मंदिर में भक्ति से आता है अतिशय - मुनि सुधासागर

मंदिर में भक्ति से आता है अतिशय - मुनि सुधासागर

Fri 31 May 19  5:13 pm


भीलवाड़ा (हलचल) । चन्द्रशेखर आजाद नगर स्थित आदिनाथ दिगम्‍बर जैन मन्दिर में पंचकल्याणक महोत्सव के तहत मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि मंजिल कितनी भी पावन व पवित्र क्‍यों न हो मंजिल पर पहुंचने वाले रास्ते अगर गंदे हो तो वह मंजिल भी धीरे धीरे अपवित्र होने लगती है। कई बार माता पिता कितने ही अच्छे एवं इज्जत वाले क्‍यों न हो लेकिन संतान की गलत आदतो एवं आचरण से उनकी भी इज्जत खराब हो जाती है। जिस भारत भूमि पर किसी समय भगवान देवलोक से भ्रमण करने आते थे वह भूमि अब यहां रहने वाले लोगो की वजह से बहुत अपवित्र हो चुकी है। पापियों के पाप धोने से नहाने से गंगा मैली नहीं होती अपितु वह गंदी तब होती जब पापी लोग उसी गंगा में पाप करने एवं गंदगी करने लग जाते है। भारत के सभी पवित्र स्थल वहां आस पास रहने वाले लोगो द्वारा फैलाई गई गंदगी के कारण अपवित्र हो रहे है एवं उनके अतिशय खत्म हो रहे है। मंदिर का अतिशय तभी बढ़ेगा जब समाज द्वारा भगवान का नित्य अभिषेक, पूजा एवं भक्ति होगी। आजकल देखने को मिलता है कि तीर्थ स्थल मंदिरो में भगवान का अभिषेक व पूजा नौकर पूजारी रखकर कराया जाता है। ऐसा करने से उस तीर्थ स्थल का अतिशय कुछ भी नहीं रहेगा। मंदिर बनाने से पहले यह तय करो कि समाज का एक भी घर ऐसा न बचे जो परिवार मंदिर का सुबह शाम दर्शन पूजा एवं अभिषेक ना करे फिर मंदिर का अतिशय एवं प्रभाव देखो क्‍योंकि मंदिर में अतिशय भक्ति से आता है। दिगम्‍बर जैन दर्शन ही विश्व में एक ऐसा दर्शन है जिसमें साधु को हर कोई व्यक्ति आहार नहीं दे सकता इसकी एक सीमा एवं नियम है इसमें आहार देने वाला व्यक्ति शुद्ध हो, अभक्ष्य नहीं खाता हो, व्यसन मुक्त हो। जब जैन मुनि के आहार में इतनी शुद्धता रखते है तो स्वयं के भोजन में इतनी शुद्धता यों नहीं रखी जाती। जिस तरह पूजन की थाली इतनी शुद्ध होती है उसी प्रकार भोजन की थाली भी शुद्ध होनी चाहिए। अभक्ष्य चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए। संयोजक प्रवीण चौधरी ने बताया कि धर्मसभा से पूर्व राजा श्रैयांस द्वारा आदि भगवान का प्रथम आहार 7 माह 8 दिन बाद गन्ने के रस से हुआ। इसके बाद श्रावको द्वारा प्रभु को आहार दिया गया। दोपहर में श्रीजी स्थापना, सूरिमंत्र, केवलज्ञानोह्रश्वपति कार्यक्रम हुए। समवशरण की विशाल रचना की गई एवं समवशरण की भव्य आरती हुई जिसका सौभाग्य ऋषभ नवयुवक मण्डल को मिला। इसके पश्चात तत्वचर्चा, ज्ञानकल्याणक पूजन एवं जिनबिबस्थापना आदि कार्यक्रम हुए। शुक्रवार को सुबह नवप्रभात की नई किरण के साथ भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत से निर्वाण प्राप्ति का भव्य कार्यक्रम होगा।

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