चेतावनी! कहीं गलत जगह न पहुंचा दे गूगल मैप, तेजी से खिसक रहा पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र

चेतावनी! कहीं गलत जगह न पहुंचा दे गूगल मैप, तेजी से खिसक रहा पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र

Wed 06 Feb 19  8:30 pm

 अगर आप गूगल मैप या किसी अन्य जीपीएस सेवा का नियमित इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पृथ्वी के बदलते चुंबकीय क्षेत्र की वजह से हो सकता है कि आप रास्ता भटक जाएं। सुनने में ये भले ही अपटपटा लग रहा हो, लेकिन सच है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र प्रति वर्ष 50 किमी से ज्यादा की रफ्तार से खिसक रहा है। सोमवार (4 फरवरी 2019) को वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल ने पाया कि पोल के खिसकने की मौजूदा रफ्तार लगभग 34 मील (55 किमी) प्रति वर्ष है।

 

हमारे कंपास और दिशा सूचक यंत्र सही से काम करते रहें, इसके लिए वैज्ञानिक वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल के नए अपडेट की तैयारी में जुटे हुए हैं। ये कोई पहली बार नहीं है कि पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव खिसक रहा है। ये एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी रफ्तार बढ़ गई है। चुंबकीय क्षेत्र खिसकने से हमारे दिशा सूचक यंत्रों पर कोई असर न पड़े, इसके लिए वैज्ञानिक प्रत्येक पांच साल में वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल (डब्ल्यूएमएम) में नए अपडेट करते रहते हैं। वैज्ञानिकों ने अंतिम बार वर्ष 2015 में वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल में अपडेट किया था।

अमेरिकी शटडाउन से पूरी दुनिया परेशान

जानकारों के अनुसार जीपीएस, धरती के भौगोलिक और चुंबकीय ध्रुवों के अंतर की गणना के आधार पर काम करता है। भौगोलिक उत्तरी ध्रुव और चुंबकीय उत्तरी ध्रुव में अंतर होता है। इसलिए वक्त-वक्त पर वैज्ञानिक वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल में अपडेट करते रहते हैं। इस बार ये अपडेट 15 जनवरी 2019 को किया जाना था। अमेरिका में शटडाउन की वजह से इस अपडेट में देरी हो रही है। इसकी वजह से पूरी दुनिया के दिशा सूचक यंत्र प्रभावित हो रहे हैं।

 

क्यों हो रहा तेजी से बदलाव
वैज्ञानिकों को फिलहाल ये नहीं पता है कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव के खिसकने की रफ्तार क्यों बढ़ गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार भौगोलिक ध्रुव अपनी जगह पर बना रहता है, वहीं चुंबकीय उत्तरी ध्रुव लगातार खिसकता रहता है। ऐसा पृथ्वी के गर्भ में होने वाली हलचलों के कारण होता है। धरती के नीचे लोहे के बहाव का भी इस पर काफी असर पड़ता है। समुद्र की धारा और धरती के नीचे पिघल रहे लोहे का भी इस पर काफी असर पड़ता है। लिहाजा वैज्ञानिक चुंबकीय उत्तरी ध्रुव के तेजी से खिसकने की सही वजह का पता लगाने में जुटे हुए हैं।

188 साल में 2300 किमी खिसका चुंबकीय क्षेत्र
वैज्ञानिकों के अनुसार चुंबकीय क्षेत्र की माप पहली बार वर्ष 1831 में की गई थी। तब से अब तक 188 वर्ष में ये चुंबकीय क्षेत्र कनाडा से साइबेरिया की ओर 1400 मील (2300 किमी) तक खिसक चुका है। वर्ष 2000 के मुकाबले चुंबकीय उत्तरी ध्रुव के खिसकने की रफ्तार तकरीबन चार गुना हो चुकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार अभी इसकी वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले वर्षों में ध्रुव के खिसकने की रफ्तार और बढ़ सकती है।