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120 भक्तों ने 2- 2 घंटे के अंतराल में किया अखंड रामायण पाठ

120 भक्तों ने 2- 2 घंटे के अंतराल में किया अखंड रामायण पाठ

 भीलवाड़ा बीएचएन।। श्री रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट की ओर से मानस रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती को लेकर आयोजित 3 दिवसीय महोत्सव गुरुवार को विभिन्न कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। ट्रस्ट के प्रवक्ता गोविंद प्रसाद सोडानी ने बताया कि गुरुवार को आयोजित संत समागम में जगन्नाथपुरी के संग रामेश्वरानंद सरस्वती ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बंदऊ गुरु पद परम् परागा अर्थात  गुरु संत परमात्मा के पैर क्यों छूने चाहिए। सिर, मुंह, कान एवं नाक भी शरीर के अंग है। फिर भी पैर ही क्यों छुए जाते हैं। इसका विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि पैरों में विष्णु का वास है। इसीलिए रामचरितमानस को कलम बन्ध संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास ने लिखी। हम इसे केवल पठन-पाठन तक सीमित नहीं रखें। पठन पाठन तो चित्त शुद्धि का मार्ग है। हम इसकी चौपाइयों से आत्मसात कर अनुसरण करेंगे और हर बात में मानस धारण करेंगे तो आदर्श परिवार बनेगा। तुलसी रचित रामायण को काशी के प्रखंड विद्वान मधुसूदन सरस्वती ने श्रेष्ठ बताया। भरत की भक्ति से विश्व विख्यात रामायण विश्व में श्रेष्ठ , पूजनीय व माननीय है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष राकेश सिंहल एवं तुलसीदास जयंती महोत्सव संयोजक संजीव गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम में गौरीशंकर गोपालन ने संत की महानता की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि पौधे, नदी, नाले, धरती सुख सकती है। संत की वाणी तो सदैव निर्मल रहती है। संत हमे भवसागर से तारता है। संत परोपकारी है। वैसे तो सभी अपने अपने परिवार में महापुरुषों की जयंती मनाते हैं मगर मानस रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती नहीं मनाते है केवल रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट ही उनकी जयंती माता आ रहा है। कार्यक्रम के दौरान भक्त राजेंद्र शर्मा ने रामायण के साथ कांडों को श्रेष्ठ बताया। पंडित रमाकांत आचार्य ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान भक्ति नीति सदाचार सब रामायण में मिलते हैं। प्रोफेसर जगदीश भदादा एवं नंदू बाई ने मेरा सत चित आनंद रूप कोई जाने रे, तीन लोक का में हूँ स्वामी   वनवानी मेरा सत चित जाने भजन गाया तो श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। सरजू देवी शर्मा ने गुरु वंदना का काव्य गीत सुनाया। नवरत्न पारीक ने बताया कि कार्यक्रम में पंडित घनश्याम माणम्या मानस मर्मज्ञ ने रामायण की चौपाइयों का गान कर बताया कि नर नारी को गोस्वामी तुलसीदास ने उस समय रामायण रचना कर  सनातनी संस्कृति को फैलाने में योगदान दिया। कार्यक्रम में संत राजेश्वरानंद सरस्वती हरिद्वार ने कहां की भक्ति मार्ग को प्रशस्त करने वाले सात सोपान हैं। भगवत प्राप्ति के लिए चौपाई गान आसान है।  संचालनकर्ता एवं ट्रस्ट के प्रवक्ता गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि समागम से पूर्व मंत्रोच्चार के साथ अखंड रामायण पाठ हुआ जिसमें दो 2-2 घंटे के अंतराल में लगभग 120 भक्तों ने 20 घंटे तक अनवरत रामायण चौपाई का गान किया। जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। उधर श्रावण मास के चलते रामधाम के शिवालय में गुरुवार को गोविंद खेमका एवं योगाचार्य योगेंद्र सक्सेना द्वारा रुद्राभिषेक कराया गया। शाम को शिव परिवार की भव्य सजावट की गई।