कपड़ा पौधों की तरह ही कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन छोड़ेगा</p>

कपड़ा पौधों की तरह ही कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन छोड़ेगा

  2020-10-16 12:17 pm
<p><strong>गाजियाबाद ।</strong>&nbsp;नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (Northern India Textile Research Association) यानी निटरा के विज्ञानियों ने एक ऐसा विशेष रसायन तैयार किया है, जिससे लेपित कपड़ा पौधों की तरह ही कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन छोड़ेगा। शुरुआत में इस रसायन का उपयोग कर पर्दे, सोफा व मेज कवर इत्यादि कपड़ों का उत्पादन किया जाएगा। गुजरात की कंपनी अरविंद टेक्सटाइल के सहयोग से डेढ़ वर्ष पूर्व निटरा ने यह शोध शुरू किया था। शोध कार्य का बजट 40 लाख रुपये है। गाजियाबाद स्थित निटरा के साथ हुए करार के आधार पर&nbsp;संबंधित कंपनी इस तकनीक से विशेष कपड़े का उत्पादन करेगी। निटरा का दावा है कि रसायन-युक्त कपड़ा पूरी तरह सुरक्षित होने के साथ ही आम व्यक्ति के बजट में होगा। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का शोध सफल हो गया है। अगले छह माह में शोध पूरा कर तकनीक को पेटेंट कराया जाएगा। इसके बाद तकनीक संबंधित कंपनी को हस्तांतरित कर दी जाएगी, जो वस्त्र उत्पादन प्रारंभ कर देगी। निटरा के अनुसार, परिधान के लिए शोध बाद में किया जाएगा। जिसमें इस बात का सर्वाधिक ध्यान रखना होगा कि रसायन का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े।</p> <p><strong>35 से 40 धुलाई के बाद कराना होगा रिचार्ज</strong></p> <p>रसायन का असर कपड़े में 35 से 40 धुलाई तक रहेगा। असर समाप्त होने पर उपयोगकर्ता ग्राहक संबंधित कंपनी के आउटलेट या&nbsp;शोरूम से संपर्क कर कपड़ों पर दोबारा रसायन लगवा सकेगा। इसका शुल्क 250 से 300 रुपये तक होगा। कपड़े की कीमत आम कपड़े से 250 से 300 रुपये अधिक होगी। अगले साल के अंत तक यह बाजार में होगा। घर या कार्यालय में प्रदूषण से निबटने को निटरा की यह युक्ति एक नया और बेहद कारगर उपाय प्रस्तुत कर रही है।</p> <p><strong>बायोगारमेंट्री की ओर दुनिया</strong></p> <p>बताते चलें कि बीते साल कनाडाई डिजाइनर रोया अघिघि द्वारा शैवाल से बनाए गए विशेष परिधान चर्चा में आए। पौधों की तरह ही यह वस्त्र प्रकाश-संश्लेषण कर कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदल देते हैं। इन्हेंं बायोगारमेंट्री नाम दिया गया है। शैवाल की जीवित प्रकाश-संश्लेषक कोशिकाओं से यह फैब्रिक तैयार किया गया। यही नहीं, दुनिया अब कृत्रिम प्रकाश-संश्लेषकों को प्रदूषण से निबटने का औजार बना रही है। कृत्रिम फैब्रिक और कृत्रिम पत्तियां भी विकसित की गई हैं।अरिंदम बासु (महानिदेशक, निटरा) का कहना है कि पेटेंट के बाद उस युक्ति को अरविंद टेक्सटाइल कंपनी को हस्तांतरित किया जाना है। यह करार 2 वर्ष का होगा। कंपनी इसका प्रयोग विशेष वस्त्र के उत्पादन में करेगी। फिलहाल पर्दे, मेज, सोफा कवर आदि कपड़ों का ही उत्पादन होगा।</p>
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