मेथी : स्वाद अलग अंदाज अलग

मेथी : स्वाद अलग अंदाज अलग

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हर मसाले की अपनी एक पहचान है, जो किसी खास चीज में मिलकर उसे लजीज बना देता है. मेथी की स्वाभाविक दोस्ती मछली से है, लेकिन तरी वाला व्यंजन हो या तंदूरी टिक्का मछली, मेथी इनका आनंद दोगुना कर देती है. कुछ मसाले तो औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं. मेथी भी उनमें से एक है.

पुष्पेश पंत 
खाने-पीने के शौकीन हमारे एक मित्र हवा में जाड़े की खुनकी महसूस करते ही गुनगुनाना शुरू कर देते हैं, \'आलू-मेथी की भुजिया गरम होती है!\' चुहलबाजी की छेड़छाड़ वाली इस गीत पंक्ति से वह सुझाते हैं कि मेथी मौसम के अनुकूल आहार है, क्योंकि इसकी तासीर गरम होती है. भुजिया या भाजी ही नहीं, मेथी का मन माफिक इस्तेमाल आप कर सकते हैं. कुछ बरस पहले तक गली-मोहल्ले के हर हलवाई की दूकान पर जाड़ों में ‘मेथी के लड्डू’ आसानी से मिल जाते थे. लेकिन, अब तो यह ढूंढने पर भी मुश्किल से ही मिलते हैं.
 
इतिहासकारों के अनुसार, मेथी का इस्तेमाल ईसा के जन्म से कोई चार हजार वर्ष पहले हमारे पुरखे करने लगे थे. मिस्र के पिरामिडों में मेथी के बीज मिले हैं और रोमवासी इसे बहुत काम का मानते थे. कुछ मदिराओं में इसे डाला जाता था और अगरबत्ती निर्माण में भी वे लोग इसे शरबती सुगंध का पुट देने के लिए काम लाते थे. 
 
मेथी की स्वाभाविक दोस्ती मछली से है. तरी वाला व्यंजन हो या तंदूरी टिक्का मछली, मेथी इनका आनंद दोगुना कर देती है. यों, मेथी मुर्ग और कीमा मेथी भी कम मजेदार नहीं होते. बटर चिकन में कसूरी उर्फ सुवासित कस्तूरी मेथी की चुटकी उसे नायाब बना देती है.
 
शाकाहारी भोजन में मेथी कढ़ी की शोभा तो बढ़ाती ही है, साथ ही ‘मेथी, मटर, मलाई’ में हल्की कड़ुवाहट की जुगलबंदी मटर और मलाई की दूधिया मिठास के साथ होती है. कश्मीरी वाजवान में जहां मेथी का कमाल देखने को मिलता है, वहीं ‘मेथी चामन’ (पनीर) में भी यह खूब जंचती है.
 
 पंजाब में ‘गाजर मेथी’ की सब्जी बनायी जाती है, तो वहीं ‘मेथी के पराठे’ और रोटियां भी चाव से खायी जाती हैं. कभी-कभार मट्ठी में भी इससे मुलाकात हो जाती है. राजस्थान में ‘मेथी किशमिश’ की सूखी सब्जी रेगिस्तान की अनोखी संतान है.
 
 मेथी के दानों को रात भर दूध में भिगोकर और फिर धोकर इसकी कड़ुवाहट पूरी तरह निकाल दी जाती है. इसमें रही-सही कसर किशमिश की मिठास पूरी कर देती है. गुजरात में मुठिया को असाधारण बनाने का काम मेथी करती है. दिल्ली के पारंपरिक अल्पाहार में बेडमी ‘मेथी की चटनी’ के साथ ही खायी जाती है.
 
बंगाल का ‘पांच फोरन’ मसाला हो या तमाम दूसरे सूबों के अचारी मसाले, मेथी हर जगह उनका अनिवार्य अंग है.
दक्षिण भारत में मेथी तड़के-बघार का हिस्सा है, जो उपमा, सांभर के अलावा नारियल की चटनी को स्वादिष्ट बनाती है, जो इडली, डोसे या उत्तपम के साथ परोसी जाती है. मेथी वाले चावल दक्षिण भारत में लेमन राइस और टोमैटो राइस का विकल्प प्रस्तुत करते हैं.
 
मेथी जाड़ों में ज्यादा आकर्षक लगती है, पर अपने औषधीय गुणों के कारण मधुमेह के रोगियों को साल भर मददगार लगती है. कुछ लोग मेथी को अंकुरित कर इसे खाते हैं. इस रूप में मेथी जरा भी कड़वी नहीं लगती. 
 
पश्चिमी देशों में मेथी हर्ब यानी बूटी के रूप में इस्तेमाल की जाती है. सलाद, सूप और स्टू में इसका इस्तेमाल किया जाता है. मेथी का चलन उत्तरी यूरोप के ठंडे देशों में ज्यादा है, शायद गरम तासीर के कारण ही. भूमध्य सागर तटवर्ती देशों के अलावा मध्य एशिया से संलग्न गणराज्यों में भी यह लोकप्रिय है. आप चाहे शाकाहारी हों या मांसप्रेमी इस बार शिशिर में मेथी का जायका जरूर आजमायें. मीठा पसंद हो या नमकीन, मेथी सूखी हो या ताजी, यह आपको निराश नहीं करेगी.
 
रोचक तथ्य
मेथी का इस्तेमाल ईसा के जन्म से कोई चार हजार वर्ष पहले हमारे पुरखे करने लगे थे.
मिस्र के पिरामिडों में मेथी के बीज मिले हैं और रोमवासी इसे बहुत काम का मानते थे.
बंगाल का ‘पांच फोरन’ मसाला हो या तमाम दूसरे सूबों के अचारी मसाले, मेथी हर जगह उनका अनिवार्य अंग है.
 
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