जो बेवजह उद्योगपतियों को परेशान करने व मुद्दों को निपटाने में आगे आ सके।
उद्योगपतियों का कहना है कि अगर उनके परिसर में कोई घटना होती है तो वे इसके लिए जिम्मेदार हैं लेकिन बाहर होने वाली घटनाओं के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है और मौताणा मांगा जाता है। इन कामों में कुछ समाजकंटक भी जुड़ जाते हैं जिससे माहौल बिगड़ जाता है।     

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उद्योगपतियों का कहना है कि अगर उनके परिसर में कोई घटना होती है तो वे इसके लिए जिम्मेदार हैं लेकिन बाहर होने वाली घटनाओं के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है और मौताणा मांगा जाता है। इन कामों में कुछ समाजकंटक भी जुड़ जाते हैं जिससे माहौल बिगड़ जाता है।     

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विवादों को निपटाने के लिए उद्योगपतियों को चाहिए मजबूत संगठन

विवादों को निपटाने के लिए उद्योगपतियों को चाहिए मजबूत संगठन

  2020-02-07 01:03 pm

भीलवाड़ा (हलचल)। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में भी उद्योगपतियों की समस्याओं और विवादों के निष्पादन के लिए सूरत की तर्ज पर एक संगठन की जरूरत है। यहां आएदिन होने वाली घटनाओं के बाद मौताणे को लेकर धरना प्रदर्शन होता है और इस दौरान उद्योगपतियों को जलालत भी सहनी पड़ती है।
भीलवाड़ा में कपड़े से जुड़ीं करीब 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। इनकी एसोसिएशन तो है लेकिन सभी इकाइयां न तो इनसे जुड़ी हुई है और न ही इनमें एकजुटता है। ऐसे में छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर आएदिन विवाद होते रहते हैं और मामले तब गंभीर हो जाते हैं जब औद्योगिक इकाइयों से जुड़ा होने के बावजूद शव रखकर मौताणे की मांग की जाती है। हादसा कहीं और होने पर मौताणा औद्योगिक इकाइयों को चुकाना पड़ता है। इस दौरान होने वाले धरना-प्रदर्शनों से उद्योगपतियों के साथ ही उद्योगों की छवि भी खराब होती है।
भीलवाड़ा में एसोसिएशन के नाम पर कई संगठन काम कर रहे हैं लेकिन वे इस तरह के मामलों में कम ही पड़ते हैं जबकि सूरत जैसे शहर में जो संगठन बना हुआ है वह हर काम में उद्योगपतियों व आम लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है। उद्योगपतियों की धोखाधड़ी हो या उनकी मदद में वह भागीदारी निभाता है। इसके अलावा टैक्स का मामला हो या राहत का, वह अग्रणी नजर आता है लेकिन भीलवाड़ा में जो एसोसिएशन बनी हैं वह उद्योगों के सरकारी तंत्र द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स या सरकार से  छूट दिलाने तक ही सीमित है। 
कपड़ा विविंग और प्रोसेस को लेकर बने एसोसिएशन को मजबूती के साथ उद्योगपतियों की समस्या की आवाज उठाने और उनके निस्तारण करने के लिए आगे आने की जरूरत है और वे इसकी आवश्यकता महसूस भी करते हैं। एक उद्योगपति का कहना था कि सूरत की तरह यहां भी संगठन की जरूरत है जो बेवजह उद्योगपतियों को परेशान करने व मुद्दों को निपटाने में आगे आ सके।
उद्योगपतियों का कहना है कि अगर उनके परिसर में कोई घटना होती है तो वे इसके लिए जिम्मेदार हैं लेकिन बाहर होने वाली घटनाओं के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है और मौताणा मांगा जाता है। इन कामों में कुछ समाजकंटक भी जुड़ जाते हैं जिससे माहौल बिगड़ जाता है।     

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