रिटर्न में दें नकदी और जेवर का लेखाजोखा

Mon 13 May 19  1:58 am


कई बार ऐसा भी होता है कि परिवार के पास ऐसी संपत्ति आ जाती है, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं होता है। मसलन शादी पर मिले तोहफों को ही लीजिए। उन पर किसी तरह का आयकर नहीं लगता है। शादी में मिली नकदी या सोने के गहने भी बिना हिसाब-किताब के सामामन में आ जाते हैं और रिटर्न दाखिल करते समय उनका ब्योरा देने की जरूरत शायद किसी को भी नहीं हो। इसी तरह किसी महिला को विरासत में गहने मिले हो सकते हैं और आयकर रिटर्न दाखिल करते समय उसे भी इनका खुलासा करने की जरूरत नहीं होती। आम तौर पर \'बिना हिसाब-किताब की\' इस संपत्ति से किसी तरह की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मगर रकम की जरूरत होने पर यदि आप इन्हें बेचते हैं या कर अधिकारी आपके घर-दफ्तर की तलाशी लेते हैं तो आपसे इनके बारे में सवाल पूछे जा सकते हैं। जब आप ऐसा सामान बेचते हैं तो अधिकारी आपसे इनके बिल दिखाने के लिए कह सकता है और यह भी पूछ सकता है कि गहने कहां से आए ताकि वह तय कर सके कि आपने जो आयकर अदा किया है, वह ठीक है या नहीं। टैक्समैन डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा बताते हैं, \'ऐसी संपत्तियों के बारे में कोई भी मानक नियम नहीं है, लेकिन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का एक पुराना परिपत्र कहता है कि शादीशुदा महिला के 500 ग्राम तक के सोने के गहनों और अविवाहित महिला के 250 ग्राम तक के गहनों को जब्त करने की जरूरत नहीं है। पुरुषों के मामले में यह सीमा 100 ग्राम है।\' माली हालत मजबूत तो रख सकते हैं ज्यादा गहने लेकिन परिपत्र में यह भी कहा गया है कि \'परिवार की स्थिति और उस परिवार के समुदाय में प्रचलित रीतियों तथा मान्यताओं एवं मामले की परिस्थितियों आदि को ध्यान में रखते हुए अधिकृत अधिकारी यह फैसला कर सकता है कि इससे अधिक मात्रा में गहनों को जब्त करना है या छूट देनी है।\' इस तरह कर अधिकारियों को अधिकार मिल जाता है कि यदि परिवार की स्थिति इस तरह की है कि वह तय मात्रा से अधिक सोना रख सकता है या जिस समुदाय से वह परिवार संबंधित है, उस समुदाय में सोने की खरीद या उसे उपहार में देने का प्रचलन है तो वे रियायत बरतते हुए तय मात्रा से अधिक गहनों को भी छोड़ सकते हैं। हाल ही में एक मामले में जहां आयकर विभाग ने एक तलाशी अभियान के दौरान एक व्यक्ति के पास से कुछ गहने बरामद किए थे। साथ ही मकान बनाने के लिए किए गए खर्च का हिसाब-किताब भी वह व्यक्ति नहीं दे पाया और उसके पास से अघोषित शेयर और अग्रिम प्रतिभूतियां भी मिलीं। कर अधिकारी ने शेयर आदि के साथ गहनों को भी \'अघोषित आय\' के मद में दर्ज कर दिया। इस पर आयकरदाताओं ने अपील की और कहा कि तलाशी के दौरान अधिकारियों को ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली, जो किसी तरह का अपराध सिद्घ करती हो। उन्होंने यह भी कहा कि खुलासा गहनों की मौजूदा कीमत के आधार पर कराया गया है और यह नहीं देखा गया कि जब गहने खरीदे गए थे तब उनकी कीमत क्या थी। उन्होंने यह दलील भी दी कि करदाता के परिवार की हैसियत और परिवार के सदस्यों की संख्या को देखा जाए तो तलाशी में बरामद गहने असामान्य नहीं थे और बहुत पहले खरीदे गए थे। कर पंचाट उनके तर्कों से सहमत हो गया और उसने करदाता के पक्ष में फैसला सुना दिया। पंचाट ने कहा कि यदि गहने उसी वर्ष में नहीं खरीदे गए हैं, जिस वर्ष के लिए आयकर का निर्धारण किया जा रहा है तो उन गहनों को अघोषित आय की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। बैंक खाते से निकासी दिखाएं और नकदी रखें इसी तरह ऐसा भी हो सकता है कि बुजुर्ग माता-पिता को अस्पताल में भर्ती कराने अथवा संतान की शादी करने जैसे आपात खर्च के लिए परिवार ने बड़ी मात्रा में नकदी अपने पास रखी हो। शादी के समय तोहफे के तौर पर मिली नकदी भी भारी मात्रा में हो सकती है। अगर आपके पास नकदी है तो सुनिश्चित करें कि जरूरत पडऩे पर आप नकदी का स्रोत बता सकें। यदि आप वेतनभोगी हैं तो बैंक खाते से रकम की निकासी का रिकॉर्ड स्रोत बताने में आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। अगर आप कोई कारोबार चलाते हैं तो दाखिल किया गया कर रिटर्न या चुकाया गया अग्रिम कर रकम का स्रोत बताने में आपकी मदद कर सकता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट और अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव कहते हैं, \'शादी में सोना या नकदी मिली हो तो कर अधिकारी उपहार देने वाले का ब्योरा मांग सकता है और आपके दावे के सत्यापन के लिए उन लोगों की स्थायी खाता संख्या (पैन) का विवरण भी तलब कर सकता है।\' हाल ही में एक और मामला सामने आया, जिसमें कर अधिकारियों ने तलाशी के दौरान एक करदाता के लॉकर से करीब 9.25 लाख रुपये की नकदी बरामद की। अधिकारियों ने उसे बिना हिसाब-किताब के निवेश की श्रेणी में डाल दिया। उनका कहना था कि करदाता ने इतनी अधिक नकदी लॉकर में रखी, जबकि वह बैंक खाते में भी उसे रख सकता था, जहां से निकासी या जमा करना उसके लिए अधिक आसान होता। यही वजह थी कि कर अधिकारी यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि नकदी ज्ञात स्रोतों से आई है और उसका पूरा हिसाब-किताब है। मगर करदाता ने रकम के स्रोत का सबूत दिखा दिया और पंचाट ने करदाता के पक्ष में ही फैसला सुना दिया। जो लोग सालाना 50 लाख रुपये से ऊपर कमाते हैं, उनके लिए नियम थोड़े सख्त हैं। उन्हें अपनी सभी प्रकार की संपत्तियों का खुलासा रिटर्न दाखिल करते समय करना होता है। यदि उन्होंने किसी संपत्ति का खुलासा नहीं किया है तो कर अधिकारी उनके रिटर्न को त्रुटिपूर्ण बता सकते हैं और उनसे दोबारा रिटर्न दाखिल करने के लिए कह सकते हैं।
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