नीट 2018 : भरपूर आत्मविश्वास के साथ अपनी तैयारी को ऐसे दें अंजाम

नीट 2018 : भरपूर आत्मविश्वास के साथ अपनी तैयारी को ऐसे दें अंजाम

Fri 04 May 18  6:33 pm

अब तक की गयी नीट की तैयारी को समेटने और भरपूर आत्मविश्वास के साथ अपनी मेहनत को साकार करने का वक्त आ गया है. यह सही है कि बचे चंद घंटों में पूरे सिलेबस को दोहरा पाना किसी के बस की बात नहीं है, ऐसे में आपकी अचूक रणनीति और आत्मविश्वास ही नीट में सफलता की राह को आसान बनायेंगे. 

 

किसी भी प्रकार का तनाव अब तक की तैयारी पर पानी फेर सकता है, अत: इससे दूर ही रहें, तो बेहतर है. परीक्षा हाल में प्रश्नपत्र के हल करने के तौर-तरीकों, विशेषज्ञ के बहुमूल्य सुझावों और अन्य अहम जानकारियों के साथ प्रस्तुत है आज का विशेष पेज...

 

विशेष प्लानिंग से आसान बनाएं सफलता की राह

 

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के लिए अब सिर्फ दो दिन शेष रह गये हैं. परीक्षा में शामिल होनेवाले छात्रों के लिए यह वक्त है, अपनी तैयारी के लिए पूरी तरह से समेटने का. परीक्षा का समय जैसे-जैसे नजदीक आने लगता है, वैसे-वैसे छात्रों के मन में मजबूत तैयारी के बाद भी कुछ आशंकाएं पैदा होने लगती हैं. 

 

इस बात को लेकर वे कुछ ज्यादा ही तनाव ले बैठते हैं कि कहीं एग्जाम हॉल में उनसे कोई ऐसी चूक न हो जाये, जो उनकी मेहनत पर पानी फेर दे. यदि आपके मन में भी इस तरह के सवाल उठ रहे हैं, तो पढ़ाई के इतर आपके लिए जरूरी है अपने आप से कुछ ऐसे प्रश्न के उत्तर पूछने की, जो न सिर्फ आपके तनाव को दूर कर सकते हैं, बल्कि परीक्षा हॉल में दाखिल होने से पहले आपका आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं.

नीट क्वालीफाई करना क्या वाकई में है मुश्किल परीक्षा के लिए अब केवल दो दिन शेष हैं. अधिकतर छात्रों के मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि क्या वे परीक्षा में क्वालीफाई करने के लिए ठीक परफॉर्मेंस दे पायेंगे या नहीं. 

 

यदि आप भी इस प्रश्न के चलते तनावग्रस्त हो रहे हैं, तो आपको जरूरत है एक बार नीट के पिछले वर्षों के परीक्षा फल पर नजर डालने की. नीट के पिछले दो वर्षों के परिणाम को देखें, तो वर्ष 2016 में ओपन कैटेगरी का कट-ऑफ 720 में से 145 अंक रहा और 2017 में 720 में से 131 अंक का कट-ऑफ गया. इससे आप यह समझ सकते हैं कि नीट परीक्षा में क्वालीफाई करना उतना भी मुश्किल नहीं है, जितना कि आप समझ रहे हैं.

 

क्या जरूरी है टारगेट पर फोकस करना 

 

देखा गया है कि छात्र आमतौर पर पिछले वर्ष के कट-ऑफ को चेक करते हैं और उसके मुताबिक परीक्षा का लक्ष्य तय करते हैं. अनेक शोध में यह पाया गया है कि एग्जाम हॉल में लक्ष्य के बारे में सोचने से अंक कम हो जाते हैं. 

 

छात्रों को यह समझना चाहिए कि उन्हें ऐसी रणनीति बनानी होगी, जिससे ज्यादा-से-ज्यादा अंक हासिल किये जा सकें. यदि कोई छात्र यह सोचता है कि किसी खास कॉलेज में दाखिले के लिए उसे नीट में 550 अंकों की जरूरत होगी, तो वह एग्जाम हॉल में कम-से-कम उतना अंक हासिल करने के लिए पैनिक रहता है, जिस कारण से कई बार वह डिप्रेशन में भी आ जाता है. 

 

स्टूडेंट्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि 550 अंक हासिल करने के लिए भले ही उसने 650 सवालों को हल तो किया, लेकिन हो सकता है कि निगेटिव मार्किंग के ट्रैप में आने से उसे इच्छित अंक न प्राप्त हों. सवालों के जवाब में पूरी तरह से कॉन्फिडेंट होने पर वह 500 तक स्कोर हासिल कर सकता है. सवालों का जवाब देना आपकी क्षमता व आपकी तैयारी पर निर्भर करता है, न कि आपकी इच्छा पर.

 

किस विषय से करें प्रश्नपत्र को हल करने की शुरुआत

 

नीट परीक्षा में शामिल होनेवाले अधिकतर छात्र बायोलॉजी के प्रश्नों से पेपर को हल करने की शुरुआत करना पसंद करते हैं. इसके बाद फिजिक्स और केमिस्ट्री की ओर बढ़ते हैं. छात्र ऐसा महसूस करते हैं कि इस तरीके से वे बायोलॉजी में अच्छा स्कोर हासिल कर सकते हैं. यहीं पर छात्र बड़ी गलती करते हैं. 

 

प्रत्येक विषय में कुछ आसान, मध्य-स्तरीय और कठिन सवाल होंगे और बायोलॉजी पर भी यही लागू होगा. यदि ऐसा नहीं होता, तो वर्ष 2017 में बायोलॉजी पेपर में 360 अंकों में से कट-ऑफ 131 अंकों का कैसे हो सकता था. इसलिए यह बिल्कुल जरूरी नहीं कि नीट के प्रश्नपत्र को हल करने के लिए पहले बायोलॉजी का चयन किया जाये. छात्र उस विषय का चयन पहले करें, जो उन्हें अच्छी तरह से तैयार हो.

 

कितना सही है प्रश्नपत्र को क्रमवार तरीके से हल करना

 

कई छात्र ऐसे हैं, जो परीक्षा में आनेवाले प्रश्नों को क्रमवार तरीके से हल करने का प्रयास करते हैं. इस स्थिति में यदि पहला प्रश्न उन्हें कठिन लगाता है, तो भी वे उसे हल करने की कोशिश में लगे रहते हैं और उत्तर को लेकर आश्वस्त न होने पर वे उसे छोड़ कर आगे बढ़ते हैं. 

 

यदि दूसरा प्रश्न भी उन्हें कठिन लगता है, तो इस स्थिति में छात्र के दिमाग में तुरंत ही यह धारणा बन जाती है कि पेपर बहुत कठिन है और इस बार वह परीक्षा में पास नहीं हो पायेगा. वहीं वे छात्र जो क्रमवार प्रश्नों को हल करने की बजाय उन प्रश्नों को पहले हल करते हैं, जिनके उत्तर को लेकर वे पूरी तरह से आश्वस्त होते हैं. वे एक के बाद एक प्रश्नों को हल करते जाते हैं और कठिन प्रश्नों को अंत में हल करने का प्रयास करते हैं. ऐसे छात्र परीक्षा के दौरान नकारात्मकता से दूर रहते हैं और बेहतर परफॉर्म कर पाते हैं.

 

रफ वर्क का भी होता है महत्व

 

प्रश्न पत्र को हल करने के दौरान छात्रों को रफ वर्क के लिए शीट दी जाती है. अधिकतर छात्र रफ वर्क को इतने गंदे तरीके से लिखते हैं, कि खुद उनके लिए ही उसे पढ़ना मुश्किल हो जाता है. कई बार ऐसा होता है कि छात्र किसी प्रश्न को हल करने के लिए रफ वर्क करते हैं और आधे में ही उसे छोड़ कर दूसरा प्रश्न हल करने लग जाते हैं.

 

वहीं प्रश्नों को हल करने के बाद बचे हुए समय में एक-बार फिर वे आधे हल किये हुए प्रश्न से दोबारा से हल करने के बारे में सोचते हैं, तो खुद उन्हें ही याद नहीं रहता कि उन्होंने निर्धारित रफ शीट के किस हिस्से में उस प्रश्न को हल करने का प्रयास किया था. ऐसे में वे एक ही प्रश्न को दोबारा से हल करना शुरू करते हैं. यदि छात्र रफ वर्क को साफ-सुथरे तरीके से करेंगे, तो वे उत्तर को जहां पर छोड़ेंगे, वहीं से आगे हल कर सकेंगे. ऐसा करने से उनका वक्त बर्बाद होने से बचेगा.

 

निगेटिव मार्किंग से कैसे बचें?

 

निगेटिव मार्किंग के साथ अक्सर आपकी साइकोलॉजी जुड़ी होती है. दोनों में बेहद करीबी संबंध पाया गया है. निगेटिव मार्किंग की घटनाएं अक्सर मनोवैज्ञानिक कारणों से पैदा होती हैं. इसलिए निगेटिव मार्किंग के संबंध में कुछ कॉमन फैक्टर्स को समझने और किसी भी कीमत पर उसका निदान करना चाहिए. छात्र को निगेटिव मार्किंग से बचने के लिए किसी तरह का तुक्का लगाने से बचना चाहिए.

 

प्लानिंग के लिए भी समय देना जरूरी

 

परीक्षा के दौरान सबसे पहले आसान और उसके बाद उससे कुछ कठिन प्रश्नों का हल करना चाहिए. यदि अंत में आपके पास समय बचे, तो कठिन सवालों को दोबारा से हल करने का प्रयास कर सकते हैं. 

 

समय शेष होने पर कठिन सवाल को छोड़ देने की बजाय उसका हल निकालना चाहिए. इस तरह की रणनीति को अपनाने का मकसद यह है कि आसान सवालों में आपको निगेटिव मार्किंग नहीं आये, क्योंकि इसमें प्रत्येक सही सवाल के लिए आपके चार अंक सुनिश्चित हैं. मध्य-स्तरीय और कठिन प्रश्नों के जवाब में निगेटिव मार्किंग की आशंका बढ़ जाती है. आसान सवालों से शुरुआत करने से आखिर में समय बहुत बचता है. 

एक आसान सवाल का जवाब देने में छात्रों को औसतन 30 से 45 सेकेंड का समय लगता है, जिससे आगे के लिए कठिन सवालों का हल करने के लिए समय बचता है. प्लानिंग के लिए कम-से-कम 15 मिनट का समय रखना भी जरूरी है. इससे उन छात्रों को आसानी होती है, जो सवाल छोड़ देते हैं. इससे निगेटिव मार्किंग के रूप में मार्क्स को कम होने से बचाया जा सकता है.

 

खुद के बनाये नोट्स से रिवीजन होगा आसान

 

 

 

डायरेक्टर,   इंस्टीट्यूट 

 

नीट 2018 के लिए कुछ ही समय शेष बचा है. परीक्षार्थियों के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है.

 

- परीक्षा के अंतिम क्षणों में रिवीजन करने से पढ़ी हुई चीजें हमारे मस्तिष्क में अच्छी तरह बैठ जाती हैं, इसलिए ऐसा करना बहुत जरूरी है. चूंकि, नीट का सिलेबस काफी विस्तृत होता है. ऐसे में पूरे सिलेबस की बजाय बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक्स का ही रिवीजन करें.

- जिन चैप्टर्स में आप कमजोर हैं,  उनके रिवीजन पर इस अंतिम समय में ज्यादा समय न दें, बल्कि एक सरसरी निगाह उस पर डाल लें. क्योंकि इतने कम समय में अब उन चैप्टर्स को अच्छी तरह समझना आपके लिए संभव नहीं.

- बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक्स का विजुअल चार्ट बना लें, इससे आप उन टॉपिक्स को बेहतर तरीके से याद रख पायेंगें. नोट्स को समरी शीट, फ्लो चार्ट और फॉर्मूला शीट के तौर पर रिवाइज करना आपके लिए इस समय अच्छा रहेगा. इन चार्ट व शीट को ऐसी जगह रखें, जहां आसानी से आप उसे देख सकें.

- एक नजर पिछले साल के प्रश्नपत्रों पर भी डालें व बार-बार आने वाले प्रश्नों को चिह्नित करें. इन प्रश्नों को हल करने व रिवीजन करने पर ज्यादा जोर दें.

- हो सकता है कि बेहतर तैयारी के बावजूद किसी चैप्टर और टॉपिक में आपको थोड़ी-बहुत शंका रह गयी हो, तो उन पर ध्यान दें और उन्हें दूर कर लें.

- बड़े चैप्टर को छोटे हिस्सों में बांट कर रिवाइज करें, इससे चीजें आपको आसानी से याद रह पायेंगी.