वर्ष का शुभारंभ मंगल को एवं समापन मंगल को होने से मंगलकारी होगा नववर्ष 2019-बाबूलाल शास्त्री

Fri 28 Dec 18  1:07 pm

टोंक (हलचल) । नववर्ष 2019 का शुभारंभ मंगलवार सफला एकादशी तिथि में चार विशेष योगों के साथ, जैमिनी योग, केदार योग, धृति एवं कुमार योग में प्रारंभ हो रहा है। मंगलवार को शुरू होकर मंगलवार को वर्ष समाप्त होगा। जो गत वर्ष की अपेक्षा शुभ एवं मंगलकारी होगा। गोचर में चन्द्रमा स्वाति नक्षत्र, स्वामी राहु, तुला राशि स्वामी शुक्र में विचरण कर रहे है। शुक्र देव पूर्व में तुला राशि में विधमान है। अत: चन्द्र शुक्र तुला राशि में जैमिनी योग बना रहे है। शुक्र भौतिक सुखों का, चन्द्रमा मन का राहु आकस्मिक लाभ का कारक है। वर्ष 2019 का मुलांक तीन है, जिसका स्वामी देव गुरू बृहस्पति है जो मित्र मंगल की वृश्चिक राशि व स्व राशि धनु में भ्रमण कर रहे है।  अत: वर्ष में भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि, रूके  हुये मांगलिक कार्य एवं देश में खुशहाली होगी। आकस्मिक लाभ के योग बनेगें।  

मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि नववर्ष का शुभारंभ मंगल को होने एवं समापन मंगल को होने से तथा चन्द्र देव स्वाति नक्षत्र तुला राशि में भ्रमण करने व शुक्र देव स्व राशि में होने तथा वर्ष का मुलांक तीन के स्वामी बृहस्पति होने से, राहु, चन्द्र, गुरू, शुक्र, शनि ग्रहों के योग अनुसार आकस्मिक लाभ के योग बनेगें, भौतिक सुखों में वृद्धि के साथ-साथ मांगलिक कार्य सम्पन्न होगें। गत वर्ष 26 विवाह मुहुर्त थे, इस वर्ष 49 विवाह मुहुर्त है, अत: विवाह आदि मांगलिक कार्य ज्यादा होगें। देव गुरू बृहस्पति मित्र मंगल की वृश्चिक राशि एवं स्व धनु राशि में विचरण कर रहे है जो 10 अप्रेल को वक्री एवं 11 अगस्त को मार्गी होगें। शनि देव धनु राशि में विचरण कर रहे है, जो 30 अप्रेल को वक्री, 18 सितम्बर को मार्गी होगें। बुध देव 5 मार्च को वक्री होगें। शनि देव मार्गी होने से रूके हुये कार्य सम्पन्न करायेगें। राहु कर्क राशि से मिथुन में,  केतु मकर से धनु में 7 मार्च को प्रवेश करेगें। भगवान सूर्य देव 14 अप्रेल को मेष राशि में उच्च के होकर प्रवेश करेगें जो 15 मई तक रहेगेें। प्रवेश समय चन्द्रदेव सिंह राशि में भ्रमण करेगें। अत: उच्च के सूर्य होने से सूर्य को चन्द्रमा का बल मिलेगा। जिसके प्रभाव से जिन लडक़ों के विवाह योग में सूर्य बाधक हो, उनको सूर्य का शुभाशुभ फल मिलेगा। इस अवधि में पडऩे वाले अबूझ योग अक्षय तृतीया 7 मई, गंगा दशमी 11 मई, जानकी नवमी 13 मई को होने वाले विवाह आदि मांगलिक कार्यो को शुभाशुभ बल मिलेगा। देव गुरू बृहस्पति जिन कन्याओं के विवाह में बाधा आ रही हो उनको बृहस्पति का शुभाशुभ फल मिलेगा एवं विवाह आदि का योग होगा। मुहूर्त में चन्द्र बल, तारा बल देखना आवश्यक होगा। जिनके जन्मकालीन ग्रह, वक्री, अस्त, शत्रु भाव में अनिष्ठ भाव में हो उनको ग्रह शांति एवं दोष निवारण कराना आवश्यक होगा।