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टेलीविजन बना, हर घर की जरूरत 

टेलीविजन बना, हर घर की जरूरत 

 

राजसमन्द (राव दिलीप सिंह)

              आरंभ में अपनी सहज प्रस्तुतीकरण के चलते, जिस तरह टेलीविजन को हम बुद्धू बॉक्स की संज्ञा देते रहे हैं, समय के साथ-साथ यह सूचना क्रांति एवं हर घर की जरूरत का सबसे आवश्यक व महत्वपूर्ण यंत्र साबित हो रहा है ! आज हम अपने घरों में बैठे बैठे दुनिया भर के किसी भी कोने में होने वाली सुखद दुखद, ज्ञानवर्धक, संस्कारवान एवं मनोरंजक जानकारियों को देख सुन पाते हैं ! टेलीविजन का पहला मॉडल 1927 में अमेरिकी वैज्ञानिक जान लागी बेयर्ड ने तैयार किया ! कई असफलताओं के बाद अविष्कार के 7 सालों के अंतराल में टेलीविजन को इलेक्ट्रॉनिक रूप देने की कोशिश चलती रही और आखिरकार साल 1934 में यह यंत्र पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप धारण कर पाया तथा फिर आगामी 2 वर्षों में ही अपने अनेक मॉडल्स के रूप में टेलीविजन का प्रचलन तेजी से बढ़ा, जो अब मनोरंजन और समाचार का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है ! कुछ साल बाद सन 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने टेलीविजन के प्रभाव को आम आदमी में बढ़ता देख, 21 नवंबर 1996 का दिन "विश्व टेलीविजन दिवस" के रूप में मनाने का ऐलान कर दिया ! इस ऐतिहासिक अविष्कार को भारत तक पहुंचने में काफी वक्त लग गया ! 15 सितंबर 1959 तक टेलीविजन के आविष्कार के 32 साल बाद  भारत में कदम रखा ! लेकिन, इसका व्यापक प्रसार 1982 में भारत में आयोजित एशियाड खेलों के आयोजन से हुआ ! शुरुआती दिनों में कई मुश्किलों का सामना करते हुए, पहला टेलीविजन राजधानी दिल्ली में दूरदर्शन केंद्र की स्थापना के शुभ अवसर के साथ किया गया, जो आज अपने अनेक स्वरूपों एवं चैनलों के साथ बाजार तथा हर घर का अंग बन चुका है ! आज टेलीविजन ना केवल नौनिहाल बच्चों के कार्टून गेम्स को प्रसारित कर रहा है बल्कि युवाओं के लिए फिल्में मनोरंजन के साधन सीरियल तथा बड़े बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य वर्धक व आध्यात्मिक प्रस्तुतियों के साथ उपयोगी उपकरण के रूप में प्रत्येक घर आंगन में अपनी जगह बना चुका है !

 

कोरोना काल में शिक्षा का माध्यम बना टेलीविजन.....

 

          वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के समय लगातार जारी लॉकडाउन के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में बाधा ना आ पाए, इसको ध्यान में रखते हुए, शिक्षा विभाग की ओर से ऑनलाइन पढ़ाई के बाद, अब रेडियो एवं टेलीविजन के माध्यम से पढ़ाई की नवाचार अपनाए जा रहे हैं, जिनके अनुकूल परिणाम भी सामने आ रहे हैं ! टेलीविजन पर "शिक्षा दर्शन प्रोग्राम" से सरकारी स्कूल के विद्यार्थी लाखों की संख्या में उत्कृष्ट शिक्षण सामग्री व दक्ष टीचर्स द्वारा प्रतिदिन ज्ञानार्जन कर रहे हैं ! इस हेतु कक्षा 1 से 8 तक शाम 3:00 बजे से 4:15 बजे तक तथा कक्षा 9 से 12वीं तक दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक शिक्षण कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है ! इस प्रकार प्रतिदिन सवा 3 घंटे डीडी राजस्थान चैनल द्वारा सभी विद्यार्थी इस शैक्षणिक कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं, जो टेलीविजन का एक सार्थक व उद्देश्य परख प्रयोग है !

 

सिर चढ़कर बोल रहा है सोशल मीडिया का प्रचलन...

 

                  दुनियाभर में सोशल मीडिया का प्रचलन किस तरह से बढ़ रहा है, इसका अंदाजा, इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या, इसे इस्तेमाल नहीं करने वाले लोगों की संख्या से ज्यादा हो गई है ! डाटा रिपोर्टर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार , देश की 137 करोड़ आबादी में से 102 करोड़ से अधिक लोगों के पास मोबाइल फोन कनेक्शन है ! वहीं 50% आबादी तक इंटरनेट की पहुंच हो चुकी है, जो डिजिटल भारत निर्माण की ओर बढ़ता हुआ कदम माना जाए अथवा सोशल मीडिया की लगी लत समझा जाए ? आज के दौर में सोशल मीडिया , इंसानी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, जिसके द्वारा सूचनाएं प्रदान करना, मनोरंजन करना और ज्ञानवर्धक करने सहित विभिन्न व्यक्तिगत व सार्वजनिक कार्य आसानी व द्रुतगति से  संपन्न किए जा रहे हैं ! जहां संपूर्ण  विश्व वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के अंदेशे के बीच जी रही है और वायरस के संसर्ग से इंसानी दुनिया को बचाने की हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं ! वही पिछले पांच-छह महीनों के कोरोना काल में , सोशल मीडिया के यूजर्स की संख्या व प्रयोग का समय बढ़ गया है ! यंत्रवत हो चुके इंसान में, अब सोशल मीडिया पर निर्भरता व व्यस्तता आवश्यकता से ज्यादा ही देखी जा रही है !

 

सोशल मीडिया का अपना, वर्चुअल वर्ल्ड....

 

                 सोशल मीडिया ऐसा मीडिया है, जो बाकी सारे मीडिया जैसे- प्रिंट मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अन्य समानांतर मीडिया से अलग है ! सोशल मीडिया, इंटरनेट के माध्यम से अपना एक वर्चुअल वर्ल्ड बनाता है, जिसे उपयोग करने वाला व्यक्ति किसी प्लेटफार्म जैसे- फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, आदि का उपयोग कर, बाहरी संपूर्ण दुनिया तक अपनी पहुंच बना सकता है ! सोशल मीडिया, एक विशाल नेटवर्क है जो कि सारी दुनिया को आपस में जोड़े रखने की क्षमता रखता है ! व्यक्तिगत तथा अपने किसी उत्पाद या उपलब्धियों को लोकप्रिय कर, उसका प्रचार- प्रसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा द्रुतगति से किया जा सकता है ! समय-समय पर सोशल मीडिया द्वारा राजनीतिक पार्टियां, अपना जमकर प्रचार करती रहती हैं तथा निर्भया जैसी घटनाओं में न्याय दिलाने में अपनी भूमिका सोशल मीडिया निभाता है ! भ्रष्टाचार के खिलाफ महाअभियान, जन आंदोलन को सोशल मीडिया ने प्रभावी प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया है ! सोशल मीडिया व्यक्ति, संस्था, समूह और देश को आर्थिक, सामाजिक , सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध करने में भी सकारात्मक भूमिका निभाता है !

 

कोरोना काल में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या में हुई , बढ़ोतरी

 

            ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की आबादी 7.79 अरब, में से 3.96 अरब सोशल मीडिया यूजर्स है , यानी कुल आबादी के 51% लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स व उपकरणों पर निर्भर हो चुके हैं ! पिछले 1 साल में हर दिन 10 लाख से ज्यादा लोग सोशल मीडिया पर जुड़े हैं अर्थात हर सेकेंड 12 यूजर्स की संख्या बढ़ी है ! कोरोना काल में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों का समय भी बड़ा है ! लॉकडाउन में सोशल मीडिया पर 59% वक़्त भारतीय ज्यादा खर्च कर रहे हैं ! हर भारतीय, सोशल मीडिया पर रोज औसतन 2 से ढाई घंटे बिता रहा है ! पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा समय सोशल मीडिया को देख रही हैं, जिसमें विशेष रूप से युवा पीढ़ी ज्यादा रुचि ले रही है !

 

सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल, खतरनाक....

 

                      सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इतना मशहूर होने के बावजूद भी खतरनाक है ! हमारी जिंदगी में सोशल मीडिया का बढ़ता दखल , हमारी मेंटल हेल्थ व सोशियल हेल्थ के लिए ठीक नहीं है ! सोशल मीडिया के प्रयोग के आदी हो चुके आमजन के लिए, यह किसी भी हानिकारक नशे से कम नहीं है ! इसके एडिक्ट या व्यसन से ग्रसित होने से, इंसान में असंयमित होने, गुस्सैल प्रवृत्ति, अंधापन, बहरापन, निद्रा, डिप्रेशन, टेंशन, शक करना , जैसी मानसिक व सामाजिक कमजोरियां व विकृतियां आ जाती है ! विशेष रुप से बालमन पर सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव ज्यादा देखा गया है , जिसके चलते नौनिहालों का बचपन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व उपकरणों जैसे- मोबाइल, लैपटॉप,  आईपैड , टीवी , वीडियो गेम, आदि के इस्तेमाल  तक ही सीमित होता जा रहा है और बाहरी दुनिया के प्रत्यक्ष अनुभव से ,उनकी दूरी बनती जा रही है, जो नौनिहालों के सर्वांगीण विकास में बाध्यकारी है !

 

सोशल मीडिया, साइबर अपराध की जननी....

 

                    सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन से सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ी हुई है, क्योंकि सोशल मीडिया द्वारा फेक न्यूज़, अश्लील वीडियोस, सट्टा बाजार का प्रचलन, धमकियां, अफवाह , शेयर बाजार की उठापटक, धोखाधड़ी, इंटरनेट यूजर्स का डाटा चोरी करना, लोगों के बैंक खातों से धन चोरी, जैसे आपराधिक कार्य तेजी से फल फूल रहे हैं ! जिससे व्यक्ति की व्यक्तिगत, सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा में सेंधमारी बढ़ रही है ! ऐसे में जरूरत है कि सूचना तकनीक से जुड़े पूरे सुरक्षा प्रणाली तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जावे, ताकि अपराधी द्वारा अनाधिकृत सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर शिकंजा कसा जा सके ! साथ ही सरकारों द्वारा गठित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल द्वारा साइबर स्पेस से इंटेलिजेंस एकत्रित कर , कानून व्यवस्था , राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, जाति ,धर्म, पंत व देश विरोधी टिप्पणी करने वाले यूजर्स के खिलाफ कड़ा पहरा व निगरानी सुनिश्चित करवाई जाये , ताकि बढ़ते साइबर अपराध के ग्राफ को नियंत्रित किया जा सके !

 

साइबर कानून का क्रियान्वयन बेहद जरूरी....

 

                     सोशल मीडिया के दुरुपयोग का मुद्दा ऐसा है जिसकी अब अनदेखी नहीं की जा सकती है ! गलत विचारों को साझा करने से , देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है ! ऐसे में इसके खिलाफ कड़े कानून की सख्त जरूरत है ! गलत खबर के जरिए , किसी की भावना को ठेस पहुंचाने वाले व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सजा और जुर्माने का प्रावधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ! भारत सरकार द्वारा बनाए गए, साइबर सुरक्षा नीति और सूचना तकनीक कानून का क्रियान्वयन दृढ़ता से किया जाना बेहद जरूरी हो गया है तथा सोशल मीडिया के अनैतिक प्रयोग पर , संबंधित प्लेटफार्म व कंपनी की जिम्मेदारी व जवाबदेही तय करने का वक्त आ चुका है ! सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण करते रहने तथा शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने के लिए, सोशल मीडिया इंटेलिजेंस एजेंसी का गठन कर , सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परोसी  जाने वाली आपत्तिजनक सामग्रियों को बिना देरी किए ही हटाया जाए ! राज्यों की क्राइम ब्रांच फॉर सोशल मीडिया मैनेजमेंट के लिए विशेषज्ञ विशेषज्ञों की कमी को भी दूर किया जाना चाहिए, ताकि  क्राइम व क्रिमिनल की कुंडली का डाटा रखकर, क्राइम को कंट्रोल किया जा सके तथा उनकी प्रभावी जांच सुनिश्चित हो सके !

 

सोशल मीडिया का अनैतिक प्रयोग, चिंताजनक....

 

                     सोशल मीडिया ने जहां आमजन को अभिव्यक्ति की मौलिक आजादी दी है और इस मंच के जरिए, सामाजिक बदलाव की बयार लाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चिंता का विषय है कि मौजूदा समय में सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के लिए चर्चा में रह रहा है ! दरअसल , सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने में, सकारात्मक सोच की जगह , समाज व देश को तोड़ने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है ! यह सोशल मीडिया की ही देन है कि आतंकवाद, बच्चों के चोर गिरोह की अफवाह, महिलाओं की चोटी काटने के गिरोह की अफवाह , चड्डा गिरोह, पत्थर फेंक गिरोह , आदि की झूठी व भ्रामक अफवाह फैलाकर, लोगों की भीड़ द्वारा बेगुनाह लोगों की मौत का कारण या मोब लिंचिंग की घटनाएं देखने और सुनने को मिल रही है ! इस प्रकार अपना देश सोशल मीडिया की वजह से फैल रही नफरतों व अपराधों से संघर्ष कर रहा है , जो देश के विकास के लिए बाधक साबित हो रहा है !

 

साइबर अपराधों का बढ़ना, एक नई चुनौती....

 

          बेतहाशा बढ़ते जनसंख्या दबाव व आधुनिकता की होड़ में , सोशल मीडिया का प्रचलन बढ़ा है , जिसके सदुपयोग के साथ-साथ दुरुपयोग के रूप में साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं ! सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों में आई तेजी , पुलिस-प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन गई है ! सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि विगत 5 वर्षों में राजस्थान में सोशल मीडिया से संबंधित अपराध की 2000 मामले दर्ज हुए हैं ! मोबाइल चोरी की घटनाएं , यूजर्स की आईडी हैक किए जाने की शिकायतें, अब आम बात हो चुकी है ! 

 

इलेक्ट्रॉनिक कचरा, पर्यावरण के लिए खतरा....

 

                  प्रकृति प्रेमियों द्वारा इन सोशल मीडिया के उपकरणों जैसे- मोबाइल, लैपटॉप, आईपैड,  एलईडी ,  कंप्यूटर, स्मार्टफोन, स्केनर, फोटोस्टेट मशीन, स्पीकर, चार्जर, आदि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसो के बेतहाशा प्रचलन व संग्रहण से, ना केवल बाजार अटे पड़े हैं बल्कि घरों में भी इनकी तादाद बढ़ती जा रही है ! एक निश्चित अवधि के पश्चात, इनके अवधिपार होने या खराब होने की स्थिति पर, यह इलेक्ट्रॉनिक कचरे का रूप ले लेते हैं ! यह बेकार व अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक कचरा  गली , मोहल्ला , चौराहा  या सड़क किनारे फेंक दिया जाता है ! जिसके चलते प्रकृति को  नुकसान पहुंच रहा है ! पर्यावरण विदों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण एवं प्रबंधन के अभाव के चलते, पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर भी चिंता जाहिर की जा रही है ! इस प्रकार, सोशल मीडिया जनित ई-अपशिष्ट द्वारा पर्यावरण को होने वाले खतरे का अंदेशा लगातार बना हुआ है !

 

सामाजिक जागरूकता,सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाव की युक्ति ....

 

         जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए  सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा मिलकर , जागरूकता संबंधी कार्यक्रम और सेमिनार का आयोजन कर, इस समस्या पर अंकुश लगाया जा सकता है ! कोरोना काल में नौनिहाल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए झोंकना, कहीं उनके दृष्टि एवं श्रवण इंद्रियों की कार्य क्षमता में गिरावट ला रहा है ! साथ ही उनमें चिड़चिड़ापन तथा मोटापा के लक्षण देखे जा रहे हैं ! अब  यह जरूरी हो गया है कि सोशल मीडिया का बेहतर तरीके से प्रयोग कर, आने वाली पीढ़ी को एक अनुशासित और साफ सुथरा माहौल मुहैया करवाया जाए तथा शासन-प्रशासन व आमजन की नैतिक जिम्मेदारी है कि इंटरनेट का प्रयोग नियंत्रित व संयमित किया जावे ताकि इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सके !

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