किशोर न्याय प्रणाली के तहत हितधारकों के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

  न्यायाधिपति संदीप मेहता ने आज की कार्यशाला में विधि से संघर्षरत बालक एवं ऐसे बालक जिन्हें देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है, के संबंध में किशोर न्याय बोर्ड, बाल न्यायालय व हितधारकों की भूमिका तथा प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट की शक्तियों व कर्तव्य, बालकों के कल्याण एवं सुरक्षा की आवश्यकता एवं पुनर्वास के साथ स्वयंसेवी संगठनों व बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा बालकों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012, किशोर न्याय अधिनियम व अन्य विधायनों के तहत बाल मनोविज्ञान व बाल मैत्री पुलिस की भूमिका संबंधी विधिक प्रावधानों की जानकारी दी तथा बाल गृहों में नवाचार को आज की आवश्यकता बताते हुए इस दिशा में कार्य करने को कहा। 

कार्यशाला का आयोजन तीन कार्यकारी सत्रों में किया गया। प्रथम सत्र में प्रदन्या देशपाण्डे ने बाल मनोविज्ञान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। द्वितीय सत्र में यूनिसेफ सदस्य जावेद ने जेजे एक्ट की जानकारी सरल भाषा में दी। तृतीय सत्र में यूनिसेफ के आशुतोष ने जेजे एक्ट में पुलिस की भूमिका तथा धर्मेन्द्र ने बाल संरक्षण संस्थानों की भूमिका के बारे में बताया। मंच संचालन यूनिसेफ की वरिष्ठ प्रबंधक डाॅ. ज्योति शर्मा ने किया। सचिव प्रशान्त शर्मा ने पधारे हुए सभी आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ एवं राजसमन्द के न्यायिक अधिकारीगण, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, विभिन्न एनजीओ के पदाधिकारी, पैनल अधिवक्ता तथा पीएलवी ने भाग लिया।

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Video ‘बाल गृहों में नवाचार आज की आवश्यकता - जस्टिस   मेहता‘‘

Video ‘बाल गृहों में नवाचार आज की आवश्यकता - जस्टिस मेहता‘‘

Sun 19 May 19  9:37 pm


भीलवाड़ा हलचल। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के तत्वाधान एवं यूनिसेफ के सहयोग से किशोर न्याय प्रणाली के तहत हितधारकों के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन विट्टी इन्टरनेशनल स्कुल आटुण रोड पर किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता राजस्थान उच्च न्यायालय  के  न्यायाधिपति  संदीप मेहता, ने की। कार्यशाला का शुभारम्भ द्वीप प्रज्जवलन कर किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश भीलवाड़ा प्रकाश चंद्र पगारिया ने स्वागत् उद्बोधन दिया। तत्पश्चात् प्राधिकरण के सदस्य सचिव अशोक कुमार जैन ने कार्यशाला की रूप रेखा एवं उद्देश्य के बारे में बताया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चित्तौड़गढ़ हेमन्त कुमार जैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजसमंद देवेन्द्र जोशी ने किशोर न्याय अधिनियम के बारे में जानकारी दी। 

  

किशोर न्याय प्रणाली के तहत हितधारकों के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

  न्यायाधिपति संदीप मेहता ने आज की कार्यशाला में विधि से संघर्षरत बालक एवं ऐसे बालक जिन्हें देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है, के संबंध में किशोर न्याय बोर्ड, बाल न्यायालय व हितधारकों की भूमिका तथा प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट की शक्तियों व कर्तव्य, बालकों के कल्याण एवं सुरक्षा की आवश्यकता एवं पुनर्वास के साथ स्वयंसेवी संगठनों व बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा बालकों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012, किशोर न्याय अधिनियम व अन्य विधायनों के तहत बाल मनोविज्ञान व बाल मैत्री पुलिस की भूमिका संबंधी विधिक प्रावधानों की जानकारी दी तथा बाल गृहों में नवाचार को आज की आवश्यकता बताते हुए इस दिशा में कार्य करने को कहा। 

कार्यशाला का आयोजन तीन कार्यकारी सत्रों में किया गया। प्रथम सत्र में प्रदन्या देशपाण्डे ने बाल मनोविज्ञान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। द्वितीय सत्र में यूनिसेफ सदस्य जावेद ने जेजे एक्ट की जानकारी सरल भाषा में दी। तृतीय सत्र में यूनिसेफ के आशुतोष ने जेजे एक्ट में पुलिस की भूमिका तथा धर्मेन्द्र ने बाल संरक्षण संस्थानों की भूमिका के बारे में बताया। मंच संचालन यूनिसेफ की वरिष्ठ प्रबंधक डाॅ. ज्योति शर्मा ने किया। सचिव प्रशान्त शर्मा ने पधारे हुए सभी आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ एवं राजसमन्द के न्यायिक अधिकारीगण, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, विभिन्न एनजीओ के पदाधिकारी, पैनल अधिवक्ता तथा पीएलवी ने भाग लिया।

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