नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार के पहले 100 दिनों में कई बड़े सुधार होंगे

  • राजीव कुमार ने कहा कि आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर सरकार तेजी से कदम बढ़ाएगी

  • कुमार ने बताया कि सरकार श्रम कानून में सुधार, कंपनियों का निजीकरण और लैंड बैंक का निर्माण करेगी

  • निजीकरण में तेजी के लिए सभी सरकारी कंपनियों की एक होल्डिंग कंपनी बन सकती है

  • नई दिल्ली 
    मोदी सरकार के मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो चुका है। निर्मला सीतारमण देश की नई वित्त मंत्री बनी हैं। वह पूर्ण प्रभार वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। वित्त मंत्री के तौर पर उनके सामने पहले 100 दिनों में कई बड़े कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है जिनमें सबसे बड़ा कदम कुछ प्रमुख सुधारों को लेकर हो सकता है। वैसे भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में चौतरफा सुधारों को अंजाम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार भी कह चुके हैं कि पहले 100 दिनों में ही कई बड़े आर्थिक सुधार किए जाएंगे ताकि विदेशी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा जल्दी-से-जल्दी दोबारा बहाल हो। 

    श्रम सुधार से निजीकरण तक 
    कुमार के मुताबिक, प्रमुख आर्थिक सुधारों में श्रम कानूनों में बदलाव करने, निजीकरण की गति बढ़ाने और नए सिरे से औद्योगिक विकास के लिए भूखंडों का खजाना (लैंड बैंक) तैयार करने जैसे मुद्दे शामिल होंगे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में राजीव कुमार ने कहा, 'उन्हें (विदेशी निवेशकों को) खुश करने के लिए बहुत कुछ होगा। आप कई तरह के सुधार देखेंगे, इसके लिए मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं।' 

    44 श्रम कानूनों पर नजर 
    उन्होंने कहा कि देश के जटिल श्रम कानूनों को आधुनिक परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जाएगा और यह काम जुलाई में संसद सत्र के दौरान पूरा हो जाएगा। तब सरकार लोकसभा से श्रम कानून से जुड़ा नया अधिनियम पास करवाना चाहेगी। उस बिल में 44 केंद्रीय कानूनों को चार संहिताओं, वेतन (वेजेज), औद्योगिक संबंध (इंडस्ट्रियल रिलेशंस), सामाजिक सुरक्षा और कल्याण (सोशिल सिक्यॉरिटी ऐंड वेलफेयर) तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कामकाजी हालात (ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशंस) में समाहित किया जाएगा। इससे कंपनियों को अपने कामगारों और अधिकारियों के साथ तरह-तरह के जटिल विवादों में फंसने से छुटकारा मिलेगा। 

    लैंड बैंक का निर्माण 
    कुमार ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अधीन पड़ी अनुपयोगी सरकारी जमीनों का लैंड बैंक बनाएगी जिसका कुछ हिस्सा विदेश निवेशकों को भी सौंप सकती है। इससे विदेशी निवेशकों को जमीन मालिकों के साथ उलझने जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना होगा। अतीत में सरकार किसानों की जमीन लिया करती थी जिस वजह से उसे कई मुकदमों में उलझना पड़ता था। कई किसान जमीन देने से इनकार करते हुए अदालत चले जाते थे। ऊपर से पर्यावरण और अन्य दूसरे मुद्दे भी सरकार की चुनौतियां बढ़ा देते थे। 

     बिकेंगी या बंद होंगी 42 कंपनियां 
    नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार अगले कुछ महीनों में सरकारी नियंत्रण वाली 42 कंपनियों का पूरी तरह निजीकरण करेगी या फिर उन्हें बंद कर देगी। सरकार एयर इंडिया में भी विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। एयर इंडिया का बढ़ता घाटा सरकार के लिए सरदर्द बना हुआ। कुमार ने कहा कि सरकार घाटे में जा रही सरकारी कंपनियों के लिए एक स्वायत्त होल्डिंग कंपनी बना सकती है जिसका सभी सरकारी कंपनियों पर नियंत्रण होगा और वे कंपनियां अलग-अलग मंत्रालयों के प्रति जवाबदेह नहीं रह जाएंगी। ऐसा हुआ तो केंद्र सरकार की नौकरशाही की बेवजह दखल से छुटकारा पाकर सरकारी संपत्तियों की बिक्री में तेजी आ सकेगी। 

    बैंकिंग सेक्टर और टैक्स कलेक्शन 
    आर्थिक वृद्धि की दर में गिरावट और नौकरियों के अभाव को लेकर राजीव कुमार ने कहा कि बैंकों की बिगड़ी बैलेंस शीट और नॉन-बैंकिंग फाइनैंस सेक्टर के संकट से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज में सुधार लाने के साथ-साथ बुनियादी ढाचों और नए आवासीय परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाना चाहिए। इसके लिए जरूरी पूंजी जुटाने के लिए सरकारी कंपिनयों के निजीकरण में तेजी और कर संग्रह में वृद्धि बढ़िया उपाय हो सकते हैं। 

     

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    मोदी सरकार के पहले 100 दिनों में कई बड़े सुधार होंगे

    Fri 31 May 19  8:52 pm


    • नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार के पहले 100 दिनों में कई बड़े सुधार होंगे

    • राजीव कुमार ने कहा कि आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर सरकार तेजी से कदम बढ़ाएगी

    • कुमार ने बताया कि सरकार श्रम कानून में सुधार, कंपनियों का निजीकरण और लैंड बैंक का निर्माण करेगी

    • निजीकरण में तेजी के लिए सभी सरकारी कंपनियों की एक होल्डिंग कंपनी बन सकती है

    नई दिल्ली 
    मोदी सरकार के मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो चुका है। निर्मला सीतारमण देश की नई वित्त मंत्री बनी हैं। वह पूर्ण प्रभार वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। वित्त मंत्री के तौर पर उनके सामने पहले 100 दिनों में कई बड़े कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है जिनमें सबसे बड़ा कदम कुछ प्रमुख सुधारों को लेकर हो सकता है। वैसे भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में चौतरफा सुधारों को अंजाम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार भी कह चुके हैं कि पहले 100 दिनों में ही कई बड़े आर्थिक सुधार किए जाएंगे ताकि विदेशी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा जल्दी-से-जल्दी दोबारा बहाल हो। 

    श्रम सुधार से निजीकरण तक 
    कुमार के मुताबिक, प्रमुख आर्थिक सुधारों में श्रम कानूनों में बदलाव करने, निजीकरण की गति बढ़ाने और नए सिरे से औद्योगिक विकास के लिए भूखंडों का खजाना (लैंड बैंक) तैयार करने जैसे मुद्दे शामिल होंगे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में राजीव कुमार ने कहा, 'उन्हें (विदेशी निवेशकों को) खुश करने के लिए बहुत कुछ होगा। आप कई तरह के सुधार देखेंगे, इसके लिए मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं।' 

    44 श्रम कानूनों पर नजर 
    उन्होंने कहा कि देश के जटिल श्रम कानूनों को आधुनिक परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जाएगा और यह काम जुलाई में संसद सत्र के दौरान पूरा हो जाएगा। तब सरकार लोकसभा से श्रम कानून से जुड़ा नया अधिनियम पास करवाना चाहेगी। उस बिल में 44 केंद्रीय कानूनों को चार संहिताओं, वेतन (वेजेज), औद्योगिक संबंध (इंडस्ट्रियल रिलेशंस), सामाजिक सुरक्षा और कल्याण (सोशिल सिक्यॉरिटी ऐंड वेलफेयर) तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कामकाजी हालात (ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशंस) में समाहित किया जाएगा। इससे कंपनियों को अपने कामगारों और अधिकारियों के साथ तरह-तरह के जटिल विवादों में फंसने से छुटकारा मिलेगा। 

    लैंड बैंक का निर्माण 
    कुमार ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अधीन पड़ी अनुपयोगी सरकारी जमीनों का लैंड बैंक बनाएगी जिसका कुछ हिस्सा विदेश निवेशकों को भी सौंप सकती है। इससे विदेशी निवेशकों को जमीन मालिकों के साथ उलझने जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना होगा। अतीत में सरकार किसानों की जमीन लिया करती थी जिस वजह से उसे कई मुकदमों में उलझना पड़ता था। कई किसान जमीन देने से इनकार करते हुए अदालत चले जाते थे। ऊपर से पर्यावरण और अन्य दूसरे मुद्दे भी सरकार की चुनौतियां बढ़ा देते थे। 

     बिकेंगी या बंद होंगी 42 कंपनियां 
    नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार अगले कुछ महीनों में सरकारी नियंत्रण वाली 42 कंपनियों का पूरी तरह निजीकरण करेगी या फिर उन्हें बंद कर देगी। सरकार एयर इंडिया में भी विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। एयर इंडिया का बढ़ता घाटा सरकार के लिए सरदर्द बना हुआ। कुमार ने कहा कि सरकार घाटे में जा रही सरकारी कंपनियों के लिए एक स्वायत्त होल्डिंग कंपनी बना सकती है जिसका सभी सरकारी कंपनियों पर नियंत्रण होगा और वे कंपनियां अलग-अलग मंत्रालयों के प्रति जवाबदेह नहीं रह जाएंगी। ऐसा हुआ तो केंद्र सरकार की नौकरशाही की बेवजह दखल से छुटकारा पाकर सरकारी संपत्तियों की बिक्री में तेजी आ सकेगी। 

    बैंकिंग सेक्टर और टैक्स कलेक्शन 
    आर्थिक वृद्धि की दर में गिरावट और नौकरियों के अभाव को लेकर राजीव कुमार ने कहा कि बैंकों की बिगड़ी बैलेंस शीट और नॉन-बैंकिंग फाइनैंस सेक्टर के संकट से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज में सुधार लाने के साथ-साथ बुनियादी ढाचों और नए आवासीय परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाना चाहिए। इसके लिए जरूरी पूंजी जुटाने के लिए सरकारी कंपिनयों के निजीकरण में तेजी और कर संग्रह में वृद्धि बढ़िया उपाय हो सकते हैं। 

     

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