सीए बनना होगा कठिन, आईसीएआई ने किया सिलेबस में बदलाव

Wed 03 Jan 18  10:44 pm


नई दिल्ली : सीए बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए अब चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना आसान नहीं रह जाएगा , क्योंकि इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने सीए के कोर्स में बदलाव किया है। आईसीएआई के अध्यक्ष सीए नीलेश एस. विकामसे ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बदलाव से कोर्स में प्रवेश कठिन हो जाएगा। अब तक कहा जा रहा था कि सीए के लिए प्रवेश तो आसान है लेकिन इसके बाद कोर्स के अंदर छात्र फंसता चला जाता है और पास नहीं हो पाता। इसलिए एंट्री को भी थोड़ा मुश्किल किया गया है। इससे हमारा इनपुट-आउटपुट अनुपात सुधर जाएगा। सीपीटी को फाउंडेशन कोर्स में बदला सीए की नैशनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह से पहले इंस्टिट्यूट अध्यक्ष ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि हमने सीपीटी को फाउंडेशन कोर्स में बदल दिया है। पहले 200 अंकों का ऑब्जेक्टिव पेपर होता था। अब 400 अंकों का कर दिया गया है। इसमें 200 अंकों का ऑब्जेक्टिव और 200 का सब्जेक्टिव पेपर होगा। इंडस्ट्री के सुझाव के आधार पर कुछ नए विषय जोड़े गए हैं। इसमें बिजनस इकनॉमिक्स और जनरल फाइनैंशल नॉलेज विशेष शामिल किए गए हैं। फाइनल में पहले आईटी का 100 अंकों का पर्चा होता था, जिसे अब प्रैक्टिकल में तब्दील कर दिया गया है। छात्रों की पसंद को ध्यान में रखते हुए एक ऐच्छिक पेपर भी जोड़ा गया है। सीए असोसिएशन ने तीन साल के रिसर्च के बाद ये बदलाव किए हैं। कोर्स को ज्यादा वैश्विक और इंटरनैशनल अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुरूप बना दिया गया है। छात्रों की पसंद को ध्यान में रखते हुए एक ऐच्छिक पेपर भी जोड़ा गया है। सीए एसोसिएशन ने तीन साल के रिसर्च के बाद ये बदलाव किए हैं। कोर्स को ज्यादा वैश्विक और इंटरनेशनल अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुरूप बनाया गया है। \'नेफरा\' से नाराजगी सीए असोसिएशन के अध्यक्ष नोटबंदी और जीएसटी को बड़ा और साहसिक कदम करार दे रहे हैं। सीए विकामसे ने कहा कि ग्रोथ रेट में कमी शॉर्ट टर्म इफेक्ट है। इससे दीर्घकाल में देश को लाभ मिलेगा। हालांकि सीए सरकार द्वारा प्रस्तावित नैशनल फाइनैंशल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (नेफरा) के विरोध में हैं। इसके जरिए सरकार ऑडिट-अकाउंटिंग गड़बड़ियों की दशा में सीए पर दंडात्मक प्रावधान लाना चाह रही है। आईसीएआई अध्यक्ष के मुताबिक, नेफरा की हमारे यहां बिल्कुल जरूरत नहीं है। आईसीएआई संसद द्वारा गठित इंस्टिट्यूट है। लोगों को गलतफहमी है कि हम पूरी तरह स्वनियंत्रित हैं। हम पर सरकार की पूरी निगरानी है। कैग, रिजर्व बैंक, सेबी जैसी तमाम संस्थाओं के प्रतिनिधि हमारी समितियों में हैं। बिना इनकी मंजूरी के हम एक भी कदम नहीं बढ़ा सकते।
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