बोलीं भूमि पेडनेकर- घूंघट न रखने पर आज भी होती है महिलाओं की बेइज़्ज़ती...

बोलीं भूमि पेडनेकर- घूंघट न रखने पर आज भी होती है महिलाओं की बेइज़्ज़ती...

Fri 08 Feb 19  3:20 pm


सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों दम लगाके हईशा और टॉयलेट एक प्रेमकथा का का चेहरा अभिनेत्री भूमि पेंडेकर इनदिनों अपनी फिल्म सोनचिड़िया को लेकर खबरों में हैं. भूमि कहती हैं कि 'दम लगाके हईशा' से एक सुर लग गया. मैं उसी पर चल रही हूं. वैसे निजी तौर पर मैं बहुत ही सामाजिक तौर पर जागरुक इंसान हूं. मैं हमेशा ये कोशिश करती हूं कि अपने किरदारों के जरिए मैं समाज को कुछ वापस दे पाऊं. मैं बहुत खुशनसीब मानती हूं कि ऐसी औरतों की कहानी बोलने का मुझे मौका मिल रहा है. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत

'सोनचिड़िया' में आपका लुक काफी अलग था कितना मुश्किल था किरदार को आत्मसात करने में ?जब इस फिल्म का नरेशन अभिषेक सर ने दिया था तो उन्होंने उसी वक्त समझा दिया था कि आपको इस फिल्म की शूटिंग में टिके रहने के लिए शारीरिक और मान सिक तौर पर मजबूत बनाना होगा. बहुत ही डेप्थ ही हमारी ट्रेनिंग हुई थी. शुरुआत में समझ ही नहीं आ रहा था कि हम क्यों इतनी चीजें कर रहे हैं. ये सबसे अलग ट्रेनिंग थी मेरी. उन्होंने अपने ऑफिस में बकायदा एक गांव बसाया था. आरामनगर में मैं तीन चार किलोमीटर चलती थी नंगे पैर सर पर तीन चार लीटर पानी होता था. कंधे पर पांच से छह किलो की बोरी होती थी. आटे या चावल की. वो बहुत जरुरी थी क्योंकि अगर आप चंबल देखें वहां के बीहड देखें तो इतने पतले पतले रास्ते होते हैं. आपको खरोचे लगती हैं. अगर आप उस एरिया को अच्छे से नहीं जानते हैं तो आप बच नहीं सकते हो तो उसी की ट्रेनिंग हमें मिलनी शुरु हुई. हमने बुंदेलखंडी भाषा को सीखा . शुरुआत में लगा कि कैसे बोल पाएंगे क्योंकि बहुत ही अलग भाषा थी लेकिन जब तक हम शूटिंग सेट पर पहुंचते इतनी तैयारी हो चुकी थी कि हम एकदम सहज भाषा  को लेकर थे. चेहरे को काला किया गया. दो महीने पहले से ही पेडीक्योर मैनीक्योर बंद हो गया था. मैंने गोबर के उपले बनाए थे . मैं रोज दो किलो आटा पीसती थी मसाले पीसती थी.पानी सींचती थी. चूल्हे पर खाना बनाती थी. यह सब सुनने में आसान लगता है लेकिन बहुत मुश्किल था. वहां की औरतें बहुत ही स्ट्रांग होती हैं. उनको बहुत कुछ करना और झेलना पडता है. किरदार के करीब तक पहुंचने के लिए यह जरुरी था कि मेरी दिनचर्या ऐसी बनें कि मैं किरदार को बखूबी समझ सकूं. किरदार के लिए मैंने खुद को बाहरी दुनिया से कट ऑफ कर लिया था. इस किरदार के लिए बहुत ही बदलाव खुद में लाने पडे. कई चीजें जो सीखी थी उन्हें भूलना पडा.

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