‘’कॉलेज में प्रेम पत्र लिखते हुए बन गया लेखक - के.जी.कदम’’

‘’कॉलेज में प्रेम पत्र लिखते हुए बन गया लेखक - के.जी.कदम’’

Mon 07 Aug 17  7:59 pm


भीलवाड़ा (ओम कसारा)। ‘’ एम.एल.वी.कॉलेज में पढ़ने के दौरान कई मित्र अपनी प्रेमिकाओं को रिझाने के लिए मुझसे प्रेम पत्र लिखवाया करते थे और प्रति प्रेम पत्र पांच से दस रूपए देते थे। इसका परिणाम यह निकला कि करत-करत अभ्‍यास मैं भी लेखक बन गया। ‘’ यह बात प्रसिद्ध चित्रकार, कार्टूनिस्‍ट एवं व्‍यंग्‍यकार के.जी.कदम ने ‘’रूबरू’’ कार्यक्रम के दौरान कही।

                उन्‍होने कहा कि कलाकार को आध्‍यात्‍म एवं प्र‍कृति प्रेमी होना चाहिए। ऐसा होने पर उसका चित्‍त हर समय एकाग्र रहेगा और निरन्‍तर स्‍वाध्‍याय करते रहने से उसकी प्रत्‍येक रचना में नवीनता का अहसास होगा। साथ ही कलाकार को नित नये प्रयोग भी करते रहना चाहिए तभी वो निरन्‍तर आगे बढ़ने में सफल हो पाएगा।

             एक सवाल के जवाब में के.जी.कदम ने कहा कि समाज में व्‍याप्‍त विभिन्‍न कुरीतियों को देखकर बरबस ही मन में एक आक्रोश उत्‍पन्‍न होता है और इस सिस्‍टम को बदलने के लिए दिल छटपटाता है, तब कलम खुद ब खुद उठ जाती है और रचना होती है कार्टून की व लिखा जाता है व्यंग्‍य। हालांकि इसका आम जनमानस पर असर हो या न हो यह बात अलग है लेकिन इतना तय है कि कलाकार को अपना कर्तव्‍य निभाने का संतोष अवश्‍य मिलता हैं।

            आधुनिक पेंटिंग्‍स के महंगी होने की वजह बताते हुए कदम ने कहा कि कला की भी एक भाषा होती है जो कि सिर्फ समझ रखने वालों को ही पता चलती है। इसके पिछे एक लम्‍बी साधना है जहां तक पहुंचने के लिए बहुत गहराई तक डूबना पड़ता है उसके बाद ही इसका महत्‍व पता चलता है। एक अन्‍य प्रश्‍न के उत्‍तर में के.जी. कदम ने कहा कि आज के ज्‍यादातर युवा पेंटिंग्‍स के क्षैत्र में सिर्फ व्‍यवसायिक दृष्टिकोण को ध्‍यान में रखते हुए ही आना चाहते हैं इसलिए उनसे ज्‍यादा कलात्‍मक कार्य की उम्‍मीद नहीं की जा सकती। कलाकारों की आर्ट गैलेरी बनाने सम्‍बंधी वर्षों पुरानी मांग को लेकर अपनी पीड़ा व्‍यक्‍त करते हुए के.जी.कदम ने कटाक्ष किया कि राजनेता हमसे भी बड़े कलाकार हैं जो सिर्फ आश्‍वासन देने के अलावा कुछ नहीं करते।  

news news news