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बात मन की- निलेश कांठेड़  जीने के लिए सोचा ही नहीं दर्द संभालने होंगे

बात मन की- निलेश कांठेड़  जीने के लिए सोचा ही नहीं दर्द संभालने होंगे

कोरोना से उबरने लगे है पर जीवन का दर्द खत्म नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा जीने के लिए मुस्कराहट की चादर ओढ़ इन दर्द को भी संभालना होगा। दर्द शारीरिक के साथ मानसिक भी है। स्वस्थ होने पर भी अपने ही दूरी बनाते लगते है। कहीं भी ये मालूम चले कि इनको कोरोना हो चुका तो सामने वाले के चेहरे के हावभाव ही मन का दर्द बढ़ा देते है। *कोरोना से जितना डर नहीं लगता उससे अधिक तो उन मानवीय चेहरों से लगता है जो चेहरा तो मानव का ओढ़े हुए है पर उनका व्यवहार उन पशुओं से भी बदतर है* जो अंतिम पल तक भी साथ नहीं छोड़ते है। निसंदेह कोरोना संक्रमितों से दूरी बनानी चाहिए और सावधानी भी रखनी चाहिए लेकन व्यवहार वैसा ही करना चाहिए जैसा स्वयं के कल पीड़ित हो जाने पर हम दूसरों से उम्मीद करेंगे। *संकटकाल में परखा जाने वाला हमारा व्यवहार और चरित्र ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है* जिसे एक बार खो दिया तो वापस नहीं पा सकेंगे।
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 *कोरोना के बादल छुपे है अस्त नहीं हुए* 
पॉजीटिव होने के बाद नेगेटिव रिपोर्ट आते ही या आठ-दस दिन बीतते ही कोरोना विजयी का खिताब लेकर घूमने वाले यौ़द्धाओं को समझ जाना चाहिए कि युद्ध अभी जारी है। *दुश्मन के कमजोर या मैदान छोड़ कर चले जाना समझने की गलती करने वालों को जयद्रथ वध हमेशा याद रखना चाहिए।* सूर्य कुछ पल के लिए बादलों में छिपा अवश्य था पर अस्त नहीं हुआ था। छुपने को अस्त होने की गलती अर्जुन के तीर से जान देकर गंवानी पड़ी। यहां *वेक्सिन नहीं आने तक कोरोना के गिरते आंकड़ो को हम फिलहाल उसका छुप जाना ही माने* । अस्त मान कर भीड़ में ठहाके लगाए या चेहरों से नकाब हटाया तो फिर बादल छंटते ही क्या कीमत हमे चुकानी पड़ेगी ये महाभारत जैसे ग्रंथों या उन कुछ देशों या केरल, दिल्ली जैसे राज्यों से सीख ले जहां फिर लॉकडाउन के हालात है। कोरोना जैसा दुश्मन एक कदम पीछे हटता है तो दुगनी ताकत से वार भी कर सकता ये समझ *युद्वविराम होने तक जागरूकता की मिसाईलों की गति कम नहीं होने दे* ।
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 *दुश्मन का दुश्मन दोस्त* 
महान दार्शनिक चाणक्य जिन्हें कूटनीति के जन्मदाता भी कहे सकते, *उन्होंने सदियों पहले ही कह दिया था दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है* । अब भारत कुछ देशों की नाराजगी की परवाह किए बिना फ्रांस में हुए आंतकी हमलों की निंदा कर रहा है तो यहीं कूटनीति काम कर रही है। फ्रांस इस समय खुलकर तुर्की, पाकिस्तान जैसे उन देशों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है जो भारत से खुली शत्रुता की नीति पर चल रहे है। ऐसे में भारत को भी तुर्की जैसे देशों के खिलाफ बोलने का मौका चाहिए था जो फ्रांस में कार्टून निर्माण की बात पर एक आतंकी द्वारा शिक्षक की हत्या ने दे दिया। अब निंदा से बिलबिलाने *चीन, पाकिस्तान, तुर्की आदि देशों को समझ जाना चाहिए कि चाणक्य नीति फिर रंग में आ रही है।*
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