प्रतिज्ञा करने से परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है -  पं शंभू शरण लाटा

प्रतिज्ञा करने से परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है - पं शंभू शरण लाटा

Mon 19 Nov 18  6:00 pm

भीलवाड़ा (हलचल)  प्रतिज्ञा करने से परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है , बस सच्चे मन से परमात्मा का सुमिरन करना होगा उसे कभी नहीं छोड़ना होगा । मृत्यु सामने हो फिर भी यदि परमात्मा पर अटूट भरोसा है तो परमात्मा स्वयं अपने भक्तों को बचाने आते हैं । यह कहना है पंडित शंभू शरण लाटा का. पंडित  स्थानीय महेश वाटिका में श्री राम कथा आयोजन समिति भीलवाड़ा के सौजन्य से आयोजित श्री संगीतमय रामकथा के अंतर्गत सोमवार को धर्म सभा में श्रद्धालुओं को हनुमान , सुग्रीव , राम भरत प्रसंगों पर उद्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परमपिता परमात्मा पर अटूट श्रद्धा रखता है परमात्मा कभी उसका बुरा नहीं होने देते हैं , बस उसे परमात्मा पर भरोसा और भक्ति भाव कभी नहीं त्यागना चाहिए । धर्म की ओर यदि किसी व्यक्ति को जागृत होना है या धर्म के मार्ग पर बढ़ना है तो धीरे-धीरे करके बढ़ना चाहिए जिससे वह लंबे समय तक प्रभु भक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सके. एक बार में कभी भी व्यक्ति को परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती है।  व्यक्ति व्यापार से कुछ घंटे प्रभु भक्ति के निकाले धीरे धीरे उस समय को बढ़ाए और फिर वह प्रभु के बताये पथ पर आ सकेगा पंडित जी ने कहा कि व्यक्ति को भाग्य से जो लाभ मिल जाए उसे उसी में संतोष करना चाहिए , जो व्यक्ति लाभ और धन के पीछे जितना ज्यादा दौड़ता है लाभ उससे उतना दूर होता जाता है । व्यक्ति को अपने स्वभाव को सरल बनाना चाहिए मिल जाए तो उस पर हर्ष नहीं व्यक्त करना चाहिए ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए और कुछ नुकसान हो जाए अथवा कुछ चला जाए तो उस पर व्याकुल और परेशान नहीं होना चाहिए . इसीलिए कहा गया है कि संतोषी व्यक्ति सदा सुखी है . व्यक्ति के भाग्य में जो लिखा हुआ है वह उसे अवश्य मिलेगा और यदि भाग्य में कुछ नहीं लिखा है तो वह लाख प्रयत्न के बाद भी हासिल नहीं हो सकेगा । हनुमान राम राम प्रसंग पर उद्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वन में हनुमान ब्राह्मण का वेश धारण कर प्रभु राम के पास जाते हैं और उनसे उनका परिचय पूछते हैं भगवान राम संगीतमय तरीके से उन्हें अपना परिचय देते हैं और उनसे उनका परिचय पूछते हैं । यह सुनकर हनुमान गदगद हो जाते हैं और प्रभु राम के चरणों में समर्पित हो जाते हैं और कहते हैं कि जो व्यक्ति दुख में भी हंसते हुए और संगीतमय तरीके से अपना परिचय दे दे वह भगवान के सिवा कोई और नहीं हो सकता . । धर्म सभा में  शिवाष्टक का गुणगान किया गया और  जब धर्म सभा में श्री राम जय राम जय जय राम की संगीतमय  रामधुनी गूंजी श्रद्धालु भक्ति में भाव विभोर हो झूमने लगे । समिति के सत्यनारायण खंडेलवाल ने बताया कि कथा का मंगलवार को भव्य समापन किया जाएगा जिन व्यक्तियों ने इतने दिनों कथा का श्रवण नहीं किया वह कथा के समापन अवसर पर उपस्थित होकर कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।.