउल सिंड्रोम यूरीनरी इंकांटिनेंस (पेशाब में असंयम) या आंतों में परेशानी पेल्विक फ्लोर की समस्या का लक्षण हो सकता है। यह तब होता है जब पेल्विक अंगों को सपोर्ट करने वाले टिशू नष्ट या कमजोर हो जाते हैं। अक्सर ऐसा शिशु को जन्म देने के बाद होता है। अगर मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो आपको गाइनोकोलॉजिस्ट विशेष व्यायाम की सलाह देते हैं।

 

वेजाइनल डिस्चार्ज और खुजली: गाइनोकोलॉजिस्ट के पास जाने का यह सबसे सामान्य कारण है। वेजाइनल डिस्चार्ज (योनी स्राव) रिप्रोडक्टिव ट्रैक या सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का लक्षण हो सकता है। यह पेट में दर्द या खुजलाहट के साथ हो सकता है। हालांकि अगर डिस्चार्ज (स्राव) योनी में जलन या बदबू के बगैर है तो यह सामान्य बात है। सफेद पानी का प्रवाह कैंन्डिडल वेजीनाइटिस के कारण भी हो सकता है। इसलिए ज्यादा फैलने से पहले ही उपचार की आवश्यकता होती है।

इंटरकोर्स के दौरान दर्द : जीवन के सबसे सुखदायी क्षण दर्द भरे नहीं होने चाहिए। सेक्स के दौरान दर्द, योनीमें अत्यधिक दर्द या जननांग क्षेत्र में पीड़ा इसका कारण बन सकता है। इसका सामान्य कारण योनी में सूखापन, संक्रमण या यूट्राइन फाइब्राइड्‌स आदि हैं। स्त्रीरोग विशेषज्ञ योनी के परीक्षण और टेस्ट के जरिए इसका कारण जान सकते हैं। किसी भी महिला को स्त्रीरोग विशेषज्ञ की सलाह की आवश्यकता किशोरावस्था से ही नजर आने लगती है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ युवावस्था में होने वाले परिवर्तनों, गर्भनिरोध और सुरक्षित यौन संबंध, एचपीवी वैक्सीनेशन, माहवारी के दौरान स्वच्छता आदि से लेकर रिप्रोडक्टिव एज (प्रजनन आयु) की समस्याएं, फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या, माहवारी की अनियमितता, यूरीनरी या रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्शन आदि की जानकारी दे सकती है।

पीरियड्‌स में अधिक खून बहना: कुछ महिलाओं को माहवारी से पहले और बाद में स्पॉट नजर आते हैं लेकिन यह चेतावनी के लक्षण नहीं है। गाइनोकोलॉजिस्ट से मिलने का सही समय तब होगा जब आपको माहवारी के दौरान क्लॉट्‌स के साथ अत्यधिक रक्त स्राव हो और दो से तीन घंटे में पैड्‌स बदलने की आवश्यकता पड़े। पीरियड्‌स के बीच में ब्लीडिंग होने से अच्छे संकेत नहीं होते और ये आपको सबम्युकस फाइबरॉयड के चेकअपके लिए चेतावनी देता है। इस प्रकार की परिस्थिति में पैपस्मीयर, एंडोमेट्रियल बायोप्सी और अल्ट्रासाउंड उचित निदान में सहायता कर सकते हैं और प्री मेनोपॉजल या पोस्ट मेनोपॉजल की उम्र में सरवाइकल या यूटेराइन कैंसर से बचा जा सकता है।

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