शिक्षा की दहलीज पर कचरे का ढेर,  आगरिया विधालय के द्वार पर फैली गंदग

शिक्षा की दहलीज पर कचरे का ढेर, आगरिया विधालय के द्वार पर फैली गंदग

Wed 13 Mar 19  6:26 pm

 राजसमंद (राव दिलीप सिंह) जिले के आमेट ब्लाक में आगरीया राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय कि दहलीज व राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय के कोने में  रोड पर फैले कूड़े के ढेरों से फैलती बदबू ने अध्यापकों,विधार्थीयो , राहगीरों का राह पर चलना दुश्वार कर दिया है। वहीं  विधालय कि दहलीज पर एक ओर कूड़े का ढेर तो दूसरी ओर प्रवेश द्वार   फैलती गंदगी ने सुनहरे मार्ग की शोभा को बदहाली में बदल डाला है। वहीं पास ही बालिका विद्यालय से सटे इस कचरे के ठेर से कई बिमारियों को पनपने को मजबुर कर दिया है तो कभी कभी शराबी शराब की बोतलें भी विधालय में फैंक चले जाते हैं । यहां कूड़ा निस्तारण का कोई उपाय नहीं किया गया है। इस क्षेत्र में फैलती गंदगी ने पर्यावरण का भी नाश कर दिया है। विदित हो कि लाख कोशिशों के बाद भी प्लास्टिक कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।स्वयंसेवी व सामाजिक व्यक्तियो  ने कई बार लोगों को जागरूक करते हुए पंचायत को अवगत  करने का प्रयास भी किया, लेकिन कोई खास परिवर्तन देखने में नहीं आया। ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छ भारत  मिशन अभियान का भी असर   विशेष रूप से नजर नहीं दिखा  । जानकारी के बावजूद इसका सुधार  नहीं हुआ। आज स्थिति विस्फोटक बनती जा रही है। विधालय कि दहलीज  गंदगी की चपेट में आती जा रही है और सफाई के पहरुए यह सब तमाशा देख रहे हैं। बहरहाल इस पर शीघ्र  सफाई सुचारू होनी चाहिए ।जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जा रही है, ग्राम पंचायत का विस्तार  होता जा रहा है वैसे-वैसे बीमारियों का संक्रमण भी फैलने का पुरा अनुमान है । जिन बीमारियों का छोटे शहरों, कस्बों और गाँव में कोई नाम भी नहीं जानता था वह अब आम हो गई हैं। स्पष्ट है जहाँ बीमारी आई वहाँ इलाज की व्यवस्था भी होगी, इसी कारण अगरिया  के सभी छोटे-बड़े वार्डो में    मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसी के साथ पंचायत  से निकलने वाले हर तरह के कचरे के निस्तारण की समस्या भी आवश्यक हो गई है।पहले आबादी कम होने, पंचायत के बाहर कूड़ा-कचरा इकट्ठा करने की जगह पर्याप्त होने के कारण कचरे की बड़ी समस्या नहीं थी। फिर पहले आज की तरह का होने वाला प्लास्टिक और न सड़ने वाला सामान भी नहीं होता था, जिसके कारण जो कचरा होता वह सब आसानी से सड़ जाता था। प्लास्टिक के सामान के प्रचलन और खतरनाक बीमारियों के फैलने से इस कचरे के खतरों को हजारों गुना बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिये पहले सबसे ज्यादा संक्रमित बीमारियों में स्वाईन फ्लु, टीबी और कोढ़ प्रमुख माना जाता था। जिनके इलाज के लिये पंचायत के बाहर या सामान्य मरीजों से अलग व्यवस्था की जाती थी, परन्तु अब ऐसा नहीं होता है। अब कहीं नहीं सुना जाता है कि संक्रमित बीमारियों के लिये अलग से कोई अस्पताल खुला हो। सभी मरीजों का इलाज सभी अस्पतालों और सभी डॉक्टरों के द्वारा हो रहा है। विशेषज्ञों की बात अलग है। ऐसे में स्थिति विस्फोटक हो जा रहीहै। संक्रमित बीमारियों का खतरा हर गली-मोहल्ले तक पहुँच गया है।अभी तक प्रचार माध्यम के ज़रिए स्वाईन फ्लू  जैसी प्राणघातक बीमारियों की रोकथाम के उपाय प्रचारित किये जा रहे हैं ,परन्तु इस तरह के कचरे के ठेर से गंभीर बिमारी के  खतरों को उभरने में समय नहीं लगता है ।  पिछले कुछ समय से खतरनाक गंभीर मौसमी  बीमारियों के फैलाव के खतरों  को समय रहते नहीं रोका जाता है तो फिर कभी रोकना मुश्किल हो जाता है ।और  इसमें कोई संदेह नहीं, लेकिन उसके मरीज को छूने, साथ बैठने, साथ खाना खाने से संक्रमण  होता है। उसके द्वारा प्रयोग की गई चिकित्सा सामग्री के उपयोग से संक्रमण की  होने की आशंका बनी  रहती है।स्वाईन फ्लु ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसके मरीज को छूने, उसके प्रयोग किये गये हर सामान को छूने, प्रयोग करने से इस जानलेवा बीमारी के लगने और फैलने की आशंका रहती है। इसके मरीज से मिलने वाला छिक ,श्वास , आदि सभी बिमारी फैलने कि  पूरी तरह संभावना रहती है। यह बात किसी से छिपी हुई नहीं । जिससे जिगर का संक्रमण होता है और जिसके मरीज के कभी ठीक होने की संभावना नहीं रहती, आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा बनने जा रहा है। इसलिये इस बीमारी को एड्स से 100 गुना ज्यादा  खतरनाक बीमारी स्वाईन फ्लु का बना हुआ  है। अस्पताल में इस खतरे से निपटने में असमर्थ हैं। इसलिये यह खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इस खतरे से निपटने व इसे दूर करने के उपाय हैं, लेकिन लापरवाही की स्थाई संस्कृति के पनपने से इस खतरे को दूर करने या निपटने का स्थाई समाधान खोजना कठिन हो रहा है। इस विषय में प्रशासनिक उदासीनता के कारण देश की अदालतें सक्रिय हुई हैं, लेकिन उनकी सक्रियता अभी राजधानियों और बड़े शहरों तक ही सीमित है। छोटे शहरों में उनके निर्देश अभी तक नहीं पहुँचे हैं।