मामले की सुनवाई के दौरान अनावेदक पत्नी की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मानंद पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने अवगत कराया कि याचिकाकर्ता पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ सिविल कोर्ट में विवाह रद्द करने की याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के बाद सिविल कोर्ट ने पति व पत्नी की पुंसत्व जांच के लिए मेडिकल बोर्ड विक्टोरिया हॉस्पिटल को निर्देश दिए थे, लेकिन वहां महिला चिकित्सक के अभाव में पत्नी की जांच एल्गिन हॉस्पिटल में किए जाने की व्यवस्था दे दी गई।

रिपोर्ट में पत्नी को पुंसत्व की दृष्टि से सही करार दिया गया। पति ने एल्गिन अस्पताल की इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। उसने सिर्फ संतानोत्पत्ति नहीं बल्कि जेनेटिक क्रोमोसोम की जांच पर बल दिया। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पति की मांग के संबंध में डायरेक्टर विक्टोरिया हॉस्पिटल को मेडिकल बोर्ड गठित करते हुए उसमें एक महिला चिकित्सक की अनिवार्य रूप से व्यवस्था करने का निर्देश दे दिया। इसी के साथ उसकी संतानोत्पत्ति न कर पाने की क्षमता के आधार पर विवाह रद्द करने की मांग संबंधी याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया।

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बच्चा पैदा न कर पाने की क्षमता विवाह रद्द करने का आधार नहीं हो सकती : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

बच्चा पैदा न कर पाने की क्षमता विवाह रद्द करने का आधार नहीं हो सकती : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

Thu 03 Oct 19  5:59 pm


जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि संतानोत्पत्ति न कर पाने की क्षमता के कारण विवाह को रद्द करने का अधार नहीं बनाया जा सकता है। । ऐसा इसलिए क्योंकि हिन्दु विवाह अधिनियम में संतोनोत्पत्ति नहीं बल्कि सहवास-क्षमता न होने को विवाह रद्द करने का एक अधार निर्धारित किया गया है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ पति की ओर से दायर याचिका का पटाक्षेप कर दिया। हालांकि पति की ओर से नए सिरे से की गई पत्नी की जेनेटिक क्रोमोसोम संबंधी जांच की मांग पर डायरेक्टर विक्टोरिया हॉस्पिटल को मेडिकल बोर्ड गठित करते हुए उसमें एक महिला चिकित्सक की अनिवार्य रूप से व्यवस्था करने का निर्देश दे दिया है।

 

मामले की सुनवाई के दौरान अनावेदक पत्नी की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मानंद पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने अवगत कराया कि याचिकाकर्ता पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ सिविल कोर्ट में विवाह रद्द करने की याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के बाद सिविल कोर्ट ने पति व पत्नी की पुंसत्व जांच के लिए मेडिकल बोर्ड विक्टोरिया हॉस्पिटल को निर्देश दिए थे, लेकिन वहां महिला चिकित्सक के अभाव में पत्नी की जांच एल्गिन हॉस्पिटल में किए जाने की व्यवस्था दे दी गई।

रिपोर्ट में पत्नी को पुंसत्व की दृष्टि से सही करार दिया गया। पति ने एल्गिन अस्पताल की इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। उसने सिर्फ संतानोत्पत्ति नहीं बल्कि जेनेटिक क्रोमोसोम की जांच पर बल दिया। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पति की मांग के संबंध में डायरेक्टर विक्टोरिया हॉस्पिटल को मेडिकल बोर्ड गठित करते हुए उसमें एक महिला चिकित्सक की अनिवार्य रूप से व्यवस्था करने का निर्देश दे दिया। इसी के साथ उसकी संतानोत्पत्ति न कर पाने की क्षमता के आधार पर विवाह रद्द करने की मांग संबंधी याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया।

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