फर्राटा भरेगी रैपिड रेल, मिलेंगी विमान जैसी सुविधाएं

फर्राटा भरेगी रैपिड रेल, मिलेंगी विमान जैसी सुविधाएं

Sat 09 Feb 19  6:52 pm


मेरठ से दिल्ली तक रैपिड रेल का सफर शानदार होगा। यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ) अपनी हाई स्पीड ट्रेनों को कलात्मक रूप से बनाएगी। जिससे यह हर मौसम का सामना कर सकेगी। 
ऐसी होगी रैपिड रेल 
आरआरटीएस ट्रेन एयरोडायनामिक होंगी और 160 किमी प्रति घंटे की ऑपरेटिंग गति से चलेंगी। इस तरह के डिजाइन हवा का कम से कम प्रतिरोध करते हैं और मनचाही गति प्राप्त करने में सहायता मिलती है। 25 केवी बिजली प्रदान करने वाली ओवरहेड इलेक्टिक प्रणाली ट्रेन को बिजली की आपूर्ति करेगी। इसके अलावा, ऊर्जा बचाने के लिए, ट्रेनों में रीजनिरेटीव ब्रेकिंग सिस्टम होगा, जो ट्रेन के ब्रेक लगने पर ग्रिड को वापस ऊर्जा लौटाएगा। ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए ईटीसीएस-2 सिगनल प्रणाली का प्रयोग होगा। ऐसी प्रणाली यह भी सुनिश्चित करेगी कि मानसून या कोहरे जैसी स्थिति में ट्रेन संचालन में बाधा न आए। 
अत्‍याधुनिक सुविधाओं से लैस 
रैपिड रेल में नौ कोच होंगे। रैपिड रेल पूरी तरह से वातानुकूलित होगी और इसमें 2-2 आरामदायक सीटें होने के साथ-साथ, सामान रखने की जगह का भी प्रावधान होगा। मोबाइल और लैपटॉप चाजिर्ंग प्वाइंट की भी सुविधा होगी। विकलांगों, महिलाओं और बुजुर्गो के लिए सीटें स्पष्ट रूप से चिह्न्ति की जाएंगी। 
विमान की तरह होगा बिजनेस क्लास कोच 
बिजनेस यात्रियों को अपनी निजी वाहन न इस्तेमाल करने के लक्ष्य से आरआरटीएस ट्रेनों में एक विशेष बिजनेस क्लास कोच होगा। ऐसी व्यावसायिक कोच का प्रावधान होना, देश में पहली बार होगा। बिजनेस क्लास के लिए अलग एंट्री और एग्जिट गेट लगाए जाएंगे जो ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) सिस्टम जैसे क्यूआर कोड आधारित टिकट और नियर फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) इनेबल्ड फोन द्वारा संचालित होंगे। अन्य यात्री जो बिजनेस क्लास का आनंद उठाना चाहते हैं, वह अतिरिक्त किराये का भुगतान पर यात्र कर सकेंगे। 
मास ट्रांजिट सिस्टम से होगा यात्रियों का प्रवेश और निकास 
बेहतर यात्री प्रबंध के लिए सराय काले खां पर दिल्ली-मेरठ, अलवर और पानीपत कॉरिडोर इंटीग्रेटेड होंगे। स्टेशन पर रैपिड रेल में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म होंगे। दरवाजे दोनों तरफ से खुलेंगे। यह देश में पहली बार होगा जहां मास ट्रांजिट सिस्टम में प्रवेश और निकास के लिए दो अलग-अलग प्लेटफॉर्म होंगे। इस प्रक्रिया का पालन करने से भगदड़ जैसी स्थिति से बचा जा सकेगा। 

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