आज की बदलती जीवनशैली, मोटापा, गलत खानपान के कारण गठिया यानी अर्थराइटिस रोग युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। पिछले बीस साल में इसके मरीजों की संख्या में करीब पचास प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में यह रोग मधुमेह के बाद सबसे तेजी से फैल रहा है। सिर्फ भारत की बात करें तो यहां लगभग 15 प्रतिशत लोगों में गठिया रोग पाया जाता है।

 हर वर्ष 12 अक्टूबर का दिन विश्व गठिया दिवस (World Arthritis Day) के तौर पर मनाया जाता है। लोगों के बीच गठिया की बीमारी के बारे में जागरुकता फैलाने को लेकर विश्व गठिया दिवस मनाया जाता है। रामस्नेही चिकित्सालय के डॉक्टर योगेश दर योगेश दरगड़( DR YOGESH DARGAR) ने बताया कि ऑर्थराइटिस में जोड़ों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण मरीज को चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है। आज की लाइफस्टाइल में लोग बिल्कुल गतिहीन हो गए हैं, जिसका बुरा असर उनके शरीर और हड्डियों पर पड़ता है। यही वजह है कि आर्थराइटिस (खासतौर पर घुटनों का आर्थराइटिस) महामारी का रूप ले रहा है। उम्र के साथ होने वाला आर्थराइटिस ऑस्टियोऑर्थराइटिस कहलाता है। भारत में ऑस्टियोऑर्थराइटिस आमतौर पर 55-60 की उम्र में होता है, लेकिन आज कम उम्र में भी लोग आर्थरिटिस और अपंगता का शिकार बन रहे हैं।

लक्षण और कारण
आर्थराइटिस का सबसे आम प्रकार है ऑस्टियोआर्थराइटिस। इसका असर जोड़ों, विशेष रूप से कूल्हे, घुटने, गर्दन, पीठ के नीचले हिस्से, हाथों और पैरों पर पड़ता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस आमतौर पर कार्टिलेज जॉइंट में होता है। कार्टिलेज हड्डियों की सतह पर मौजूद सॉफ्ट टिश्यू है, जो ऑर्थराइटिस के कारण पतला और खुरदरा होने लगता है। इससे हड्डियों के सिरे पर मौजूद कुशन कम होने लगते हैं और हड्डियां एक दूसरे से रगड़ खाने लगती हैं। आर्थराइटिस के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। इसमें दर्द, अकड़न, ऐंठन, सूजन, हिलने-डुलने या चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है।

उनके अनुसार, आर्थराइटिस का मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़ा है। भारतीय आबादी में खान-पान के तरीके भी इस बीमारी का कारण बन चुके हैं। शहरी लोग आजकल कम चलते-फिरते हैं, जिससे उनकी शारीरिक एक्टिविटी का स्तर कम हो गया है। महिलाएं कई कारणों से ऑर्थराइटिस का शिकार हो रही हैं, जैसे चलने-फिरने में कमी, जिसके कारण मसल कम होना आजकल आम हो गया है।

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World Arthritis Day 2019: विश्व गठिया दिवस पर जानें इस बीमारी से बचने के उपाय

World Arthritis Day 2019: विश्व गठिया दिवस पर जानें इस बीमारी से बचने के उपाय

Sat 12 Oct 19  9:36 am


 

आज की बदलती जीवनशैली, मोटापा, गलत खानपान के कारण गठिया यानी अर्थराइटिस रोग युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। पिछले बीस साल में इसके मरीजों की संख्या में करीब पचास प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में यह रोग मधुमेह के बाद सबसे तेजी से फैल रहा है। सिर्फ भारत की बात करें तो यहां लगभग 15 प्रतिशत लोगों में गठिया रोग पाया जाता है।

 हर वर्ष 12 अक्टूबर का दिन विश्व गठिया दिवस (World Arthritis Day) के तौर पर मनाया जाता है। लोगों के बीच गठिया की बीमारी के बारे में जागरुकता फैलाने को लेकर विश्व गठिया दिवस मनाया जाता है। रामस्नेही चिकित्सालय के डॉक्टर योगेश दर योगेश दरगड़( DR YOGESH DARGAR) ने बताया कि ऑर्थराइटिस में जोड़ों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण मरीज को चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है। आज की लाइफस्टाइल में लोग बिल्कुल गतिहीन हो गए हैं, जिसका बुरा असर उनके शरीर और हड्डियों पर पड़ता है। यही वजह है कि आर्थराइटिस (खासतौर पर घुटनों का आर्थराइटिस) महामारी का रूप ले रहा है। उम्र के साथ होने वाला आर्थराइटिस ऑस्टियोऑर्थराइटिस कहलाता है। भारत में ऑस्टियोऑर्थराइटिस आमतौर पर 55-60 की उम्र में होता है, लेकिन आज कम उम्र में भी लोग आर्थरिटिस और अपंगता का शिकार बन रहे हैं।

लक्षण और कारण
आर्थराइटिस का सबसे आम प्रकार है ऑस्टियोआर्थराइटिस। इसका असर जोड़ों, विशेष रूप से कूल्हे, घुटने, गर्दन, पीठ के नीचले हिस्से, हाथों और पैरों पर पड़ता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस आमतौर पर कार्टिलेज जॉइंट में होता है। कार्टिलेज हड्डियों की सतह पर मौजूद सॉफ्ट टिश्यू है, जो ऑर्थराइटिस के कारण पतला और खुरदरा होने लगता है। इससे हड्डियों के सिरे पर मौजूद कुशन कम होने लगते हैं और हड्डियां एक दूसरे से रगड़ खाने लगती हैं। आर्थराइटिस के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। इसमें दर्द, अकड़न, ऐंठन, सूजन, हिलने-डुलने या चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है।

उनके अनुसार, आर्थराइटिस का मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़ा है। भारतीय आबादी में खान-पान के तरीके भी इस बीमारी का कारण बन चुके हैं। शहरी लोग आजकल कम चलते-फिरते हैं, जिससे उनकी शारीरिक एक्टिविटी का स्तर कम हो गया है। महिलाएं कई कारणों से ऑर्थराइटिस का शिकार हो रही हैं, जैसे चलने-फिरने में कमी, जिसके कारण मसल कम होना आजकल आम हो गया है।

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