भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है. देश में हर साल डेढ़ करोड़ टन तक खाद्य तेलों का आयात किया जाता है. इस आयात में सबसे ज्यादा मात्र पॉम तेल की होती है. इंडोनेशिया और मलेशिया से सबसे ज्यादा 90 लाख टन पॉम तेल का आयात किया जाता है, जबकि शेष 60 लाख टन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है.

 

घरेलू खाद्य तेल उद्योग ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराया है. उद्योग का कहना है कि इससे उनकी रिफाइंड क्षमता का इस्तेमाल बढ़ेगा. इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. सरकार के इस निर्णय को मलेशिया की ओर से भारत में नये नागरिकता कानून और कश्मीर मुद्दे को लेकर की गयी टिप्पणी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने 20 दिसंबर 2019 को कथित तौर पर कहा था कि मुझे यह कहते हुए खेद है कि भारत जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने का दावा करता है, अब वह कुछ मुसलमानों को उनकी नागरिकता से बेदखल करने की कारवाई कर रहा है. उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा हम यहां करने लगें, तो आप जानते हैं कि क्या होगा. हर तरफ अफरा-तफरी मच जायेगी, अस्थिरता बढ़ जायेगी और हर किसी को परेशानी होगी.

महाथिर ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि भारत ने कश्मीर पर कब्जा कर रखा है. सूत्रों के अनुसार, देश में होने वाले खाद्य तेल आयात में 30 फीसदी पाम तेल का आयात मलेशिया से जबकि 70 फीसदी का आयात इंडोनेशिया से होता है. सूत्रों का कहना है कि हमारी तेल रिफाइनरियां इंडोनेशिया से कच्चे पॉम तेल का आयात कर सकतीं हैं. इंडोनेशिया में मलेशिया से कहीं अधिक पॉम तेल का उत्पादन होता है. सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया से तेल आयात में किसी तरह का अतिरिक्त खर्च नहीं पड़ेगा, क्योंकि दाम और उत्पाद समान है.

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भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है. देश में हर साल डेढ़ करोड़ टन तक खाद्य तेलों का आयात किया जाता है. इस आयात में सबसे ज्यादा मात्र पॉम तेल की होती है. इंडोनेशिया और मलेशिया से सबसे ज्यादा 90 लाख टन पॉम तेल का आयात किया जाता है, जबकि शेष 60 लाख टन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है.

 

घरेलू खाद्य तेल उद्योग ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराया है. उद्योग का कहना है कि इससे उनकी रिफाइंड क्षमता का इस्तेमाल बढ़ेगा. इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. सरकार के इस निर्णय को मलेशिया की ओर से भारत में नये नागरिकता कानून और कश्मीर मुद्दे को लेकर की गयी टिप्पणी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने 20 दिसंबर 2019 को कथित तौर पर कहा था कि मुझे यह कहते हुए खेद है कि भारत जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने का दावा करता है, अब वह कुछ मुसलमानों को उनकी नागरिकता से बेदखल करने की कारवाई कर रहा है. उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा हम यहां करने लगें, तो आप जानते हैं कि क्या होगा. हर तरफ अफरा-तफरी मच जायेगी, अस्थिरता बढ़ जायेगी और हर किसी को परेशानी होगी.

महाथिर ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि भारत ने कश्मीर पर कब्जा कर रखा है. सूत्रों के अनुसार, देश में होने वाले खाद्य तेल आयात में 30 फीसदी पाम तेल का आयात मलेशिया से जबकि 70 फीसदी का आयात इंडोनेशिया से होता है. सूत्रों का कहना है कि हमारी तेल रिफाइनरियां इंडोनेशिया से कच्चे पॉम तेल का आयात कर सकतीं हैं. इंडोनेशिया में मलेशिया से कहीं अधिक पॉम तेल का उत्पादन होता है. सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया से तेल आयात में किसी तरह का अतिरिक्त खर्च नहीं पड़ेगा, क्योंकि दाम और उत्पाद समान है.

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सरकार ने रिफाइंड पॉम तेल के इंपोर्ट पर लगायी रोक, अब लेनी होगी इजाजत

सरकार ने रिफाइंड पॉम तेल के इंपोर्ट पर लगायी रोक, अब लेनी होगी इजाजत

  2020-01-08 08:34 pm


नयी दिल्ली : सरकार ने नीतिगत बदलाव के तहत बुधवार को विदेशों से रिफाइंड पॉम तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिये हैं. सरकार के इस कदम से मलेशिया सहित विभिन्न देशों से रिफाइंड पॉम तेल के आयात में कमी आ सकती है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की यहां जारी अधिसूचना के मुताबिक रिफाइंड ब्लीच्ड डिओडोराइज्ड पॉम तेल और रिफाइंड ब्लीच्ड डिओडोराइज्ड पामोलिन तेल के मामले में आयात नीति में संशोधन किया गया है.

संशोधन में इन तेलों के आयात को मुक्त श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है. रिफाइंड पाम तेल के आयात को मुक्त आयात श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में रखने का मतलब यह हुआ कि इन तेलों के आयात के लिए अब आयातकों को सरकार से अनुमति लेनी होगी अथवा इसके लिए लाइसेंस लेना होगा.

 

भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है. देश में हर साल डेढ़ करोड़ टन तक खाद्य तेलों का आयात किया जाता है. इस आयात में सबसे ज्यादा मात्र पॉम तेल की होती है. इंडोनेशिया और मलेशिया से सबसे ज्यादा 90 लाख टन पॉम तेल का आयात किया जाता है, जबकि शेष 60 लाख टन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है.

 

घरेलू खाद्य तेल उद्योग ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराया है. उद्योग का कहना है कि इससे उनकी रिफाइंड क्षमता का इस्तेमाल बढ़ेगा. इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. सरकार के इस निर्णय को मलेशिया की ओर से भारत में नये नागरिकता कानून और कश्मीर मुद्दे को लेकर की गयी टिप्पणी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने 20 दिसंबर 2019 को कथित तौर पर कहा था कि मुझे यह कहते हुए खेद है कि भारत जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने का दावा करता है, अब वह कुछ मुसलमानों को उनकी नागरिकता से बेदखल करने की कारवाई कर रहा है. उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा हम यहां करने लगें, तो आप जानते हैं कि क्या होगा. हर तरफ अफरा-तफरी मच जायेगी, अस्थिरता बढ़ जायेगी और हर किसी को परेशानी होगी.

महाथिर ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि भारत ने कश्मीर पर कब्जा कर रखा है. सूत्रों के अनुसार, देश में होने वाले खाद्य तेल आयात में 30 फीसदी पाम तेल का आयात मलेशिया से जबकि 70 फीसदी का आयात इंडोनेशिया से होता है. सूत्रों का कहना है कि हमारी तेल रिफाइनरियां इंडोनेशिया से कच्चे पॉम तेल का आयात कर सकतीं हैं. इंडोनेशिया में मलेशिया से कहीं अधिक पॉम तेल का उत्पादन होता है. सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया से तेल आयात में किसी तरह का अतिरिक्त खर्च नहीं पड़ेगा, क्योंकि दाम और उत्पाद समान है.

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