केवल 48 दिन कर सकेंगे दर्शन
भगवान अति वरदार बुधवार (तीन जुलाई 2019) को जल समाधि से बाहर निकले हैं। अगले 48 दिनों तक भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। 19 अगस्त को भक्तों को अंतिम दर्शन देने के बाद भगवान अति वरदार 20 अगस्त को दोबारा मंदिर के पवित्र तालाब में जल समाधि ले लेंगे। इसके बाद इनके दर्शनों के लिए फिर 40 साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में मान्यता है कि बहुत किश्मत वाले लोग ही इनके दर्शन कर पाते हैं। यही वजह है कि भगवान अति वरदार के दर्शनों के लिए विदेशों से भी लोग खिंचे चले आते हैं।

150 व्हील चेयर और 10 बैट्री कार की व्यवस्था
श्रद्धालुओं को भगवान अति वरदान के दर्शन में किसी तरह की दिक्कत न हो इसलिए प्रशासन की तरफ से यहां 150 व्हील चेयर और 10 बैट्री कार की व्यवस्था की गई है। भगवान के दर्शन के लिए यहां लोगों को पास जारी किए जा रहे हैं। यहां मुफ्त दर्शन के अलावा 50 से 500 रुपये तक के दर्शन टोकन भी जारी किए जा रहे हैं। इसके तहत लोगों को दर्शन की अलग-अलग सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। 500 रुपये का सबसे महंगा टोकन वीआईपी दर्शन के लिए है। इसके अलावा मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो बैगेज स्कैनर लगाए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा के लिए कुल 2600 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

 

भगवान की जल समाधि की हैं कई कहानियां

भगवान अति वरदार मंदिर के पवित्र तालाब में 40 साल लंबी जल समाधि क्यों लेते हैं और दर्शन देने के लिए 48 दिन तक ही बाहर क्यों निकलते हैं, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। हालांकि, इसे लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी ये है कि वर्षों पहले मंदिर के एक पुजारी को भगवान ने नींद में दर्शन दिए और उनसे कहा कि उन्हें पानी में डाल दिया जाए। दूसरी कहानी ये है कि इस मूर्ति को उस वक्त बनाया गया था, जब मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मूर्ति को पानी में डाल दिया गया था। भगवान अति वरदार की मुर्ति अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है।

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40 साल में एक बार जल समाधि से निकलते हैं भगवान अति वरदार, दर्शन के लिए हैं 48 दिन

40 साल में एक बार जल समाधि से निकलते हैं भगवान अति वरदार, दर्शन के लिए हैं 48 दिन

Wed 03 Jul 19  6:31 pm


 भारत में जितनी विविधता है, उनते ही मान्यताएं और रीति-रिवाज भी। यहां के मंदिरों और धार्मिक स्थल से जुड़ी भी कई तरह चौंकाने वाली कहानियां हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थिति है। इस मंदिर का नाम है भगवान वरदराजा स्वामी मंदिर। यहां भगवान अती वरदार की मूर्ति भक्तों को दर्शन देने के लिए 40 साल में एक बार कुछ दिनों के लिए जल समाधि से बाहर निकलती है। आज, (बुधवार, तीन जुलाई 2019) इस मूर्ति को मंदिर के पवित्र तालाब से बाहर निकाला गया है। इसी के साथ तमिलनाडु का प्रसिद्ध कांची अती वरदान महोत्सव शुरु हो गया है।\

 

केवल 48 दिन कर सकेंगे दर्शन
भगवान अति वरदार बुधवार (तीन जुलाई 2019) को जल समाधि से बाहर निकले हैं। अगले 48 दिनों तक भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। 19 अगस्त को भक्तों को अंतिम दर्शन देने के बाद भगवान अति वरदार 20 अगस्त को दोबारा मंदिर के पवित्र तालाब में जल समाधि ले लेंगे। इसके बाद इनके दर्शनों के लिए फिर 40 साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में मान्यता है कि बहुत किश्मत वाले लोग ही इनके दर्शन कर पाते हैं। यही वजह है कि भगवान अति वरदार के दर्शनों के लिए विदेशों से भी लोग खिंचे चले आते हैं।

150 व्हील चेयर और 10 बैट्री कार की व्यवस्था
श्रद्धालुओं को भगवान अति वरदान के दर्शन में किसी तरह की दिक्कत न हो इसलिए प्रशासन की तरफ से यहां 150 व्हील चेयर और 10 बैट्री कार की व्यवस्था की गई है। भगवान के दर्शन के लिए यहां लोगों को पास जारी किए जा रहे हैं। यहां मुफ्त दर्शन के अलावा 50 से 500 रुपये तक के दर्शन टोकन भी जारी किए जा रहे हैं। इसके तहत लोगों को दर्शन की अलग-अलग सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। 500 रुपये का सबसे महंगा टोकन वीआईपी दर्शन के लिए है। इसके अलावा मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो बैगेज स्कैनर लगाए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा के लिए कुल 2600 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

 

भगवान की जल समाधि की हैं कई कहानियां

भगवान अति वरदार मंदिर के पवित्र तालाब में 40 साल लंबी जल समाधि क्यों लेते हैं और दर्शन देने के लिए 48 दिन तक ही बाहर क्यों निकलते हैं, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। हालांकि, इसे लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी ये है कि वर्षों पहले मंदिर के एक पुजारी को भगवान ने नींद में दर्शन दिए और उनसे कहा कि उन्हें पानी में डाल दिया जाए। दूसरी कहानी ये है कि इस मूर्ति को उस वक्त बनाया गया था, जब मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मूर्ति को पानी में डाल दिया गया था। भगवान अति वरदार की मुर्ति अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है।

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