संपन्नता के साथ प्रसन्नता आवश्यक: महासती शशिकांता

Wed 06 Nov 19  6:12 pm


चित्तौडग़ढ़ (हलचल)। शांत क्रांति संघ की महासती शशिकांता मसा ने बुधवार को अरिहंत भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते कहा कि संपन्नता के साथ प्रसन्नता का होना भी आवश्यक है। आप संपन्न बन गये पर यदि प्रसन्नता आपके चेहरे से गायब है तो फिर आप सकारात्मक सोच के साथ उचित निर्णय समय पर लेने की क्षमता भी खो बैठेंगे।

उन्होंने कहा कि कई व्यक्ति संपन्न जरूर हैं पर प्रसन्न नहीं हैं। किन्तु कई व्यक्ति संपन्न नहीं होते हुए भी प्रसन्न रहते हैं। परिवार एवं समाज में मुंह लटकाए अप्रसन्न व्यक्ति कभी आदर के पात्र नहीं होते। अप्रसन्न रहने से तनाव रहता है और सहनशीलता भी कम हो जाती है। प्रसन्न व्यक्ति का चिंतन शुभ और सोच सकारात्मक बन जाती है। अप्रसन्न व्यक्ति को क्रोध भी जल्दी आता है और वह उचित समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता भी गंवा बैठता है।

इससे पूर्व महासती रचनाश्री मसा ने कहा कि मन एकाग्र नहीं है तो भटकते मन से कोई भी काम सफल नहीं होगा। महासती वर्या ने 9 व 10 नवंबर को सामूहिक एकासन व दया करने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र कुमार खेरोदिया ने किया।

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