कीलेस पुश बटन आजकल कई कारों में कॉमन है। कार कंपनियां इस फीचर को प्रमुखता से हाईलाइट करके बेचती हैं। बी-सेगमेंट की हैचबैक कारों में यह फीचर बहुत मिलता है। पहले ये फीचर केवल टॉप वेरियंट के मॉडल्स में ही दिखता था। लोग आकर्षित हो कर इस फीचर के चलते कार को खरीद लेते हैं, लेकिन इस फीचर से कोई फायदा नहीं होता है। हालांकि केवल कार को बिना चाबी के अनलॉक किया जा सकता है और केवल एक पुश बटन से कार ही को स्टार्ट किया जा सकता है। आजकल आने वाली ज्यादातर कारों में रिमोट लॉकिंग फीचर मिलता है और बटन दबा कर कार को लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। लेकिन कीलेस पुश बटन स्टार्ट अगर आपको स्टैंडर्ड मिलता है, तब तो ठीक है, लेकिन एक्स्ट्रा खर्च करके यह फीचर वाली कार लेना कतई फायदे का सौदा नहीं है।

ऑटोमैटिक हेडलैंप्स

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कार कंपनियां आजकल ऑटोमैटिक हेडलैंप्स को लग्जरी फीचर बता कर इसकी मार्केटिंग करती हैं। वहीं कुछ ग्राहक झांसे फंस कर यह फीचर वाली कार खरीद भी लेते हैं। लेकिन समझदारी के चश्मे से देखा जाये तो यह कतई अक्लमंदी का सौदा नहीं है। आप मैनुअली भी कार की लाइट स्विच ऑन और स्विच ऑफ कर सकते हो। वहीं अगर कार में यह फीचर आपको स्टैंडर्ड मिलता है, तो बेहतर है, लेकिन इस फीचर के लिए अलग से खर्च कर ऊंचे वेरियंट पर जाना समझदारी नहीं है।

सनरूफ 

\"\"एक समय था जब शेवरले ने अपनी ऑप्ट्रा कार में यह फीचर दिया था। जिसके बाद कई कार कंपनियों ने इस फीचर को देना शुरू कर दिया। वहीं अब कंपनियों ने मिड-लेवल हैचबैक्स और सस्ती कारों में भी यह फीचर दे रही हैं। भारत जैसे गर्म और नमी वाले देश में सनरूफ पर खर्च करना समझदारी नहीं है। जिन लोगों के पास सनरूफ वाली कारें हैं, खुद उनका अनुभव है कि इससे कार में धूल आ जाती है, वहीं शुरुआत में ओपन रूफ के साथ चलना लुभावना लगता है लेकिन बाद में इससे तौबा कर ली।

बेज इंटीरियर\"\"

आजकल बेज इंटीरियर तमाम कारों में मिलता है। कार कंपनियां इस फीचर को प्रमुखता से हाईलाइट करके बेचती हैं। वहीं बेज इंटीरियर होने से कार सबसे ज्यादा गंदी होती है। कार के इंटीरियर में गहरे रंग हमेशा अच्छे होते हैं और उनमें दाग-धब्बे भी नहीं दिखाई देते। बेज रंग को मैनटेन करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और उनकी रोज ही साफ-सफाई ड्राइक्लीनिंग वगैरहा करनी पड़ती है।

टच सेंसिटिव एसी कंट्रोल

यह फीचर है जिसे कार कंपनियां गाड़ियां बेचते समय लग्जरी फीचर के नाम से प्रचारित करती हैं। वहीं ड्राइविंग के दौरान हमारा मेन फोकस ड्राइविंग होता है, लेकिन यह फीचर कई बार हादसे भी करवा सकता है। एसी की स्पीड को नोब के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है और ड्राइविंग के दौरान ये करना आसान होता है, यहां तक कि बिना देखे भी नोब को एडजस्ट किया जा सकता है। लेकिन टच सेंसिटिव बटन को दबाने के लिए फोकस करना पड़ता है।

प्रोक्सीमिटी सेंसर्स

अकसर महंगी कारों में ये फीचर मिलता है। लेकिन कई कार कंपनियां प्रीमियम बी हैचबैक और सी सेगमेंट की सेडान कारों में यह फीचर देने लगी हैं। इस फीचर के तहत जैसे ही कोई भी कार  या व्यक्ति कार के नजदीक आएगा, साउंड अलार्म बजने लगेगा। वहीं भारत की भीडभाड़ वाली सड़कों पर ट्रैफिक की स्थिति पहले ही खऱाब है, ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अलार्म कितनी बार बजेगा।

एंबियंट लाइट

कंपनियां कारों में एंबियंट लाइट का फीचर दे रही हैं। हालांकि इससे केबिन थोड़ा सुंदर लगता है।  वहीं किसी को इंप्रेस करने के लिए इस फीचर को ऑन किया जा सकता है। लेकिन इस पीचर के लिए अलग से खर्च करना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। वहीं इस फीचर से कई तरह की लाइट्स आने से ड्राइविंग के दौरान आपका ध्यान भटक सकता है।

फॉक्स रूफ रेल्स\"\"

आजकल सभी कॉम्पैक्ट, मिनी एसयूवी, क्रॉसओवर और हैचबैक्स में रूफ रेल्स को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जाता है। कुछ लोग अपनी गाड़ियों को स्पोर्टी लुक देने के लिए आफ्टर मार्केट इन एसेसरीज को इँस्टॉल भी कराते हैं। वहीं इस फीचर वाली गाड़ी को लेने के लिए अच्छी खासी जेब ढीली करनी पड़ती है। वहीं अगर आप अपनी कार की छत पर एक्स्ट्रा लोड यानी समान वगैरहा रखते हैं, तो इसकी बजाय मेटल कैरियर सको लगा सकते हैं, या फिर रूफ बॉक्स भी लगा सकते हैं।

वॉयस कमांड्स

कंपनियां अपनी गाड़ियों में वॉयस कमांड का फीचर दे रही है। सुनने में यह बड़ा रोमांचक लग सकता है, लेकिन भारत के लिहाज से यह ज्यादा प्रभावी नहीं है। इसकी वजह है कि इनकी कोडिंग विदेश में बोली जाने वाली अंग्रेजी के हिसाब से की जाती है और भारतीयों को उच्चारण थोड़ा अलग होता है और इसे समझने में काफी दिक्कत होती है। वैसे भी इस फीचर की वजह से ड्राइविंग में भी बाधा आती है।

ऑटोमैटिक वाइपर्स\"\"

पहले ये फीचर केवल महंगी गाड़ियों में ही मिलता था, वहीं अब कार कंपनियां सस्ती सेडान और हैचबैक में भी ऑफर कर रही हैं। इस फीचर की खासियत यह है कि जैसे ही सेंसर पर पानी पड़ेगा, वाइपर्स ऑटोमैटिकली शुरू हो जाएंगे। सुनने में यह बेहद अच्छा लगता है, लेकिन हल्का सा पानी पड़ते ही बिना जरूरत के चालू हो जाएंगे, साथ ही ब्लेड भी जल्दी घिसेंगे। बेहतर है मैनुअली वाइपर को ऑन करके अपनी जरूरत के मुताबिक ऑन-ऑफ किया जा सकता है।

 

 

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लग्जरी’ फीचर्स के झांसे में मत फंसना, नहीं तो हो जायेगा नुकसान

लग्जरी’ फीचर्स के झांसे में मत फंसना, नहीं तो हो जायेगा नुकसान

Sat 29 Jun 19  3:45 pm


आजकल कार कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए तमाम तरह के फीचर दे रही हैं। ग्राहक भी टाइट बजट होने के बावजूद इन फीचरों की तरफ आकर्षित होकर तुरंत कार खरीद लेते हैं, लेकिन जब वे इनका इस्तेमाल करने लगते हैं, तो उन्हें लगता है कि ये फीचर इतने प्रभावी नहीं हैं, जितना उन्होंने सोचा था। बाद में उन्हें लगता है कि उन्होंने बेवजह ही इन पर पैसे खर्च कर दिये। हम बता रहे हैं उन 10 फीचरों के बारे में जिन्हें आप कार खरीदते वक्त नजरंदाज कर सकते हैं।\"\"

कीलेस पुश बटन आजकल कई कारों में कॉमन है। कार कंपनियां इस फीचर को प्रमुखता से हाईलाइट करके बेचती हैं। बी-सेगमेंट की हैचबैक कारों में यह फीचर बहुत मिलता है। पहले ये फीचर केवल टॉप वेरियंट के मॉडल्स में ही दिखता था। लोग आकर्षित हो कर इस फीचर के चलते कार को खरीद लेते हैं, लेकिन इस फीचर से कोई फायदा नहीं होता है। हालांकि केवल कार को बिना चाबी के अनलॉक किया जा सकता है और केवल एक पुश बटन से कार ही को स्टार्ट किया जा सकता है। आजकल आने वाली ज्यादातर कारों में रिमोट लॉकिंग फीचर मिलता है और बटन दबा कर कार को लॉक-अनलॉक किया जा सकता है। लेकिन कीलेस पुश बटन स्टार्ट अगर आपको स्टैंडर्ड मिलता है, तब तो ठीक है, लेकिन एक्स्ट्रा खर्च करके यह फीचर वाली कार लेना कतई फायदे का सौदा नहीं है।

ऑटोमैटिक हेडलैंप्स

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कार कंपनियां आजकल ऑटोमैटिक हेडलैंप्स को लग्जरी फीचर बता कर इसकी मार्केटिंग करती हैं। वहीं कुछ ग्राहक झांसे फंस कर यह फीचर वाली कार खरीद भी लेते हैं। लेकिन समझदारी के चश्मे से देखा जाये तो यह कतई अक्लमंदी का सौदा नहीं है। आप मैनुअली भी कार की लाइट स्विच ऑन और स्विच ऑफ कर सकते हो। वहीं अगर कार में यह फीचर आपको स्टैंडर्ड मिलता है, तो बेहतर है, लेकिन इस फीचर के लिए अलग से खर्च कर ऊंचे वेरियंट पर जाना समझदारी नहीं है।

सनरूफ 

\"\"एक समय था जब शेवरले ने अपनी ऑप्ट्रा कार में यह फीचर दिया था। जिसके बाद कई कार कंपनियों ने इस फीचर को देना शुरू कर दिया। वहीं अब कंपनियों ने मिड-लेवल हैचबैक्स और सस्ती कारों में भी यह फीचर दे रही हैं। भारत जैसे गर्म और नमी वाले देश में सनरूफ पर खर्च करना समझदारी नहीं है। जिन लोगों के पास सनरूफ वाली कारें हैं, खुद उनका अनुभव है कि इससे कार में धूल आ जाती है, वहीं शुरुआत में ओपन रूफ के साथ चलना लुभावना लगता है लेकिन बाद में इससे तौबा कर ली।

बेज इंटीरियर\"\"

आजकल बेज इंटीरियर तमाम कारों में मिलता है। कार कंपनियां इस फीचर को प्रमुखता से हाईलाइट करके बेचती हैं। वहीं बेज इंटीरियर होने से कार सबसे ज्यादा गंदी होती है। कार के इंटीरियर में गहरे रंग हमेशा अच्छे होते हैं और उनमें दाग-धब्बे भी नहीं दिखाई देते। बेज रंग को मैनटेन करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और उनकी रोज ही साफ-सफाई ड्राइक्लीनिंग वगैरहा करनी पड़ती है।

टच सेंसिटिव एसी कंट्रोल

यह फीचर है जिसे कार कंपनियां गाड़ियां बेचते समय लग्जरी फीचर के नाम से प्रचारित करती हैं। वहीं ड्राइविंग के दौरान हमारा मेन फोकस ड्राइविंग होता है, लेकिन यह फीचर कई बार हादसे भी करवा सकता है। एसी की स्पीड को नोब के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है और ड्राइविंग के दौरान ये करना आसान होता है, यहां तक कि बिना देखे भी नोब को एडजस्ट किया जा सकता है। लेकिन टच सेंसिटिव बटन को दबाने के लिए फोकस करना पड़ता है।

प्रोक्सीमिटी सेंसर्स

अकसर महंगी कारों में ये फीचर मिलता है। लेकिन कई कार कंपनियां प्रीमियम बी हैचबैक और सी सेगमेंट की सेडान कारों में यह फीचर देने लगी हैं। इस फीचर के तहत जैसे ही कोई भी कार  या व्यक्ति कार के नजदीक आएगा, साउंड अलार्म बजने लगेगा। वहीं भारत की भीडभाड़ वाली सड़कों पर ट्रैफिक की स्थिति पहले ही खऱाब है, ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अलार्म कितनी बार बजेगा।

एंबियंट लाइट

कंपनियां कारों में एंबियंट लाइट का फीचर दे रही हैं। हालांकि इससे केबिन थोड़ा सुंदर लगता है।  वहीं किसी को इंप्रेस करने के लिए इस फीचर को ऑन किया जा सकता है। लेकिन इस पीचर के लिए अलग से खर्च करना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। वहीं इस फीचर से कई तरह की लाइट्स आने से ड्राइविंग के दौरान आपका ध्यान भटक सकता है।

फॉक्स रूफ रेल्स\"\"

आजकल सभी कॉम्पैक्ट, मिनी एसयूवी, क्रॉसओवर और हैचबैक्स में रूफ रेल्स को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जाता है। कुछ लोग अपनी गाड़ियों को स्पोर्टी लुक देने के लिए आफ्टर मार्केट इन एसेसरीज को इँस्टॉल भी कराते हैं। वहीं इस फीचर वाली गाड़ी को लेने के लिए अच्छी खासी जेब ढीली करनी पड़ती है। वहीं अगर आप अपनी कार की छत पर एक्स्ट्रा लोड यानी समान वगैरहा रखते हैं, तो इसकी बजाय मेटल कैरियर सको लगा सकते हैं, या फिर रूफ बॉक्स भी लगा सकते हैं।

वॉयस कमांड्स

कंपनियां अपनी गाड़ियों में वॉयस कमांड का फीचर दे रही है। सुनने में यह बड़ा रोमांचक लग सकता है, लेकिन भारत के लिहाज से यह ज्यादा प्रभावी नहीं है। इसकी वजह है कि इनकी कोडिंग विदेश में बोली जाने वाली अंग्रेजी के हिसाब से की जाती है और भारतीयों को उच्चारण थोड़ा अलग होता है और इसे समझने में काफी दिक्कत होती है। वैसे भी इस फीचर की वजह से ड्राइविंग में भी बाधा आती है।

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पहले ये फीचर केवल महंगी गाड़ियों में ही मिलता था, वहीं अब कार कंपनियां सस्ती सेडान और हैचबैक में भी ऑफर कर रही हैं। इस फीचर की खासियत यह है कि जैसे ही सेंसर पर पानी पड़ेगा, वाइपर्स ऑटोमैटिकली शुरू हो जाएंगे। सुनने में यह बेहद अच्छा लगता है, लेकिन हल्का सा पानी पड़ते ही बिना जरूरत के चालू हो जाएंगे, साथ ही ब्लेड भी जल्दी घिसेंगे। बेहतर है मैनुअली वाइपर को ऑन करके अपनी जरूरत के मुताबिक ऑन-ऑफ किया जा सकता है।

 

 

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