हम बदलेंगे, युग बदलेगा--प्रियदर्शन मुनिजी

Tue 28 May 19  3:35 pm


चित्तौड़गढ़ (हलचल) ।प्राज्ञ संघ के प्रियदर्शन मुनिजी म.सा. ने मंगलवार को अरिहन्त भवन में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम हमेशा सामने वाले को क्या करना चाहिये, वह क्या कर रहा है, इस पर अपनी शक्ति को फिजूल खर्च कर देते हैं। किन्तु यह नहीं सोचते कि मुझे क्या करना चाहिये और क्या कर रहा हूं। बत्तीस आगमों में जीवन जीने की कला का विस्तृत विवरण है और वीतराग प्रभु ने हमें जीवन पथ पर चलते हुए सम्यक् मार्ग पर कैसे बढ़ें, इसका विस्तृत मार्गदर्शन कराया गया है। किन्तु हम हमेशा दूसरे को बदलने के लिये प्रयास करते हैं। किन्तु स्वयं बदलना नहीं चाहते। हम बदलेंगे, युग बदलेगा यह सुन्दर सूत्र जीवन में अंगीकार करो और सामने वाले को बदलने के बजाय स्वयं बदलने का साहस करो, सारे झगड़े समाप्त हो जाएगें।

आपने कहा कि अधिकांश लोगों का परिश्रम दूसरों को बदलने में लग रहा है और स्वयं सुधर नहीं पाते। यहां तक कि कौन साधु क्या कर रहा है, क्या करना चाहिये, इसकी फिजूल चर्चा करते हैं और स्वयं को देखने का प्रयास नहीं करते। दुनिया सुधर गई और मैं नहीं सुधरा तो कोई फायदा नहीं है और मैं सुधर गया दुनिया नहीं सुधरी तो कोई नुकसान नहीं है। अधिक बोलने वाले के बारे में आपने कहा कि जो व्यक्ति जितना अधिक बोलता है उसमें उतना ही अधिक असत्य व अमर्यादा रहती है। इसलिये कम बोलने का प्रयास करो। पायल में आवाज आती है तो उसे पैरों में बांधा जाता है और हार कोई आवाज नहीं करता तो उसे गले का आभूषण बनाया जाता है। कोई भी स्त्री बोलने वाली पायल को गले का हार नहीं बनाती। कुछ आदमी ऐसे भी हैं जो कम बोलते हैं और जब भी बोलते हैं, अप्रिय भाटा पटक बोलते हैं। यह भी स्थिति उचित नहीं है। जब भी बोलो, मर्यादित और दूसरों को प्रिय लगे, ऐसा बोलो। इससे पूर्व विरागदर्शन जी म.सा. ने भी मीठे बोलने पर विस्तृत विवेचन किया और बताया कि मृदुभाषी सब जगह लोकप्रियता प्राप्त करता है। प्रियदर्शन मुनिजी म.सा. ने बुधवार को प्रातः प्रस्थान कर शम्भुपुरा पहुंचने के भाव प्रकट किये। कार्यक्रम का संचालन मंत्री विमलकुमार कोठारी ने किया।

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