प्रत्याख्यान द्वारा पापार्जन से बचाव - मुकेशमुनि

Fri 08 Feb 19  4:01 pm

चित्तौड़गढ़ (हलचल) । शांत-क्रांति संघ के जैन संत मुकेशमुनि  म.सा. ने शुक्रवार को अरिहन्त भवन में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति में दुख को भोगने की कला आ जाती है वह दुख में भी प्रसन्न रह सकता है। यदि हमने पाप करके दुखों को आमंत्रित किया है तो फिर घबराओ मत, दुख का स्वागत करो और उसको इस प्रकार विदाई दो कि फिर दुबारा नहीं आए। अनेक योनियों में भव-भ्रमण करने के बाद हमें यह अनमोल मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। इसका भी यदि सदुपयोग नहीं किया  और पापार्जन में ही मनुष्य जीवन को बर्बाद कर दिया तो फिर दुखों का आना तो स्वाभाविक है।

आपने कहा कि जीवन में कभी ऐसा काम मत करो जिससे अन्य जीवों को असमाधि व पीड़ा उत्पन्न होती है। यतना और विवेकपूर्ण जीवन जी कर हम सहजता से पापार्जन से बच सकते हैं। कई काम ऐसे होते हैं जो न तो हम करते हैं, न हमने किया है और न हम आगे करेगें। किन्तु प्रत्याख्यान के बिना उन सब का दोष हमें लग रहा है।  चैदह नियमों का पालन करने से एवं प्रतिदिन चिंतन करने से हम पाप कर्मों से बच सकते हैं। हमारे प्रत्याख्यान मात्र से छह काय जीवों को शांति व समाधि मिल जाएगी।

सुख और दुख पर विस्तार से विवेचन करते हुए आपने कहा कि दुख एवं सुख के स्वरूप को समझ लो तो जीवन आनन्दमय बन जाएगा। आपका शनिवार का प्रवचन भी अरिहन्त भवन में होगा। कार्यक्रम का संचालन पूर्व अध्यक्ष रघुवीर जैन ने किया।