शिशु को नहीं पिलाना पड़ेगा ऊपर का दूध, माताओं का दिल खुश कर देगी ये नई विधि

शिशु को नहीं पिलाना पड़ेगा ऊपर का दूध, माताओं का दिल खुश कर देगी ये नई विधि

Mon 20 May 19  4:14 pm


माताओं को दूध न उतरने की दिक्कत के कारण अपने बच्चों को ऊपरी दूध पिलाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कालेज के स्त्री रोग विभाग ने ऐसी विधि विकसित की है, जिससे प्रसव के फौरन बाद जच्चे के लिए दूध पैदा करने वाला प्रोलैक्टिन हारमोंस का चक्र सक्रिय हो जाएगा। इससे बच्चे के पैदा होते ही अमृत कहा जाने वाला मां का पहला दूध मिल जाएगा। इस विधि को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किए जाने की योजना बनाई जा रही है।हर दूसरी प्रसूता को दूध न उतरने की शिकायत होती है, इससे शिशु को मजबूरन ऊपर का दूध पिलाना पड़ता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्रोलैक्टिन हारमोंस बनने का साइकिल सुधरने से मां का दूध उतरने लगता है। इससे प्रसूता की सेहत सुधरती है, साथ ही शिशु को मां का दूध मिलने से उसकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, इससे डायरिया, पीलिया और दूसरे रोगों का खतरा कम हो जाता है। स्त्री रोग विभाग ने छह सौ प्रसूताओं पर यह प्रयोग किया है।

यह प्रयोग सफल होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इस शोध कार्य को प्रस्तुत किया गया है। इस विधि के लागू होने से सरकारों के बच्चे को मां के दूध पिलाने संबंध में अभियानों को और बल मिलेगा। डाक्टरों का कहना है कि इस वक्त सबसे बड़ी समस्या माताओं के दूध न उतरने की है। खासतौर पर  युवतियों के पहली बार मां बनने पर यह दिक्कत अधिक आती है। इससे ऊपरी दूध का चलन बढ़ रहा है। ऊपरी दूध से बच्चों की सेहत दुरुस्त नहीं रहती है। ये बच्चे डायरिया, कुपोषण और एनीमिया का अधिक शिकार होते हैं। 

यह है विधि
जैसे ही बच्चा पैदा होता है, उसे तुरंत मां का दूध पिलाया जाता है। इससे प्रोलैक्टिन हारमोंस का रिसाव होने लगता है और इसकी साइकिल बन जाती है। फिर मां के स्तन से दूध के रिसाव की प्रक्रिया जारी रहती है। इस हारमोन की साइकिल बिगड़ने पर मां का दूध उतरने में दिक्कत आती है। कुछ दिन अधिक गुजरने पर यह साइकिल ठप हो जाती है, इसके साथ तुरंत बच्चे को दूध पिलाने पर उसके शरीर के अवयव सक्रिय हो जाते हैं। मां का पहला दूध नवजात के लिए अधिक लाभप्रद है। इससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

ऊपरी दूध
ऊपरी दूध से बच्चे का पेट तो भर जाता है, लेकिन उसे उतने मिनरल्स, प्रोटीन आदि नहीं मिलते जो मां के दूध से मिलते हैं। ऊपरी दूध पीने वाले बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता भी ढंग से विकसित नहीं होती। शोधों के निष्कर्ष के मुताबिक मां का दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में ऊपर का दूध पीने वाले बच्चे अधिक बीमार पड़ते हैं।
प्रसूताओं में दूध न उतरने की आम समस्या है। नई विधि सफल है। डेढ़ महीने में पांच सौ से अधिक प्रसूताओं पर इसे आजमाया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे प्रस्तुत किया गया है। इस संबंध में दूसरी बैठक होने वाली है। प्रोलैक्टिन हारमोंस के रिसाव की स्थिति सुधरती है। जच्चा और बच्चा दोनों को फायदा होता है।

 

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