हड्डियों और जोड़ों के दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत

Sat 15 Dec 18  9:52 am

कई बार हम हड्डियों और जोड़ों के दर्द को नजरअंदाज करते चले जाते हैं, जबकि यह एक गंभीर बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत भी हो सकता है। समय पर ध्यान देकर हम हड्डियों में हो रहे नुकसान को रोक सकते हैं और इस बीमारी से बचे रह सकते हैं। क्या है यह बीमारी और कैसे रखें अपनी हड्डियों पर नजर, जानकारी देता आलेख ऑस्टियोपोरोसिस एक आम स्थिति है। आंकड़ों से पता चलता है कि पांच करोड़ भारतीयों को ऑस्टियोपोरोसिस है। वैसे तो किसी भी हड्डी या जोड़ में फ्रैक्चर हो सकता है, लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस आम तौर पर वर्टिब्रल (कशेरुकी) और कूल्हों के फ्रैक्चर के रूप में सामने आता है। भारत में यह बेहद उपेक्षित व कम उपचार वाली बीमारी है। कब होता है यह ऑस्टियोपोरोसिस तब होता है, जब नई हड्डी बनने और पुरानी हड्डी के अवशोषण में असंतुलन होता है। इससे हड्डी का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में हड्डी कमजोर हो जाती है तथा हड्डी टूटने या फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है। हड्डी का कमजोर होना धीरे-धीरे होता है और बढ़ता जाता है। हड्डियों को जानें हड्डी बनाने के लिए शरीर कैल्शियम और फॉस्फेट खनिजों का उपयोग करता है। हृदय और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को चालू रखने के लिए शरीर हड्डियों में रहने वाले कैल्शियम को फिर से जज्ब कर लेता है, ताकि खून में कैल्शियम का स्तर बनाकर रखा जा सके। ऐसे में कैल्शियम इनटेक (भोजन में कैल्शियम की मात्रा) कम हो या शरीर खाद्य पदार्थों से पर्याप्त कैल्शियम न प्राप्त करे तो अस्थि निर्माण या अस्थि टिश्यू प्रभावित हो सकता है। नतीजतन हड्डियां कमजोर, भंगुर या नाजुक हो सकती हैं। उम्र बढ़ने पर अधिक असर ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर रजोनिवृत्त महिलाओं में होता है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं में 40 साल के बाद होता है। ऑस्टियोपोरोसिस अकसर उम्र बढ़ने पर होता है, क्योंकि बोन टिश्यू के नष्ट होने की रफ्तार बढ़ती जाती है, खासकर उनके मामले में जो 65 साल से ऊपर के हैं। और भी हैं कारण ऑस्टियोपोरोसि के कुछ भी कारण हो सकते हैं। गोरी त्वचा, छोटी अस्थि संरचना, परिवार में इसका इतिहास, शरीर का कम वजन, कम कैल्शियम वाला भोजन, निष्क्रिय जीवनशैली, अत्यधिक अल्कोहल का सेवन, तंबाकू का उपयोग, स्टेरॉयड आदि का उपयोग भी इसका कारण हो सकते हैं। शुरू में नहीं चलता पता हड्डियों के कमजोर होने के शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, पर इसकी वजह से एक बार हड्डियां कमजोर हो जाएं तो कमर दर्द शुरू हो सकता है। यह वर्टिब्रा (रीढ़ की हड्डी) में चोट या फ्रैक्चर के कारण हो सकता है। कराएं हड्डियों की नियमित जांच बोन डेन्सिटी कम होने का पता लगाने के लिए बोन मिनरल डेन्सिटी टेस्ट एक सुरक्षित और दर्द हीन तरीका है। इससे विशेषज्ञ को हड्डियों की शक्ति और भविष्य में हड्डी टूटने का जोखिम समझने में सहायता मिलेगी। बोन मिनरल की मात्रा नापने के लिए बोन डेन्सिटोमीटर एक्स-रे की छोटी मात्रा का उपयोग करता है, जिसका संबंध अस्थि शक्ति से होता है।