भीलवाड़ा को अखण्ड बनाओ : सुधासागर महाराज

भीलवाड़ा को अखण्ड बनाओ : सुधासागर महाराज

Wed 19 Jun 19  3:37 pm


भीलवाड़ा (हलचल)  व्यक्ति को अपने जीवन को सवांरने के लिए तीन तरीको से सोचना चाहिए। तुम जहां हो वही रहना चाहते हो या पीछे बैठना चाहते हो। या फिर अपने जीवन से पीछे लौटना चाहते है, तो उसका प्रोसेस अलग है और जहां है वही पर रहना चाहते हो तो उसकी प्रक्रिया अलग है। किसी व्यक्ति को पीछे लौटना है तो हिन गुणवालों से व्यवहार करों। ज्ञानवान है तो अज्ञानी के साथ रहों। व्यक्ति अपने आप पीछे लौट जाएगा। अगर कमजोर हो और आगे बढऩा है तो अपने से अधिक गुणवान, अमीर, धनवान से दोस्ती करों। चाहे वह आपकी बात नहीं सुने फिर भी उसे सुनाने का प्रयास करते रहो। यह विचार मुनि पुंगव सुधासागर ने बुधवार को आरके कॉलोनी से विहार कर शास्त्रीनगर जैन मंदिर पहुंचने के बाद आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरू व भगवान कभी किसी की नहीं सुनते है। वे किसी व्यक्ति या श्रावक की तरफ नहीं देखते है, लेकिन तुम्हे आगे बढऩा है अच्छा बनना है तो गुरू व भगवान को सुनाते रहो। अच्छे गुण चाहिए तो वातावरण भी वैसा ही बनाना होगा।

मुनि ने कहा कि जिनेन्द्र देव के प्रतिदिन दर्शन करों, लेकिन भगवान को घर आने का निमंत्रण मत देना नहीं तो भगवान भी श्रावक हो जाएंगे। जैन दर्शन के अनुसार जैन मंदिर में एक भी ऐसी प्रतिमा नहीं है जिसकी आंख खुली हो और वह हाथ से आर्शिवाद देती हो। लेकिन व्यक्ति को ऐसा नहीं बनना है। उसे खुली आंख से दर्शन करने चाहिए। आंख बन्द करके दर्शन करने जाएगा तो नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा को अखण्ड बनाओं। इसे कॉलोनी में मत बांटो। गुरु को किसी कॉलोनी का मत बनाओं। पंचकल्याणक को किसी एक कॉलोनी का मानकर नहीं चले। जिस दिन पांडाल में श्रावकों की संख्या अधिक व भोजनशाला में कम हो जाएगी समझ लेना लोगों को जैन धर्म समझ में आ गया।

भवन का लोकार्पण

शास्त्रीनगर कांवाखेड़ा में निर्मित विद्यासागर मांगलिक भवन का लोकार्पण मुनि के सान्निध्य में सुगन चन्द, विजय कुमार व अजय झांझरी ने किया। इससे पूर्व शास्त्रीनगर जैन मंदिर में चन्द्र प्रकाश, सुरेश पाटनी, पदम चन्द, रवि, विजय, जिनेन्द्र, शैलेन्द्र व मृदला पाटनी ने शान्तिधारा की गई।

सम्‍यकत्‍व लाभ क्रिया

इससे पूर्व मुनि सुधासागर महाराज ने आरके कॉलोनी में 108 रिद्धी मंत्रों  से अभिषेक व शान्तिधारा कराई। इस अवसर पर श्रेष्‍ठी कपूरचन्‍द चन्‍द सेठी के पौत्र के 8 वर्ष के होने पर सम्‍यकत्‍व लाभ क्रिया की गई। मूलनायक पर अभिषेक एवं शांतिधारा बसन्‍तीलाल अभिषेक जैन की।  

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